सैकड़ों गायों की मौत मामले में सीएम ने दिए सभी गौशालाओं की जांच के आदेश

सैकड़ों गायों की मौत के मामले में मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने सभी गौशालाओं में तत्काल जांच के आदेश दिए हैं।

By: अभिषेक जैन

Published: 18 Aug 2017, 03:49 PM IST

रायपुर. धमधा विकासखंड मुख्यालय से गंडई रोड पर स्थित राजपुर के सगुन गौशाला में सैकड़ों गायों की मौत के मामले में मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने सभी गौशालाओं में तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही गौशालाओं की देखरेख व संचालन की व्यवस्था भी अब सरकार देखेगी। आपको बता दें कि पिछले तीन दिनों में १५० से अधिक गायों की मौत हो चुकी है। ग्रामीण गायों की मौत की वजह चारा और पानी का अभाव बता रहे हैं। शिकायत करने के बावजूद गोशाला संचालक चारा पानी की व्यवस्था पर ध्यान नहीं दे रहा है। पत्रिका पड़ताल में मामला उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री शुक्रवार को जांच के आदेश दिए हैं।

 

इन गोशालाओं का संचालक एक ही व्यक्ति है। तीनों स्थानों पर संचालित गोशालाओं की व्यवस्था पर शुरू से सवाल उठते रहे हैं। जहां गोशालाओं को गौवंश की सेवा का माध्यम माना जाता था, लेकिन वर्तमान में गोशाला लोगों की कमाई का जरिया बन गए हैं। परिणाम स्वरूप बदइंतजामी की वजह से गोशालाओं में गौवंश अकाल मौत के मुंह में समा रहे हैं। इस संबंध में गोसेवा आयोग अध्यक्ष विशेषर पटेल ने बताया कि संबंधित गो संचालक को बदइंतजामी व मवेशियों की मौत पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। लेकिन जवाब अप्राप्त है। नतीजतन बीते सात माह से गोशालाओं का अनुदान रोक दिया गया है।

दो साल बाद भी ठोस कार्रवाई का इंतजार
वर्ष 2015 में ग्राम रानो में दो दर्जन से अधिक मवेशियों की मौत का मामला सामने आया था। उस समय की कलेक्टर रीता शांडिल्य ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। जहां जांच अधिकारी उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं द्वारा रानो गोशाला मे मवेशियों की मौत के लिए बदइंतजामी के साथ चारा पानी की कमी को कारण बताते हुए, कार्रवाई के लिए जांच प्रतिवेदन तत्कालीन कलक्टर को सौंपा था। कलक्टर कार्यालय के माध्यम से संबंधित गोशाला संचालक पर कार्रवाई को लेकर रिपोर्ट गोसेवा आयोग रायपुर भेजी गई थी, लेकिन कार्रवाई अब तक लंबित है।

7 माह से रूका है अनुदान
गोसेवा आयोग अध्यक्ष विशेसर पटेल के अनुसार ग्राम रानो, गोडमर्रा व राजपुर की गोशालाओं मे व्याप्त बदइंतजामी की लगातार शिकायत मिल रही थी। साथ ही करीब २ माह पूर्व आयोग के अधिकारियों के निरीक्षण में ग्राम गोडमर्रा की गोशाला में एक भी मवेशी नहीं पाया गया, जबकि संचालक द्वारा हर महीने सैकड़ों मवेशी के रखरखाव व भोजन पानी आदि व्यवस्था के लिए आबंटन की मांग की जा रही है। वर्ष २०१६ में भी आयोग के पदाधिकारियों के निरीक्षण मे बड़े पैमाने पर अनियमितता पाई गई थी। वही वर्ष २०१७ में भी स्थिति में सुधार नहीं होने पर तीनों गोशालाओं के अनुदान पर रोक लगा दी गई।

ग्रामीणो के अनुसार तीनों गोशालाओं के बीच की दूरी करीब 10-1 किमी है। यहां से मवेशियों के हेर-फेर का खेल शुरू हो जाता है। बताया गया कि दो माह पूर्व आयोग के अधिकारियों के निरीक्षण में ग्राम गोडमर्रा की गोशाला में एक भी मवेशी मौजूद नहीं था, जहां संचालक को इसकी जानकारी मिलने पर आनन-फानन में दो दिन के भीतर करीब २५० मवेशियों को गोडमर्रा गोशाला में लाया गया, ताकि अनुदान को लेकर और दिक्कतें पेश न आए। ग्रामीण मोहन यदु, गौकरण साहू, ने बताया कि संचालक द्वारा गोशालाओं में ंमवेशियों की संख्या अधिक बताकर शासन को लाखों की चपत लगाई जा रही है।

900मवेशियों की जानकारी मांगी
संचालक प्रत्येक गोशाला में 900 मवेशियों के हिसाब से आयोग से आवंटन की मांग करता है। लेकिन प्रत्येक गोशाला में अधिकतम 250 मवेशी ही पाए गए हैं। बताना होगा कि प्रत्येक मवेशी के लिए प्रतिदिन 25 रुपए की दर से गोशालाओं को आवंटन प्रदाय किया जाता है। इसके अलावा हर साल अन्य व्यवस्थाओं को लेकर लाखों रुपए आवंटन दिया जाता है। गोसेवा आयोग अध्यक्ष विशेसर पटेल ने बताया कि आयोग के पदाधिकारी व अधिकारियों के निरीक्षण में तीनों गोशाला में बड़े पैमाने पर अनियमितता पाई गई है। इस संबंध में संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। लेकिन जवाब नहीं मिलने की स्थिति में गोशालाओं के अनुदान पर रोक लगा दी गई है

अभिषेक जैन
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