पढ़ाई का कौशल विकसित करने संकुल से राज्य स्तर तक होंगी प्रतियोगिताएं, 17 लाख बच्चे को मिलेगा लाभ

छत्तीसगढ़ : सरकार ने बनाई पहली से पांचवीं तक बच्चों में पठन कौशल विकसित करने की योजना

By: ramendra singh

Published: 18 Feb 2020, 09:16 PM IST

रायपुर . प्रदेश का स्कूल शिक्षा विभाग ने छोटे बच्चों में पढऩे का कौशल विकसित करने की योजना बना रहा है। इस योजना के अंतर्गत इस वर्ष अप्रैल का पूरा माह कक्षा पहली से पांच तक बच्चों में पठन कौशल विकसित करने के लिए समर्पित होगा, जिससे सभी बच्चे समझकर पढऩा सीख सके। पठन कौशल विकसित करने के लिए संकुल स्तर से लेकर राज्य स्तर तक प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। पूरे प्रदेश की प्राथमिक शालाओं के 17 लाख बच्चे इससे लाभान्वित होंगे। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने सभी जिला कलेक्टरों को पत्र भेजकर योजना के संबंध में अवगत कराते हुए इस कार्यक्रम के संचालन के लिए जिले की रूपरेखा बनाकर एक सप्ताह के भीतर भेजने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टरों को जारी पत्र में कहा गया है कि सभी स्कूलों में प्राथमिक स्तर पर मूल्यांकन कार्य मार्च माह में पूरा कर लिया जाएगा, जिससे अप्रैल का पूरा माह पठन कौशल के विकास में लगाया जा सके।

पठन सामग्री चयनित
सभी जिलों में मार्च माह में स्कूल स्तर पर कार्यशालाएं आयोजित कर पठन कौशल के विकास के लिए पाठ्य पुस्तकों के अतिरिक्त अन्य पठन सामग्री का चयन भी कर लिया जाएगा। यह सामग्री सभी प्राथमिक स्कूलों में उपलब्ध कराई जाएगी। यह सामग्री पुस्तकालयों में उपलब्ध हो सकती है। इसी प्रकार अनेक अखबारों में सप्ताह में एक बार बच्चों की पत्रिका छपती है, जिसकी कटिंग नि:शुल्क मिल सकती है। इसी प्रकार कहीं-कहीं बाल पत्रिकाएं उपलब्ध हो सकती है।

खेल-खेल में सीखें पढऩा
कलेक्टरों से कहा गया है कि पठन का कार्य आनंददायी हो इसके लिए खेल और गतिविधियां बनाई जाए। जैसे- पासिंग द पार्सल, म्युजिकल चेयर्स, रोलप्ले, गाकर पढऩा, बातचीत अभिनय बाजार के अथवा अन्य प्रकार के दृश्य का चित्रण आदि। इसी प्रकार पढऩे के लिए कबाड़ से जुगाड़ करके टीचर लर्निंग मटेरियल (टीएलएम) भी बनाए जाएंगे। हर संकुल में इस प्रकार कम से कम 100 खेलों और टीएलएम की सूची तैयार रखनी चाहिए, जिससे बच्चे खेल-खेल में पढऩा सीख सकें।

अप्रैल माह में करेंगे बच्चों में पढ़ाई का कौशल विकसित
पूरे अप्रैल माह में स्कूलों में पूरा दिन बच्चों को पढऩे का कौशल सिखाया जाएगा। इसी ठीक प्रकार से मॉनिटरिंग हो इसके लिए कलेक्टर दल बनाएं और हर स्कूल का निरीक्षण दिन में कम से कम एक बार किसी न किसी अधिकारी द्वारा किया जाए। कलेक्टर अपने जिले में इस मॉनिटरिंग व्यवस्था के लिए पूरी योजना बनाकर प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा से साझा करें. इसमें शिक्षा विभाग के अतिरिक्त अन्य विभागों के अधिकारियों का उपयोग भी किया जा सकता है।

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