कंज्यूमर कोर्ट ने Goibibo पर लगाया जुर्माना, ऑनलाइन होटल बुकिंग कंपनी के खिलाफ हुई थी ये शिकायत

अब ऑनलाइन बुकिंग कंपनी गो-आईबीबो को देना होगा हर्जाना, होटल में ऑनलाइन की बुकिंग लेकिन बाद में नहीं दिया था रुम।

रायपुर । आजकल यात्रा के दौरान असुविधा से बचने के लिए पहले ही सब ऑनलाइन बुकिंग कर लेते हैं ऐसे ही एक यात्री ने ऑनलाइन बुकिंग कंपनी गो-आईबीबो (Goibibo) से मुंबई के होटल में कमरा बुक करवाया और तय समय पर जब वह होटल में पहुंचा तो उसे कमरा नहीं दिया गया। इसे उपभोक्ता के प्रति सेवा में निम्नतापूर्ण आचरण मानते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने ऑनलाइन बुकिंग कंपनी गो-आईबीबो पर 17 हजार 5 सौ रुपये हर्जाना लगाया।

यह था मामला
सुपेला भिलाई निवासी विकास सिंघल ने 10 मई 2018 को ऑनलाइन बुकिंग वेबसाइट गो-आईबीबो (Goibibo) से मुंबई के होटल ट्रांजिट में 6 जून 2018 से 7 जून 2018 तक एक दिन रुकने के लिए 3077 रुपये में कमरा बुक करवाया, जिसके बाद बुकिंग कंफर्म होने की सूचना मेल एवं वाट्सएप्प पर दी गई. निर्धारित कार्यक्रम के तहत दिनांक 6 जून 2018 को मुंबई पहुंचकर होटल ट्रांजिट जाने पर परिवादी को कमरा नहीं दिया गया और यह कह दिया गया कि कोई बुकिंग कंफर्म नहीं की गई है, ऑनलाइन बुकिंग कंपनी के कस्टमर केयर में फोन करने से भी कोई सहायता नहीं मिली. यहां तक कि परिवादी के रुकने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई। 3-4 घंटे का समय व्यर्थ जाने के बाद परिवादी को दूसरे होटल में 4500 रुपये देकर रुकना पड़ा। अनावेदक कंपनी ने बचाव में यह तर्क दिया कि संबंधित होटल अथॉरिटी ही बुकिंग रद्द करने के लिए जिम्मेदार और जवाबदार है।

फोरम का फैसला
जिला उपभोक्ता फोरम के सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्य एवं दस्तावेजों की विवेचना से यह निष्कर्ष निकाला कि ऑनलाइन बुकिंग हेतु अनावेदक कंपनी प्लेटफार्म उपलब्ध कराती है। इसलिए ग्राहक के प्रति सबसे पहली जिम्मेदारी उसी की बनती है क्योंकि ग्राहक को इससे कोई सरोकार नहीं है कि बुकिंग किए गए होटल का मालिक या सेवाप्रदाता कौन है? अनावेदक के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जाकर ही ग्राहक बुकिंग करता है और उसे ही राशि का भुगतान करता है।

इसलिए अनावेदक को किसी भी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं माना जा सकता है। फोरम ने यह भी कहा कि अनावेदक ने होटल के लिए बुकिंग राशि एडवांस में काफी पहले प्राप्त कर ली इसके बाद भी संबंधित होटल में परिवादी को कमरा उपलब्ध नहीं करवा सका, यह स्थिति सेवा में निम्नता और व्यवसायिक कदाचरण की परिचायक है। अनावेदक ने अपनी जिम्मेदारी मात्र बुकिंग करने तक ही सीमित रखी और जब सही सेवाएं प्राप्त नहीं हुई तो सारा दोष व्यवसायिक टाईअप वाले होटल संचालक पर डालकर अपनी जिम्मेदारी से विमुख होने का प्रयास किया। अनावेदक का यह व्यवहार पूरी तरह से लापरवाही भरा है।

जिला उपभोक्ता फोरम के सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने ऑनलाइन बुकिंग कंपनी गो-आईबीबो (Goibibo) के नई दिल्ली और गुड़गांव स्थित कार्यालय पर 17 हजार 5 सौ रुपये हर्जाना लगाया, जिसके तहत दूसरा होटल बुक करने हेतु अदा की गई राशि 4500 रुपये, मानसिक एवं आर्थिक कष्ट के एवज में क्षतिपूर्ति राशि 12000 रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 1000 रुपये देने का आदेश दिया गया।

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Bhupesh Tripathi
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