मुआवजा एकाएक बंद करना मनमानी,90 दिन में पेंशन जारी करें

मीसा बंदी सम्मान निधि पर हाईकोर्ट का फैसला

By: ramendra singh

Published: 29 May 2020, 12:15 AM IST

बिलासपुर . राज्य सरकार की ओर से मीसा बंदी सम्मान निधि पर लगाई गई रोक मामले में हाईकोर्ट ने फैसला सुना दिया है, जिसमें ये कहा गया कि सब कुछ जांच परखकर 10 साल से दिए जा रहे आर्थिक मुआवजे को एकाएक मनमाने ढंग से बंद करना गैर कानूनी है। कोर्ट ने आदेश में कहा कि राज्य सरकार इस मामले से जुड़े लोगों को 90 दिन में उनकी पेंशन राशि जारी करे। बता दें कि इस मामले को लेकर लगभग 103 लोगों ने 42 रिट पिटीशन छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में दायर की थी। इन सभी याचिकाओं पर 6 वकीलों ने पैरवी की। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि सभी मामले में संयुक्त व एक समान फैसला आया है जिसमें कोर्ट ने माना कि ये मनमाना कार्य है। बताया गया कि 28 जनवरी 2019-भौतिक सत्यापन-समीक्षा के नाम पर सम्मान निधि पर रोक लगा दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि समीक्षा के नाम पर रोक लगाने के बाद भी इसकी कभी समीक्षा हुई ही नहीं। इसके बाद फिर 23जनवरी 2020 को एकाएक मनमाना आर्डर जारी कर दशकों पुराने रूल को ही बिना आधार रद्द कर दिया गया।

पात्रता में नहीं कोई त्रुटि

इस मामले की सुनवाई के दौरान हितग्राहियों की पात्रता त्रुटि पूर्ण साबित ही नहीं हुई। इसके अलावा ये बात भी खास है कि क्योंकि सम्मान निधि समाप्त करने का शासकीय आदेश 23 जनवरी 2020 को ही हाई कोर्ट द्वारा रद्द घोषित कर दिया गया था। इसलिए जिन्होंने अदालत में रिट भी दायर नहीं की,उनकी भी पेंशन पाने की पात्रता होगी।

ramendra singh Desk
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