कमिश्नर का आदेश हवा में, नहीं हिली बाबुओं की कुर्सी

- तहसील कार्यालय में ऐसे 11 बाबू हैं जो बीते 7 से 8 वर्षों से एक ही कार्य का प्रभार संभाल रहे हैं। इसी तहर कलेक्टोरेट के अलग-अलग कार्यालय में ३३ एेसे बाबू हैं जो वर्षों से एक ही जगह पर जमे हुए हैं।

By: Bhupesh Tripathi

Published: 18 Oct 2020, 05:39 PM IST

रायपुर। कोरोना काल में जिला प्रशासन के दफ्तरों में वर्षों से एक ही कुर्सी पर टिके बाबू आए न आए, लेकिन उनका प्रभार किसी को दिया नहीं जा सकता। कलेक्टोरेट और तहसील में वर्षों से टिके बाबूओं की कुर्सी हिलने का नाम नहीं ले रही हैं।

कमिश्नर ने मार्च माह में सभी बाबुओं के विभाग बदलने के निर्देश दिए थे। सिर्फ रायपुर ही नहीं, संभाग के सभी 5 कलेक्टरों को निर्देशित किया था कि बाबुओं की टेबल बदली जाए। तहसील कार्यालय में ऐसे 11 बाबू हैं जो बीते 7 से 8 वर्षों से एक ही कार्य का प्रभार संभाल रहे हैं। इसी तहर कलेक्टोरेट के अलग-अलग कार्यालय में ३३ एेसे बाबू हैं जो वर्षों से एक ही जगह पर जमे हुए हैं। विभाग के सूत्रों की मानें तो तबादले के पीछे विभाग में बड़ा खेल चल रहा है। कमाऊ टेबल की बोली लगाई जाती है। पांच साल पहले तत्कालीन मुख्य सचिव ने बाबुओं के कार्यभार बदलने की बात कही थी और इसके लिए गाइडलाइन जारी की थी। बावजूद इसके वर्तमान में भी कार्य नहीं बदले गए। नियम के मुताबिक नियुक्तियों और तबादले में एक अधिकारी को एक ही जगह पर तीन व पांच वर्ष से ज्यादा कहीं नहीं रखा जा सकता।

हो चुका है फर्जीवाड़ा
खनिज विभाग में रॉयल्टी क्लीयरेंस देखने वाले बाबू को 15 साल से ज्यादा का समय गुजर गया, लेकिन ट्रांसफर नहीं हुआ था। जब फर्जी रॉयल्टी पर्ची से क्लीयरेंस का मामला खुला तब पुलिस ने बाबू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मामले की जांच में पुलिस को यह भी पता चला कि जिम्मेदार बाबू ने रॉयल्टी क्लीयरेंस से जुड़ा पूरा रिकार्ड गायब कर दिया था।

सूची तक तैयार नहीं की
कमिश्नर ने सभी विभाग प्रमुखों से कहा था अपने-अपने विभागों में ऐसे लिपिकों की सूची तैयार कर लें, जिन्हें एक ही जगह पर ढाई से तीन साल हो गए हैं। सूची तैयार होने के साथ ही आला अफसरों द्वारा इन लिपिकों का प्रभार बदला जाए। अहम बात यह है कि कमिश्नर के आदेश के सात माह बाद भी विभाग प्रमुखों ने सूची तक नहीं दी है।

इसलिए जारी किया आदेश
कमिश्नर ने अपने पत्र में कहा था कि शासन की मंशा रही है कि जिला और स्थानीय प्रशासन में ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे लिपिकों को सभी शाखाओं के कामों की जानकारी हो। इससे भविष्य में भी उनसे किसी भी विभाग में बेहतर काम लिया जा सकेगा। अभी अधिकतर लिपिक एक ही शाखा और टेबल में लंबे समय से रहने के कारण कार्यालयों की अन्य शाखाओं के कामों का ज्ञान नहीं ले पाते।

सभी जिला कलेक्टरों को लिपिकों के विभाग बदलने के संबंध में निर्देशित किया गया था। अब तक किसी जिले से सूचना नहीं आई है। अब फिर रिमाइंडर भेजा जाएगा।
जीआर चुरेंद्र, आयुक्त, रायपुर संभाग

Bhupesh Tripathi
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