कोरोना की दहशत में छत्तीसगढ़ का सप्लाई चेन

- आधा रह गया ट्रांसपोर्टरों का कारोबार

By: Mithilesh Mishra

Published: 18 Feb 2020, 11:50 PM IST

रायपुर. चीन में फैले कोरोना वायरस की दहशत से ट्रांसपोर्ट और पोल्ट्री कारोबार सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के मैनेजिंग कमेटी मेंबर सुखदेव सिंह सिद्घू का कहना है कि दिसंबर महीने तक विशाखापट्टनम बंदरगाह पर करीब २०० ट्रकलगते थे। इस समय मुश्किल से ५० ट्रक लग रहे हैं। उनको भी ४ से ५ दिन तक खड़े रहना पड़ता है। चीन और कोरोना के खतरे से जूझ रहे दूसरे देशों से माल नहीं आ रहा है। एेसे में ट्रकों का भाड़ा तक नहीं निकल रहा है। दो महीने पहले विशाखापट्टनम से रायपुर का किराया करीब १७५० रुपया प्रति टन था। अब १५५० रुपया प्रति टन ही मिल रहा है। सिद्धू का दावा है कि जनवरी में करीब ३० लाख रुपए का नुकसान हुआ। इस महीने अभी तक १७ लाख का नुकसान हो चुका है। छत्तीसगढ़ ट्रक ऑनर्स एसोशिएसन के अध्यक्ष सुरिंदर पाल सिंह ने बताया कि दिसंबर में एक हजार ट्रकों से माल का परिवहन होता था। लेकिन जनवरी में यह ८०० और फरवरी के शुरू होते ही ७५० ट्रकों तक पहुंच गया।
सिलतरा -उरला ट्रक एसोशिएसन के अध्यक्ष राजेन्द्र तिवारी ने बताया कि चीन से खिलौने, इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आते हैं। कोरोना वायरस की वजह से विशाखापट्टनम, चेन्नई, और मुबंई के बंदरगाह पर माल ही नहीं उतर रहा है।
छत्तीसगढ़ पोल्ट्री कारोबार का बड़ा गढ़ है। यहां से अंडा और बायलर ओडिशा, मध्य प्रदेश महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश तक जाता है। सेंट्रल इंडिया वेंकोब ब्रायलर ब्रीडर एसोसिएशन के सचिव धनराज बैनर्जी का कहना है कि हर महीने ७५ करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार था। पिछले दो महीने में यह घटकर ४५ से ५० प्रतिशत में रह गया है। पोल्ट्री उत्पादों का दाम भी घटा है।

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Mithilesh Mishra Desk
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