वैक्सीन के लिए ग्लोबल टेंडर की तैयारी, विदेशी टीके सस्ते हुए तो जल्द होगी खरीदी

18 प्लस टीकाकरण : 'पत्रिका' से बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री बोले-टीकाकरण पहली प्राथमिकता

अभी की स्थिति-
18 से 44 आयुवर्ग के 1.30 करोड़ लोग
- 75-75 लाख टीके के ऑर्डर पर 1.30 लाख कोवैक्सीन, 3.50 लाख कोविशील्ड मिली

By: Bhupesh Tripathi

Published: 13 May 2021, 02:50 PM IST

रायपुर . सरकार प्रदेश में टीकाकरण के लिए अब ग्लोबल टेंडर जारी करने की तैयारी में है। इस संबंध में उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र समेत उन सभी राज्यों से भी जानकारी ली जा रही है कि जिन्होंने ग्लोबल टेंडर जारी कर दिए हैं। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) ने इससे जुड़ी तमाम कागजी प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। वहीं पत्रिका से बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि बिल्कुल वैक्सीन विदेश से मंगवाई जा सकती हैं। हम अन्य राज्यों के टेंडर को देख रहे हैं। टेंडर खुलेंगे तो हम समीक्षा करेंगे कि कंपनियों ने क्या दरें दी हैं? अगर, दरें सरकार की पहुंच में होंगी तो खरीद सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैं भी कंपनियों संपर्क कर रहा हूं।

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स्वास्थ्य मंत्री ने यूएस राजदूत को सरकार की तरफ से पत्र लिखा है। जानकारी चाही है कि अमरीका में वैक्सीन की क्या स्थिति है। कंपनियां किस दर पर वैक्सीन उपलब्ध करवा रही हैं। इस कवायद के पीछे सिर्फ एक ही उद्देश्य से वैक्सीन की उपलब्धता, ताकि जल्द से जल्द कोरोना के फैलाव को रोका जा सके। बता दें कि फाइजर कंपनी द्वारा बनाया गया टीका अमरीका और कनाडा में बच्चों को लगना शुरू हो चुका है। प्रदेश सरकार ने 18 से 44 आयुवर्ग के 1.30 लाख नागरिकों के लिए वर्तमान में सरकार ने भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट को 75-75 लाख वैक्सीन सप्लाई के ऑर्डर दिए गए हैं, मगर अभी दोनों कंपनियों ने कुल 5 लाख वैक्सीन ही दी हैं।

मई को सबसे पहले पत्रिका ने बताया था कि सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी किया था। जिसके तहत कार्पोरेट घराने, निजी संस्थाओं और समाजसेवी संगठनों द्वारा विदेशों से वैक्सीन, दवा, मेडिकल उपकरण मंगाने पर टैक्स में पूरी तरह छूट रहेगी। शर्त यह है कि वैक्सीन बाजार में बेची नहीं जा सकती। जनसेवा के मद्देनजर फ्री ऑफ कॉस्ट लगानी होगी।

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आईसीएमआर ने जिन्हें मंजूरी दी उनसे हो सकती है खरीदी
इंडियन इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने जिन भी कंपनियों के टीके को अनुमति दी है, उन कंपनियों से सीधे खरीदी की जा सकती है। इसके लिए केंद्र सरकार से अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

महज 7-8 दिन का स्टॉक
अभी राज्य के पास 3.50 लाख के करीब वैक्सीन उपलब्ध है। रोजाना 40 हजार टीके लगेंगे तो यह स्टाक आने वाले 7-8 दिन में खत्म हो जाएगा। ऐसी स्थिति में कंपनियों द्वारा वैक्सीन दिए जाने का इंतजार ही विकल्प रह जाता है। मगर, राज्य सरकार चाहती है कि हाथ पर हाथ धरे बैठने से अच्छा है कि विकल्प तलाशे जाएं।।

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क्यों जरूरत पड़ी विदेश से टीका खरीदने की योजना बनाने की
भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट ने जिन दरों पर केंद्र सरकार को टीके मुहैया करवाए, उन दरों पर राज्य सरकारों को मुहैया नहीं करवा रही है। दरें 2-4 गुना तक अधिक हैं। यही वजह है कि राज्य सरकार अन्य विकल्पों की तलाश कर रही है। वर्तमान की दरों पर 1.30 लाख नागरिकों के लिए 2-2 डोज खरीदने पर सरकार को तकरीबन 900 करोड़ का बजट चाहिए, जो 150 रुपए एक वैक्सीन दी कर से तकरीबन 600 करोड़ बैठ रहा था।

विदेश से टीका खरीदने का भ्रम न फैलाए सरकार
विदेश से वैक्सीन खरीदे जाने की बात सामने आने के बाद सांसद सुनील सोनी ने कहा है कि सरकार भ्रम न फैलाए, विदेश की राजनीति न करे। भारतीय कंपनियों को एडवांस पैमेंट कर टीके की बुकिंग करवाए।

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Bhupesh Tripathi
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