PM की सीएम भूपेश से बात चीत- सीएम ने विशेष पैकेज के साथ मांगा कोल ब्लॉक

- वर्मी कंपोस्ट को भी रासायनिक खादों की तरह मिले सब्सिडी
- बोधघाट बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के लिए केन्द्र से मांगा सहयोग

By: Bhupesh Tripathi

Published: 21 Feb 2021, 12:42 AM IST

रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग की बैठक में प्रदेश की जरूरतों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। मुख्यमंत्री ने वर्मी कम्पोस्ट खाद में भी रासायनिक उर्वरकों की भांति सब्सिडी दिए जाने का सुझाव रखा। वहीं वनाच्छादित, आदिवासी बहुल, खनिज धारित छत्तीसगढ़ को औद्योगिक विकास के लिए मिले विशेष पैकेज के साथ मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के लिए कोल ब्लॉक की भी मांग की।

उन्होंने कहा, छत्तीसगढ़ में खनिज कोयले के वृहद भण्डार होने के बावजूद छत्तीसगढ़ कोल ब्लॉक से वंचित है। अत: छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक उपक्रम इकाई के लिए कोल ब्लॉक आवंटित किया जाए। मुख्यमंत्री ने खजिन रॉयल्टी दरों में संशोधन करने पर जोर दिया। वर्ष 2014 के बाद खनिजों की रॉयल्टी में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। मुख्यमंत्री ने बोधघाट बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के लिए केंद्र सरकार से सहयोग देने का भी आग्रह किया है। बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शर्तों को शिथिल किया जाए
मुख्यमंत्री ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए नियमों को शिथिल करने की मांग भी रखी है। उन्होंने कहा, आरपीएलडब्ल्यूई योजना में 50 प्रतिशत पूर्ण कार्य की शर्त को समाप्त करने के साथ वन अधिनियम में छूट देकर इन क्षेत्रों में सिंचाई के लिए सोलर पैनल स्थापित करने की अनुमति मांगी है।

केंद्र से मांगे अपने 13 हजार 440 करोड़
बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से जीएसटी क्षतिपूर्ति, कोयले पर एडिशनल लेवी की राशि, पीडीएस के अंतर्गत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में चावल की शेष राशि समेत राज्य के हक की कुल 13 हजार 440 करोड़ रुपए की राशि जल्द उपलब्ध कराने और राज्य को मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी को पहले की तरह रखने की मांग की है।

यह है अन्य प्रमुख बातें
- बस्तर के नगरनार इस्पात संयंत्र का विनिवेश नहीं किया जाए।

- कार्गों हब और निर्यात के लिए पोर्ट की सुविधा।
- अतिशेष धान से एथेनॉल उत्पादन की अनुमति दी जाए।

- केन्द्रीय पूल में छत्तीसगढ़ से 60 लाख मीट्रिक टन चावल लेने की अनुमति मांगी।
- आकांक्षी जिलों की अवधारणा में सांस्कृतिक उत्थान के बिन्दु को भी यथोचित महत्व एवं स्थान दिया जाए।

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