कौशल विकास के नाम पर कमीशनखोरी, ब्लैकलिस्टेड संस्थाओं को करोड़ों भुगतान

प्रतिनियुक्ति में बैठे अधिकारियों का खेल

By: Devendra sahu

Updated: 01 Mar 2020, 01:24 AM IST

रायपुर. कौशल विकास प्रशिक्षण के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाली 31 एजेंसियों पर शासन ने पाबंदी लगाकर करोड़ों का भुगतान रोक दिया है। इन संस्थाओं को मिलने वाले अनुदान की राशि और व्यय राशि की भी जांच की जा रही है। इसके बाद भी छत्तीसगढ़ स्टेट स्किल डेवलपमेंट मिशन के पुराना पीएचक्यू स्थित सीईओ कार्यालय के लैंडलाइन फोन से बीपीटी सेंटरों में फोन करके रुका हुआ भुगतान रिलीज कराने का लालच दिया जा रहा है।
कमीशन लेकर कुछ एनजीओ को फंड भी रिलीज कर दिया गया है। जांच में यह बात भी सामने आई कि कई सेक्टर में भी युवाओं को सिर्फ कागज पर प्रशिक्षण दिया गया। यह पूरा खेल मुख्यालय में संविदा और प्रतिनियुक्ति में बैठे अधिकारी कर्मचारियों द्वारा खेला जा रहा है। पत्रिका के पास एक एेसा ऑडियो है जिसमें एनजीओ संचालक को सीईओ कार्यालय से फोन कर कमीशन देकर रुका भुगतान ले जाने के लिए कहा जा रहा है। कई संस्थाओं से २५ प्रतिशत कमीशन लेकर भुगतान भी किया गया है।
कई वर्षों पहले समाप्त हो चुकी है प्रतिनियुक्ति और संविदा: विभाग में चार एेसे अधिकारी हैं जिनकी प्रतिनियुक्ति दो से तीन वर्ष पहले ही समाप्त हो चुकी है। उनकी शिकायत मंत्री से लेकर विभाग के सीईओ तक हुई है। इस पूरी गड़बड़ी का खेल इन्हीं अधिकारियों द्वारा खेला जा रहा है।


कई विभागों की सदिग्ध भूमिका
जिन सेंटरों की जांच चल रही है, उन्हें राशि का भुगतान कर दिया गया है। इसमें कई नगरीय निकाय, श्रम विभाग व अनुसूचित जाति-जनजाति विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई थी। जिन-जिन एजेंसियों में गड़बडिय़ां मिली थी, उन सभी के काम और भुगतान पर रोक लगा दी गई है।

एेसे की गई थी गड़बडि़यां
रायपुर, भिलाई, दुर्ग, राजनांदगांव समेत कुछ और जिलों में काम करने वाली एजेंसियों के कामकाज की जांच हुई थी। उनके कार्यालय, स्टॉफ देखे गए। कई एजेंसियों में बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए ट्रेनर तक नहीं रखे गए। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक एजेंसियों ने न प्रशिक्षण दिया, न परीक्षा ली और न ही प्रमाणपत्र दे दिए।

यह है योजना
बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार का प्रशिक्षण देने के लिए पूर्ववर्ती सरकार ने कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया था। इसमें एजेंसी नियुक्त करके हर जिले में बेरोजगार युवाओं को निशुल्क प्रशिक्षण दिलाया जाता है। प्रशिक्षण देने वाली एजेंसियों को सरकार भुगतान करती है।

कौशल विकास के नाम पर गड़बड़ी के मामले में 31 एजेंसियों का काम बंद करा दिया गया है। जिन संस्थाओं की जांच चल रही है, उनका भुगतान रोकने को कहा गया था, कैसे भुगतान कर दिया गया इसकी जांनकारी मांगी जाएगी।
उमेश पटेल, मंत्री, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास

Devendra sahu Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned