CM बोले - अफसरी छोड़ युवा जुड़ रहे खेती से, बैस ने कहा - गांव में कोई रहना ही नहीं चाहता

CM बोले - अफसरी छोड़ युवा जुड़ रहे खेती से, बैस ने कहा - गांव में कोई रहना ही नहीं चाहता

Ashish Gupta | Publish: Aug, 27 2017 09:53:00 PM (IST) Raipur

अपनी बात पूरी कर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के अपनी जगह पर बैठते ही सभागार में बैठे कुछ किसान अपनी जगह से खड़े होकर नारेबाजी करने लगे।

रायपुर. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में रविवार को युवा किसानों और उद्यमियों की एक कार्यशाला में सत्ता की ओर से आए दो विरोधाभासी बयानों ने कृषि क्षेत्र में सरकार के रवैये पर सवाल खड़े कर दिए। समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा, प्रदेश के युवाओं की खेती-किसानी में बढ़ती दिलचस्पी आह्लादित करती है। बहुत से युवा आईएएस और आईपीएस जैसी सरकारी और बड़े-बड़े पैकेज वाली निजी नौकरी छोड़कर खेती से जुड़ रहे हैं।

सांसद बैस ने कहा, गांव में कोई रहना ही नहीं चाहता
उनसे ठीक पहले रायपुर के सांसद रमेश बैस ने कहा, किसान खून-पसीना एक कर फसल तैयार करता है, लेकिन सरकार उसका वाजिब मूल्यांकन नहीं करती। बैस ने कहा कि जब तक हम योजनाएं नहीं बदलेंगे, हालात नहीं सुधरेंगे। बैस यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा, हम देख रहे हैं कि गांव के गांव उजड़ रहे हैं। लोग गांवों में नहीं रहना चाहते, क्योंकि वहां मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। एयर कंडीशन में बैठने वाले आईएएस अधिकारी से समर्थन मूल्य का लॉजिक पूछा जाता है, तो जवाब नहीं मिलता। कृषि विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और आरएसएस के आनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ की ओर से आयोजित युवा किसान-उद्यमी कार्यशाला में संघ के दिनेश कुलकर्णी, कुलपति डॉ. एसके पाटिल और विधायक देवजी पटेल भी शामिल हुए।

सीएम के बैठते ही उठी समर्थन मूल्य की मांग
अपनी बात पूरी कर मुख्यमंत्री के अपनी जगह पर बैठते ही सभागार में बैठे कुछ किसान अपनी जगह से खड़े होकर नारेबाजी करने लगे। ये लोग मुख्यमंत्री ने धान के लिए 2100 रुपए का समर्थन मूल्य और 300 रुपए प्रति क्विंटल बोनस की मांग कर रहे थे। आयोजन स्थल के बाहर छत्तीसगढ़ किसान-मजदूर महासंघ के दर्जनों कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग मोर्चा लिया। पुलिस ने उन्हें भीतर जाने से रोका। उसके बाद ये लोग मुख्यमंत्री का काफिला निकल जाने तक नारेबाजी करते रहे। महासंघ के डॉ. संकेत ठाकुर ने कहा, सूखा प्रभावित किसानों को राहत देने की बजाय मुख्यमंत्री सरकारी खर्चे पर भाषण पिला रहे हैं। महासंघ इसकी निंदा करती है।

खेती में गणित काम नहीं करता
रमेश बैस ने कहा, खेती में कोई भी गणित काम नहीं करता। फसल खड़ी है और बारिश नहीं हुई, तो उसका कोई मतलब नहीं। फसल कट के खलिहान में आ गई और उसमें आग लग गई तो किसान को मुआवजा भी नहीं मिलता। उल्टा आग बुझाने के लिए बुलाई गई फायर ब्रिगे्रड की गाड़ी का खर्च भी उसे ही उठाना पड़ता है।

इधर, तोगडि़या बोले, कर्ज से मर रहा है किसान
इधर, आरएसएस के महानगर खेल महोत्सव में पहुंचे विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगडि़या ने सरकार और राजनीतिक दलों पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश का किसान कर्जदार हो गया है। यही वजह है कि वह आत्महत्या कर रहा है। पिछले १७ सालों में ३ लाख किसान अपनी जान गंवा चुके हैं। उन्होंने कहा, अभी किसान जितनी लागत लगा रहा है, उसे उतना ही मिल रहा है। सरकारों को उसकी लागत का डेढ़ गुना मूल्य देना ही चाहिए। तोगडि़या ने कहा, जीएसटी के लिए एकजुट हुए राजनीतिक दल किसान को कर्जमुक्त करने की योजना क्यों नहीं बनाते।

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