निजी अस्पतालों में लूट, शासन के आदेश की उड़ा रहे धज्जियां रहे हैं प्रदेश के प्राइवेट हॉस्पिटल

शासन ने निजी अस्पतालों में इलाज की दर को निर्धारित कर आदेश भी जारी कर दिया है। शासन के आदेश के पहले और नया आदेश जारी होने के बाद भी उनका मनमानापन जारी है।

By: Bhawna Chaudhary

Updated: 07 Sep 2020, 08:16 AM IST

रायपुर. प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। मरीजों को भर्ती कर इलाज करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने रायपुर में 11 समेत प्रदेश में 13 निजी अस्पतालों को मंजूरी दी है। अस्पतालों में 347 बेड आरक्षित किए गए हैं। कई अन्य निजी अस्पतालों ने भी आवेदन लगाए है, जिनको मंजूरी देने पर विचार किया जा रहा है।

शासन ने निजी अस्पतालों में इलाज की दर को निर्धारित कर आदेश भी जारी कर दिया है। शासन के आदेश के पहले और नया आदेश जारी होने के बाद भी उनका मनमानापन जारी है। स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी सब कुछ जानते हुए इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। अमेरिका से आया एक व्यक्ति 18 अगस्त को राजधानी के एक निजी अस्पताल में कोरोना इलाज के लिए भर्ती हुआ था। एयरपोर्ट पर जांच के दौरान उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई थी। निजी अस्पताल संचालक ने विगत एक सप्ताह के भीतर ही 1.80 लाख रुपए का बिल बना दिया था।

पीड़ित के परिजनों ने डिस्चार्ज के लिए कहा तो अस्पताल प्रबंधन इसके लिए तैयार नही हो रहा था। किसी प्रकार परिजन पीड़ित को घर ले गए और होम आइसोलेशन में रखकर इलाज कराया। ऐसे ही राजधानी का एक परिवार कोरोना संक्रमित हो गया। परिवार में पति पत्नी और बच्चे थे। बच्चों को कोरोना होने की वजह से परिवार अच्छे इलाज के लिए एक एक निजी अस्पताल में भर्ती हो गया। अस्पताल ने इलाज के नाम पर साढ़े चार लाख का बिल बना दिया।

पीड़ित परिवार के एक सदस्य ने बताया कि अस्पताल में किसी दिन कोई बड़ा डॉक्टर देखने नहीं आया, जूनियर जी इलाज कर रहे थे, फिर भी भारी- भरकम बिल बना दिया गया। वह भूल के भी किसी को निजी अस्पताल में इलाज के लिए नही सलाह देंगे। ऐसे ही एक निजी अस्पताल में भर्ती एक संदिग्ध मरीज का इलाज के नाम पर 24 घंटे में 40 हजार रुपए खर्च हो गए।

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