नई शिक्षा नीति पर सीएम को आपत्ति, विशेषज्ञों में भी निराशा

- भूपेश बघेल बोले, केंद्रीयकरण उचित नहीं।
- आरटीई फोरम ने बताया निराश करने वाला दस्तावेज।

By: Bhupesh Tripathi

Updated: 02 Aug 2020, 04:28 PM IST

रायपुर. केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति के प्रावधानों पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुश ने तीखी आपत्ति की है। मुख्यमंत्री ने कहा, नई शिक्षा नीति में जो सेंट्रलाइज किया जा रहा है, वह उचित नहीं है। कोरोना काल में इसे लागू करने पर भी मुख्यमंत्री सवाल खड़े किए हैं।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा प्राधिकरण के अध्यक्ष मिथलेश सोनकर को पदभार ग्रहण कराने के बाद संवाददाताओं से बात कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा, जिन बच्चों ने 11 वीं पास किया है, उनका क्या होगा। जो बच्चे विदेशों में पढऩे जाते हैं उनका 12 वीं के आधार पर कॉलेज में दाखिला हो जाता है। बदली हुई परिस्थितियों में ऐसा नहीं हो पाएगा। उनके बारे में सरकार ने क्या सोचा है। विशेषज्ञों ने भी नई शिक्षा नीति को निराश करने वाला दस्तावेज बताया है। आरटीई फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंबरीश राय ने कहा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, समान स्कूल प्रणाली (कॉमन स्कूल सिस्टम) पर बिलकुल मौन है।

इसे पहली बार 1964-66 में कोठारी आयोग द्वारा अनुशंसित किया गया था। 1968 एवं 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीतियों एवं 1992 की संशोधित नीति में इसकी पुष्टि की गई थी। मौजूदा स्कूली व्यवस्था के भीतर रचे-बसे भेदभाव को दूर करने का एकमात्र तरीका यही है कि देश में एक कॉमन स्कूल सिस्टम (सीएसएस) की शुरूआत हो, जो देश के सभी बच्चों के लिए समान गुणवत्ता की शिक्षा सुनिश्चित करेगा। 34 साल के लंबे अरसे के बाद आए इस अहम शिक्षा दस्तावेज़ से इस शब्दावली तक का गायब हो जाना वाकई आश्चर्यजनक है। छत्तीसगढ़ आरटीई फोरम के संयोजक गौतम बंद्योपाध्याय ने कहा, नई नीति में ढांचागत सुधार दिख रहा है, लेकिन तथ्य और प्रक्रिया की दृष्टि से यह समस्याग्रस्त है। उन्होंने कहा, यह एक किस्म का सपना है। मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की बात की गई है, लेकिन अंग्रेजी स्कूलों की स्थिति बरकरार है। शिक्षा का बजट जीडीपी का 6 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। ऐसा कब तक होगा इसकी कोई सीमा नहीं। लक्ष्य बड़ा रखते तो शायद 6 प्रतिशत की उम्मीद भी बंधती।

उच्च शिक्षा से बाहर हो जाने का खतरा
विशेषज्ञों ने बड़ी आबादी पर उच्च शिक्षा से बाहर हो जाने की आशंका जताई है। गौतम बंद्योपाध्याय कहते हैं, आठवीं के बाद से व्यावसायिक शिक्षा की बात है। मतलब कि सामान्य परिपक्व होने से पहले ही देर से सीखने वाले और सामाजिक-आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में डालकर कारखानों की ओर मोड़ दिया जाएगा। निजीकरण की प्रक्रिया तेज होगी। यह भेदभाव को बढ़ाएगा।

भाजपा बोली- पहली बार आजाद हुई शिक्षा
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने कांग्रेस प्रवक्ता शैलेश नितिन त्रिवेदी के बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा, आजादी के बाद से कांग्रेसी सरकारों ने लगातार शिक्षा नीति को प्रयोग की धर्मशाला बना रखा था जिसके कारण बेरोजगारों व अशिक्षितों की एक बड़ी फौज खड़ी है। प्रदेश में 34 वर्ष पहले इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पहली बार जो जनरल प्रमोशन दिया गया वह पीढ़ी आज भी कांग्रेस को कोस रही है। आज युवाओं की उम्मीदों को साकार करने वाली शिक्षा नीति मोदी सरकार ने लाई है जिससे युवा पीढ़ी पढ़ाई पूर्ण होते होते ही रोजगार भी प्राप्त कर सकेगा, संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था का सरलीकरण किया गया है तो निश्चित ही असफल कांग्रेसियों के पेट में दर्द होना स्वाभाविक है। आजादी के बाद आज पहली बार शिक्षा आजाद हुई है।

Bhupesh Tripathi
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