बारिश से सड़कें डूबीं, लेकिन लाखों खर्च के बाद भी शहर में तालाबों के हालत नहीं सुधरे

बारिश से सड़कें डूबीं, लेकिन लाखों खर्च के बाद भी शहर में तालाबों के हालत नहीं सुधरे

Deepak Sahu | Publish: Sep, 03 2018 10:44:41 AM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

लाबों में सौदर्यीकरण और गहरीकरण के नाम पर जिला और निगम प्रशासन ने लाखों रूपए खर्च किए, लेकिन उपयोग किए गए इस राशि का अंजाम नहीं दिखा।

रायपुर. शहर में तालाबों के हालात यह है कि बारिश से सडक़ें लबालब हैं, लेकिन तालाब नहीं छलक रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि तालाबों में सौदर्यीकरण और गहरीकरण के नाम पर जिला और निगम प्रशासन ने लाखों रूपए खर्च किए, लेकिन उपयोग किए गए इस राशि का अंजाम नहीं दिखा।

सिद्धार्थ चौक के समीप स्थित प्राचीन महत्व के नरैया तालाब की स्थिति पर गौर करें तो यह तालाब लंबे समय से भ्रष्टाचार का शिकार हो रहा है। जिला खनिज संस्थान न्यास निधि से बीते वर्ष पं. मोतीलाल महर्षि वाल्मिकी वार्ड के अंतर्गत नगर निगम ने 10 लाख रुपए का आवंटन किया गया था। यह राशि निगम को मिली और जोन के माध्यम से कार्य भी कराया गया। रिपोर्ट के मुताबिक नगर-निगम ने अपने रेकॉर्ड में कार्य पूर्ण बताया है। अब मौजूदा हालात पर गौर करें तो तालाब तक पहुंचने के लिए भी लोगों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। जोन अधिकारियों के साथ तालाब के निर्माण में अन्य एजेंसियों ने भी लापरवाही बरती। बारिश का पानी तालाब में एकत्र नहीं हो रहा है।

 

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फैल गई गंदगी
लाखों रुपए खर्च करने के बाद तालाबों में गंदगी का आलम है। नियमों के मुताबिक सभी तालाबों में बड़े डस्टबिन होने चाहिए, लेकिन वर्तमान में एक भी डस्टबिन नहीं है, लिहाजा धार्मिक रीति-रिवाजों के दौरान तालाबों में ही पूजन सामग्रियों का विसर्जन किया जा रहा है। इससे भी तालाब प्रदूषित हो रहा है।

भूमिगत जलस्तर इसलिए नीचे गिरा
तालाबों में वाटर रिचार्ज नहीं होने की वजह से गर्मी के दिनों में भू-जल स्तर नीचे गिरने की यह प्रमुख वजह है। शहर के ऐसे कई इलाके हैं, जहां भू-जल स्तर की स्थिति बदतर होती जा रही है। कई ऐसे इलाके हैं, जहां भू-जल स्तर 60 से 100 फीट नीचे गिर चुका है।

मानसून आने के बाद गहरीकरण
स्थानीय लोगों ने नरैया तालाब में निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार की शिकायत की थी, जिसमें बताया था कि निगम ने तालाब को 20 दिन पहले ही खाली कर दिया था, लेकिन खुदाई शुरू नहीं की गई। ऐसे में पहली बारिश होने पर मिट्टी गीली हो गई और फिर खुदाई नहीं हो सकी।

नगर-निगम के आयुक्त, रजत बंसल ने बताया तालाबों के सौंदर्यीकरण, मरम्मत और संरक्षण के लिए कई प्रयास किए गए हैं। नरैया तालाब में काम कराया गया है। तालाबों के रख-रखाव को लेकर वर्क रिपोर्ट का अध्ययन किया जाएगा, वहीं टीम को निर्देशित भी किया जाएगा।

10 करोड़ खर्च फिर भी गहरीकरण नहीं
सरोवर-धरोहर योजना के अंर्तगत राज्य सरकार की ओर से तालाबों के गहरीकरण के लिए 10 करोड़ रुपए की राशि दी जा चुकी है, लेकिन शहर में तालाबों के हालत नहीं सुधरे हैं। निगम ने बीते वर्ष 32 तालाबों में अमला उतारा था। हर साल तालाबों पर करोड़ों राशि खर्च होती है, लेकिन बारिश में हालात साफ नजर आता हैं।

इस साल 10 लाख रुपए फिर स्वीकृत
नरैया तालाब के सौंदर्यीकरण और रख-रखाव के लिए निगम ने इस वर्ष फिर 10 लाख रूपए की राशि स्वीकृत की है। जोन-4 के लोककर्म विभाग को सौंदर्यीकरण का जिम्मा सौंपा गया था, लेकिन चार महीने बाद स्थिति वहीं की वहीं है।

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