3 किमी से 250 मीटर का हुआ कंटेनमेंट जोन, गाइड-लाइन नहीं बदलता तो पूरा शहर करना पड़ता सील

केंद्र सरकार की शुरुआती गाइड-लाइन के मुताबिक संक्रमित व्यक्ति के घर से तीन किमी की परिधि में कंटेनमेंट जोन बनता चला आ रहा है। मगर, जून में देखते ही देखते संख्या इतनी बढ़ गई है कि सरकार को गाइड-लाइन में संशोधन करना पड़ गया।

By: Karunakant Chaubey

Published: 22 Jun 2020, 10:54 PM IST

रायपुर. राजधानी रायपुर समेत प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या 2300 का आंकड़ा पार कर चुकी है। यह आंकड़ा लॉकडाउन 3 के बाद से बढऩा शुरू हुआ और अन-लॉकडाउन 1 के बाद तो रफ्तार और बढ़ गई। अब जितने मरीज उतने कंटेनमेंट जोन बनाने ही पड़ेंगे। केंद्र सरकार की शुरुआती गाइड-लाइन के मुताबिक संक्रमित व्यक्ति के घर से तीन किमी की परिधि में कंटेनमेंट जोन बनता चला आ रहा है। मगर, जून में देखते ही देखते संख्या इतनी बढ़ गई है कि सरकार को गाइड-लाइन में संशोधन करना पड़ गया। अब तीन किमी नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्र में 250 और ग्रामीण क्षेत्र में 500 मीटर का कंटेनमेंट जोन बनाया जा रहा है।

गाइड-लाइन में जिला कलेक्टर को विशेष अनुमति दी गई है कि वे परिस्थितियों के हिसाब से क्षेत्र को घटा-बढ़ा सकते हैं। सोचिए, अगर 3 किमी की गाइड-लाइन अब भी लागू होता तो रायपुर में 108 सक्रिय मरीज हैं, जिनमें 80 से अधिक शहरी क्षेत्र के हैं। तो पूरा शहर ही कंटेनमेंट जोन बन जाता। सभी सड़कें, प्रमुख बाजार और दुकानें बंद करनी पड़ती। सबको असुविधा होती। सूत्रों के मुताबिक यह बदलाव खास से लेकर आम जनता को 3 किमी के कंटेनमेंट जोन से हो रही परेशानी के म²ेनजर किया गया है। मगर, लोग यह नहीं समझ रहे कि सरकारी उनकी सुविधा का ख्याल रख रही है तो कम से कम वे कोरोना से बचाव के नियम-निर्देश का तो पालन करें। हमारी-आपकी लापरवाही पूरे प्रदेश पर भारी पड़ रही है।

क्या होता है कंटेनमेंट जोन-

जब किसी क्षेत्र में कोई कोरोना पॉजिटिव मरीज मिलता है तो उसके घर के आस-पास के तीन किमी या फिर अब 250मीटर के क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन माना जाता है। यानी संक्रमित क्षेत्र। उस क्षेत्र में आने-जाने वाले एक रास्ते को छोड़कर सभी को बंद कर दिया जाता है। पुलिस की तैनाती होती। सिर्फ दूध वालों की जाने की इजाजत होती है और मरीज को अस्पताल लाया, ले-जाया जा सकता है। इस दौरान स्वास्थ्य अमला संक्रमित मरीज के घर के आस-पास के 250 घरों का सर्वे करता है।क्लोज कांटेक्ट वालों की सैंपलिंग होती है। यह प्रक्रिया अभी भी है।

सैंपल देकर बेपरवाह, कम्यूनिटी स्प्रेड का खतरा-

खुद को संदिग्ध मानकर या फिर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिन्हें संदिग्ध मानकर सैंपल लिए जा रहे हैं वे सैंपल देने के बाद घूम रहे हैं। जबकि सैंपल की रिपोर्ट आने तक पूरी तरह से घर पर ही आईसोलेट होकर रहना है, भले ही लक्षण दिखे या न दिखे। सोमवार को आई रिपोर्ट में तीन बड़े मामले सामने आए। विधायक द्वारा २० जून को सैंपल दिया गया, मगर वे २२ जून को बैठक में शामिल होने रायपुर स्थित विधानसभा पहुंचे।

विधायकों, अफसरों के साथ बैठक की। गोलबाजार का दुकानदार न जाने कितने ग्राहकों और साथी दुकानदारों के संपर्क में आया और अभनपुर के तीन नाई ने न जाने कितनों को दाड़ी-बाल बनाते हुए वायरस स्प्रेड किया। जिले से लेकर राज्य की कांटेक्ट्र टे्रसिंग टीम बेहद परेशान दिखी। क्योंकि यह सबकुछ बड़े खतरे की तरफ इशारा कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि हर आम व्यक्ति को पकड़कर समझाया नहीं जा सकता, कम से कम अफसर-नेता नियमों का पालन करके उदाहरण पेश करें। अफसर कह रहे हैं कि अब लॉक-डाउन जरूरी है।

बिल्कुल, कंटेनमेंट जोन की शुरुआत तीन किमी से ही हुई थी। मगर, कंटेनमेंट जोन की गाइड-लाइन नहीं बदली जाती तो हर किसी को बहुत मुश्किल होती। परिस्थितियों को देखते हुए निर्णय लिए जा रहे हैं।

-डॉ. अखिलेश त्रिपाठी, उप संचालक एवं प्रवक्ता, स्वास्थ्य विभाग

 

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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