बीमारी से बचाने सरकार ने खर्च कर दिए 20 करोड़ रुपए, फिर भी साढ़े 9 हजार बच्चे जूझ रहे कुपोषण से

जिले में अभी भी 9 हजार 431 बच्चे हैं, जिन्हें कुपोषण से मुक्ति दिलाने की चुनौती है।

By: चंदू निर्मलकर

Published: 24 Jul 2018, 05:09 PM IST

धमतरी. जिले में कुपोषण के खिलाफ जंग में काफी हद तक सफलता मिली है। पिछले साल करीब 20 करोड़ रुपए खर्च कर 4 हजार 5 सौ बच्चों को सुपोषित किया गया। जिले में अभी भी 9 हजार 431 बच्चे हैं, जिन्हें कुपोषण से मुक्ति दिलाने की चुनौती है।

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उल्लेखनीय है कि कुपोषण मुक्ति अभियान के नाम पर शासन द्वारा हर साल करोड़ों रुपए खर्च किया जा रहा है। जिले में 1103 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं। यहां के बच्चों को रेडी-टू-ईट, रोटी समेत अन्य पूरक आहार दिया रहा है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं के लिए महतारी जतन योजना संचालित की जा रही है। इस योजना तहत उन्हें रोजाना आंगनबाडिय़ों में गर्म भोजन दिया जा रहा है। कार्यकर्ताओं के माध्यम से उन पर नजर भी रखी जा रही है। गर्भवती महिलाएं काम पर न जाए, इसलिए उन्हें मातृ वंदना योजना के तहत 5 हजार रुपए की राशि भी दी जाती है। इन सब योजनाओं का लाभ मिलने से अब कुपोषण का ग्राफ भी धीरे-धीरे कम होने लगा है। एक साल पहले जो बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित थे, वे अब सामान्य हो गए हैं।

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इतनी की हुई थी जांच
महिला एवं बाल विकास विभाग से मिली जानकारी के अनुसान वतन त्योहार के अंतर्गत इस साल आंगनबाड़ी केन्द्रों में शुन्यसे 5 वर्ष तक 57 हजार 431 बच्चों की सेहत की जांच की गई, जिसमें 16.57 प्रतिशत बच्चे कुपोषित मिले, जबकि पिछलेे साल कुपोषण की प्रतिशत करीब 23 प्रतिशत थी। इस तरह एक साल में 7 प्रतिशत कुपोषण कम हुआ।

जिले में कुपोषण की स्थिति
परियोजना बच्चों की संख्या कुपोषण का प्रतिशत
धमतरी शहर 5641 11.89
धमतरी ग्रामीण 13653 12.40
कुरूद 16374 10.88
मगरलोड 8976 20.66
नगरी 1277 27.69

शासन की योजनाओं का क्रियान्वय अच्छी तरह से हो रहा है। यही कारण है कि जिले में कुपोषण काफी कम हो गया है।
हरीकीर्तन राठौर, अधिकारी महिला एवं बाल विकास

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चंदू निर्मलकर Desk
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