आज ही दुनिया को मिला था मधुमेह का इलाज,देश में मधुमेह पीड़ितों के मामले में छत्तीसगढ़ नम्बर वन

आज ही दुनिया को मिला था मधुमेह का इलाज,देश में मधुमेह पीड़ितों के मामले में छत्तीसगढ़ नम्बर वन

Deepak Sahu | Publish: Apr, 15 2019 02:04:01 PM (IST) | Updated: Apr, 15 2019 02:04:02 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

आंकड़ों पर गौर करें तो देशभर के कुल मधुमेह पीडि़तों में से 8 फीसदी अकेले छत्तीसगढ़ में हैं।

रायपुर.डायबिटीज मेलेटस जिसे सामान्यत: मधुमेह कहा जाता है।जिसमें खून में ग्लूकोज या रक्त शर्करा का स्तर लम्बे समय तक बढ़ा रहता है। इस बीमारी के लक्षणों में ज्यादातर पेशाब आना होता है,प्यास और भूख में वृद्धि होती है।अगर हम इस बिमारी का समय से इलाज ना करवाएं तो यह कई जटिलताओं का कारण बन सकता है।गंभीर परिस्थितियों में केटोएसिडोसिस,नॉनकेटोटिक हाइपरोस्मोलर कोमा या मौत तक हो सकती है साथ ही इसके कारण हृदय रोग, स्ट्रोक, क्रोनिक किडनी की विफलता, पैर में अल्सर और आंखों को नुकसान भी शामिल है।

इंसुलिन की खोज

1918 में बर्लिन में जार्ज मेडविक ने प्राकृतिक इंसुलिन का विकल्प तैयार किया और उसे 8 मधुमेह रोगियों पर आजमाया। रोगियों को इससे लाभ तो हुआ लेकिन दवाई के गंभीर दुष्परिणाम भी सामने आये।अपने इस दवा का नाम उन्होंने इंसुलिन रखा।इस बीच मधुमेह का इलाज करने के लिए वैज्ञानिक लगतार प्रयास करते रहे और 1921 में फ्रेडरिक ग्रांट बैटिंग ने इसकी खोज की। शुरुआत में इसका कुत्तों पर परीक्षण किया गया और 15 अप्रैल 1923 में इसे बाजार में उतार दिया गया।उनकी इस उपलब्धि के लिए मैक्लियो के साथ संयुक्त रूप से चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार भी मिला।

भारत में मधुमेह की राजधानी छत्तीसगढ़

एकतरफ जहाँ भारत मधुमेह का घर है तो वहीं छत्तीसगढ़ इसकी राजधानी के तौर पर उभरा है। अंतर्राष्ट्रीय डायबटीज फेडरेशन के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में 38 करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित हैं जबकि अकेले भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या 7 करोड़ से ज्यादा है।आंकड़ों पर गौर करें तो देशभर के कुल मधुमेह पीडि़तों में से 8 फीसदी अकेले छत्तीसगढ़ में हैं।इस लिहाज से देश में छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा मधुमेह पीडि़त पाए जाते हैं।

प्रदेश में चार प्रतिशत दर से बढ़ रही बीमारी

राज्य में चार फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही डायबिटीज की बीमारी न केवल शहरी क्षेत्र बल्कि कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भी अपनी चपेट में ले रही है। चिकित्सा विशेषज्ञ पहली वजह तनाव और अस्त-व्यस्त दिनचर्या को मान रहे हैं।

 

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