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Chit Fund News: चिटफंड कंपनियों के 83 डॉयरेक्टर फरार, 88 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियों को ढूंढना टेढ़ी खीर

Chit Fund News: चिटफंड कंपनी खोलकर लोगों से करोड़ों रुपए ठगने वाले डॉयरेक्टर या उसके अन्य कर्मचारी आसानी से पुलिस के गिरफ्त में नहीं आते हैं। कई आरोपी 10-10 साल से फरार चल रहे हैं।

रायपुर

Published: November 28, 2021 12:15:41 pm

रायपुर. Chit Fund News: चिटफंड कंपनी खोलकर लोगों से करोड़ों रुपए ठगने वाले डॉयरेक्टर या उसके अन्य कर्मचारी आसानी से पुलिस के गिरफ्त में नहीं आते हैं। कई आरोपी 10-10 साल से फरार चल रहे हैं। कुछ की मौत भी हो चुकी है। इसी से पता चलता है कि आरोपियों के प्रति पुलिस का रवैया कैसा है। चिटफंड कंपनी के कई डॉयरेक्टरों ने करोड़ों की संपत्ति भी खड़ी कर ली है।
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चिटफंड कंपनियों के 83 डॉयरेक्टर फरार, 88 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियों को ढूंढना टेढ़ी खीर
रायपुर जिले में चिटफंड कंपनी के डॉयरेक्टरों के खिलाफ कुल 103 केस दर्ज हैं। इनमें से 25 केस में ही कंपनी की 88 करोड़ 90 लाख रुपए की संपत्ति पता चला है। यह संपत्ति चिटफंड कंपनियों की छत्तीसगढ़ के अलावा दूसरे राज्य में खेत, बिल्डिंग, ऑफिस, मकान के रूप में है। वर्तमान में कुछ आरोपी डॉयरेक्टरों की मौत भी हो चुकी है।
149 पर दर्ज है अपराध
रायपुर जिले में अलग-अलग चिटफंड कंपनी के 149 डॉयरेक्टरों के खिलाफ धोखाधड़ी व अन्य धाराओं में अपराध दर्ज है। इनमें से केवल 56 ही गिरफ्तार हुए हैं। 83 डॉयरेक्टर सालों से फरार चल रहे हैं। इनमें कई आरोपियों की मौत हो चुकी है। 10 डॉयरेक्टर दूसरे राज्य के जेलों में बंद हैं।
यह है समस्या
चिटफंड कंपनी के फरार 83 डॉयरेक्टरों के नाम, पते और मोबाइल नंबर 5 से 10 साल पुराने हैं। वर्तमान में आरोपियों ने अपना शहर, पता, मोबाइल नंबर व अन्य चीजें बदल दी हैं। पुलिस के पास पुराने दस्तावेजों के आधार पर ही पुरानी जानकारी है। ऐसे में वर्तमान में उनके बारे में पता लगाने में मशक्कत करनी पड़ रही है।
103 अपराध हैं दर्ज
रायपुर के अलग-अलग थाने में विभिन्न चिटफंड कंपनियों के खिलाफ 103 अपराध दर्ज हैं। इनमें से 56 केस जुलाई 2015 के हैं। बाकी के 47 केस छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम एवं चिटफंड एक्ट बनने के बाद के हैं। चिटफंड कंपनी की संपत्ति को कुर्क करने के बाद केवल उन्हीं पीड़ितों को लाभ मिलेगा, जिन्होंने चिटफंड एक्ट बनने के बाद एफआईआर दर्ज कराई है। अर्थात जुलाई 2015 के बाद एफआईआर कराई हो। इससे पहले एक्ट नहीं बना था। इस कारण वर्ष 2015 से पहले हुई एफआईआर में पीड़ितों को क्षतिपूर्ति मिलना मुश्किल है।
रायपुर एसएसपी प्रशांत अग्रवाल ने कहा, फरार आरोपियों की तलाश के लिए अलग-अलग राज्यों में टीम भेजी गई है। पुलिस चिटफंड कंपनियों की संपत्तियों का लगातार पता लगा रही है।

केस-1
वर्ष 2015 में राजेंद्र नगर थाने में एचबीएन चिटफंड कंपनी के डॉयरेक्टरों के साथ कंपनी के मैनेजर श्यामलाल केवलानी के खिलाफ भी अपराध दर्ज हुआ था। वर्तमान में केवलानी की मौत हो चुकी है। उनकी अब तक गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी।
केस-2
गोल्ड की इंफ्रावेंचर चिटफंड कंपनी (जीके वेंचर) ने लुभावने ऑफर देकर कई लोगों से लाखों रुपए ठगा और ऑफिस बंद करके भाग निकले। इसके डॉयरेक्टर संजयधर बडग़ैया व अन्य के खिलाफ डीडी नगर थाने में अपराध दर्ज हुआ था। करीब दो साल पहले संजयधर की मौत हो गई। लेकिन उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी।

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