आधुनिक संसाधन की कमी से जूझ रहा छत्तीसगढ़ का दिव्यांग तीरंदाज, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी थमी, मदद के लिए खेल मंत्री से लगाई गुहार

छत्तीसगढ़ की गरीब खेल प्रतिभाएं आज भी सरकार की मदद के लिए दर-दर ठोकरें खा रही हैं, लेकिन उन्हें मदद नहीं मिल रही है। ऐसा ही एक अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग तीरंदाज सतेन्द्र कुमार मिरे का मामला सामने आया है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

By: Dinesh Kumar

Published: 10 May 2020, 12:28 AM IST

गरीबी से जूझ रहे दिव्यांग खिलाड़ी को शासन-प्रशासन से नहीं मिली मदद

2022 में होने वाले एशियन गेम्स की तैयारी के लिए कम्पाउंड किट की जरूरत

रायपुर. छत्तीसगढ़ की गरीब खेल प्रतिभाएं आज भी सरकार की मदद के लिए दर-दर ठोकरें खा रही हैं, लेकिन उन्हें मदद नहीं मिल रही है। ऐसा ही एक अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग तीरंदाज सतेन्द्र कुमार मिरे का मामला सामने आया है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। लेकिन, उसे अपने खेल में निखार लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के संसाधन खरीदने के लिए सरकार से कोई मदद नहीं मिल रही है। सतेन्द्र को वर्ष 2022 में होने वाले पैरा एशियन गेम्स की तैयारी करनी है, लेकिन उसके पास कम्पाउंड इवेंट के संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। उसने कई बार शासन-प्रशासन से आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए मदद की गुहार लगा चुका है, लेकिन अब तक उसको मदद नहीं मिली है। अब प्रदेश के दिव्यांग खिलाड़ी ने खेल मंत्री उमेश पटेल को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई है, जिससे उसे अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा की तैयारी के लिए समय पर आधुनिक संसाधन मिल सके।

2014 में एशियन गेम्स में ले चुका है हिस्सा


दिव्यांग तीरंदाज सतेन्द्र वर्ष 2014 में दक्षिण कोरिया के इंचियोन में आयोजित किए गए पैरा एशियनगेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 25 वर्षीय दिव्यांग खिलाड़ी के पास अभ्यास के लिए स्वयं का तीरंदाजी किट नहीं हैं, जिससे उसे अपनी तैयारी में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

दूसरों के संसाधन मांगना पड़ता है

बेमेतरा जिले के हरदी गांव के रहने वाले सतेन्द्र कुमार मिरे ने मंत्री को एक खत के माध्यम से बताया कि वह अत्यंत गरीब परिवार से संबंध रखता है। वह अपनी प्रतिभा के दम पर दूसरों से संसाधन मांगकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर तो तय कर लिया, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय की तैयारी के लिए उसे आधुनिक संसाधन की जरूरत है, जिससे वह पदक जीतकर प्रदेश नाम रोशन कर सके। उसने बताया कि अब तक वह दूसरों से मांगकर अभ्यास और प्रतियोगिता में हिस्सा लेता रहा है।

कोई नहीं आया मदद को आगे

मिरे का कहना है कि उसे तीरंदाजी के कम्पाउंड इवेंट के संसाधन खरीदने के लिए ढाई लाख रुपए की जरूरत है, लेकिन उसे अब तक आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला है। इससे पहले दिव्यांग खिलाड़ी ने कम्पाउंड संसाधन के लिए भाजपा शासन में मुख्यमंत्री से भी गुहार लगाई थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई और निराशा हाथ लगी।

Dinesh Kumar Reporting
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