बंद एवं निष्क्रिय मंडी समितियों के बेहतर संचालन करने कमिश्नर ने कलेक्टरों को लिखा पत्र

- कमिश्नर ने कहा कि कई बार कोचिये, खुदरा व्यापारी, किराना दुकानदार, मण्डी के लायसेंसी द्वारा गाँवों और हाट बाजारों में किसानों से धान खरीद कर उसे उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से बेचने का प्रयास करते हैं । इससे शासन की बड़ी राशि जो किसानों के हाथों में जानी चाहिए, उसे कोचियॉ, व्यापारी, दुकानदार, मण्डी के लायसेंसी द्वारा हड़पने की आशंका रहती हैं।

By: Bhupesh Tripathi

Updated: 13 Nov 2020, 05:39 PM IST

रायपुर। कमिश्नर जीआर चुरेन्द्र ने कृषि उपज मंडी समितियों के माध्यम से कृषि उपजों के क्रय-विक्रय के बेहतर संचालन करने के लिए जिला कलेक्टरों को पत्र लिखकर निर्देशित किया है। उन्होंने कहा है कि सभी मंडियों विशेष रूप से बंद व निष्क्रिय हो चुकी कृषि उपज मण्डियों को फिर से सक्रिय कर खुली बोली पद्धति से धान का विक्रय अभियान शीघ्र शुरू कराएं।

ऐसी व्यव्स्था कराए जाने पर 30 नवम्बर तक ग्राम एवं शहर के किराना दुकान, क्षेत्र के व्यापारी, मण्डी के छोटे लायसेंसी एवं खुदरा व्यापारी, जो वर्तमान में गॉवों व हाट-बाजारों में किसानों से धान क्रय कर रहें हैं, वे सभी कृषि उपज मण्डी में विक्रय हेतु पहुंचेंगे और खुली बोली के प्रतिस्पर्धा में किसानों, छोटे व्यापारियों, परम्परागत तरीके से गॉव या आस-पास के किराना दुकानदारों, कोचियॉ, मण्डी के लायसेंसी आदि को लाभ मिलेगा।

कमिश्नर ने कहा कि कई बार कोचिये, खुदरा व्यापारी, किराना दुकानदार, मण्डी के लायसेंसी द्वारा गाँवों और हाट बाजारों में किसानों से धान खरीद कर उसे उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से बेचने का प्रयास करते हैं । इससे शासन की बड़ी राशि जो किसानों के हाथों में जानी चाहिए, उसे कोचियॉ, व्यापारी, दुकानदार, मण्डी के लायसेंसी द्वारा हड़पने की आशंका रहती हैं।

कमिश्नर ने कहा है कि जब तक उपार्जन केन्द्रों में धान खरीदी प्रारंभ न हो जाये तब तक जिला प्रशासन को पूरा फोकस मण्डियों में धान के बिक्री पर होना चाहिए। एक दिसम्बर से धान खरीदी प्रारंभ होने से जनवरी 2021 तक भी मण्डियों में धान खरीदी पर निरंतर व्यवस्था व नियंत्रण बनाकर रखा जावे। इसी तरह धान उपार्जन केन्द्रों में खरीदी 1 फरवरी से बंद होने के बाद भी कृषि उपज मण्डियों को धान्य उपज के साथ दलहन, तिलहन आदि की खरीदी की व्यवस्था निरंतर संचालित रखी जाए।

कमिश्नर ने कहा कि इस व्यवस्था से कृषि उपज मंडी की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और किसानों व क्षेत्र के हित में कार्य किया जा सकेगा। जिले अन्तर्गत बड़े व उन्नतशील किसान जो प्रति एकड़ 15 एकड़ से अधिक पैदावारी धान का लेते है, वे भी सीमा से अधिक उपज की धान को कृषि उपज मंडियों में लाकर बेचे सकेगें। कमिश्नर ने इसके लिए कलेक्टरों को कार्ययोजना बना कर कृषि उपज मण्डियों का सक्रिय संचालन करने को कहा है।

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