डॉक्टर्स डे: स्वस्थ होकर घर लौटे हर कोरोना मरीज ने कहा- थैंक्यू डॉक्टर, हम आज अपनों के बीच हैं तो आपकी बदौलत

बसे बड़ी आपदा में उसे सबसे पहले अगर कोई नजर आता है तो वह है डॉक्टर, क्योंकि उसे पूरा भरोसा होता है कि डॉक्टर उसे इस जानलेवा बीमारी से बाहर निकाल ही देंगे। हमारे प्रदेश के डॉक्टर मरीजों के इसी भरोसे पर खरे उतर रहे हैं।

By: Karunakant Chaubey

Published: 01 Jul 2020, 12:02 AM IST

डॉक्टर्स डे : स्वस्थ होकर घर लौटे हर मरीज ने यही कहा- थैंक्यू डॉक्टर, हम आज अपनों के बीच हैं तो आपकी बदौलत

रायपुर. आप घर पर हैं, होम क्वारंटाइन या क्वारंटाइन सेंटर में, या अपनी ड्यूटी पर। तभी अचानक आपके फोन की घंटी बजती है। नाम पूछा जाता है और कहा जाता है, आप घबराएं नहीं। आपकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव है। स्वास्थ्य टीम एंबुलेंस लेकर जल्द से जल्द आपके घर पहुंचेगी। सोचिए, इस सूचना के बाद व्यक्ति कितना भी हिम्मतवाला हो, मगर एक पल के लिए वह शून्य हो जाता है। सबसे बड़ी आपदा में उसे सबसे पहले अगर कोई नजर आता है तो वह है डॉक्टर, क्योंकि उसे पूरा भरोसा होता है कि डॉक्टर उसे इस जानलेवा बीमारी से बाहर निकाल ही देंगे। हमारे प्रदेश के डॉक्टर मरीजों के इसी भरोसे पर खरे उतर रहे हैं।

प्रदेश में अब तक 2 हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं। हमारे प्रदेश का रिकवरी रेट (मरीजों के ठीक होने की दर) 7७ प्रतिशत है। यह सब डॉक्टरों द्वारा दिए जा रहे इलाज की वजह से ही संभव हो पाया है। 'पत्रिकाÓ ने इस दौरान स्वस्थ हो चुके कुछ मरीजों से बात की। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा- थैंक्यू डॉक्टर, आज हम अपनों के बीच हैं तो सिर्फ आपकी बदौलत।

साधन-संसाधनों की कमी में भी जुटे हुए हैं जी-जान से-

प्रदेश में हर एक डॉक्टर को कोरोना से बचाव के लिए एन95, पीपीई किट, फेस शील्ड या अन्य बचाव की सामग्री नहीं मिली है। तब जब सामान्य ओपीडी में भी कोरोना के मरीज मिल रहे हैं, डॉक्टर अस्पताल में ही सिले हुए हरे रंग के कपड़े से बने मास्क लगाकर सेवाएं दे रहे हैं। ये वायरस की चपेट में भी आ रहे हैं, मगर ये डटे हुए हैं।

24-25 दिन में एक बार मिल रहे परिवार से-

कई ऐसे भी डॉक्टर हैं जो माता-पिता, पत्नी, बच्चों से 24-25 दिन बाद मिलते हैं, क्योंकि 10 दिन की ड्यूटी और फिर 14 दिन का क्वारंटाइन । एक दिन के लिए मिलने जाते हैं और फिर 24-25 दिन की ड्यूटी। ये कहते हैं कि आज प्रदेश को हमारी जरूरत है, यह मौका है कुछ कर दिखाने का।

मरीजों की नजर में डॉक्टर-

-अगर, हम में से किसी को कोरोना हो जाए तो हर कोई दूरी बना लेता है। मोहल्ले वाले, नाते-रिश्तेदार भी। मगर, जब मैं अस्पताल में भर्ती हुआ तो पाया कि डॉक्टर हर मरीज से मिलते हैं। परेशानी पूछते हैं। कहते हैं, इलाज के अतिरिक्त कोई भी परेशानी हो तो बताएं। हम आपकी मदद की कोशिश करेंगे।
- बिरगांव निवासी मरीज (उम्र 24)

-इस बीमारी में इलाज तो जरूरी है ही, ढांढस बंधाना भी जरूरी है। क्योंकि मानसिक रूप से व्यक्ति कमजोर पड़ जाता है। मैं जब माना अस्पताल में भर्ती हुआ तो एक डॉक्टर ने मुझसे कहा- चिंता मत करो। तुम ये मानो कि कुछ नहीं हुआ है। 14 दिन में स्वस्थ हो जाओगे। हम सब हैं न।

- अभनपुर निवासी मरीज (उम्र 33)

-मरीज तो अस्पताल जाता है और बिस्तर पर लेटा रहता है। जो करना है डॉक्टर को करना होता है। एक वार्ड में कई कोरोना मरीज भर्ती थे, इस बीच डॉक्टर हर किसी से मिलते। इलाज के अतिरिक्त हाल-चाल लेते। आज हम उनकी बदौलत है परिवार के बीच हैं।

- कोरबा, कटघोरा निवासी मरीज (उम्र 59)

(- 'पत्रिका' के पास मरीजों के नाम हैं, मगर उनके अनुरोध पर प्रकाशित नहीं किए जा रहे हैं।)

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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