कोरोना जांच रिपोर्ट आ रही 5 दिन बाद, वायरस फैलता तो संभाले नहीं संभलते हालात

इलाज करने वाले डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि शुक्र है कि वायरस स्प्रेड नहीं कर रहा है, वरना स्थिति को संभालना मुश्किल हो जाता। मगर, सवाल यह है आखिर कब तक ऐसा चलेगा ।

By: Karunakant Chaubey

Published: 29 May 2020, 09:44 PM IST

रायपुर. डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल के आईसोलेशन वार्ड में पदस्थ नर्स कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्क में आई थी। २२ मई को इनका सैंपल लिया गया और रिपोर्ट 27 मई को आई। कांकेर के सीएमएचओ ऑफिस में पदस्थ डाटा एंट्री ऑपरेटर की जांच रिपोर्ट आने में 6 दिन लग गए। इस देरी की वजह है सभी कोरोना टेस्टिंग लैब का ओवर लोड होना। विशेषज्ञों, इलाज करने वाले डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि शुक्र है कि वायरस स्प्रेड नहीं कर रहा है, वरना स्थिति को संभालना मुश्किल हो जाता। मगर, सवाल यह है आखिर कब तक ऐसा चलेगा ।

'पत्रिका' पड़ताल में ये दो उदाहरण सामने आए हैं, मगर ऐसे कई मामले हैं। ऐसे में कोरोना कांटेक्ट ट्रेसिंग टीम के सामने परेशानी खड़ी हो रही है। क्योंकि संदिग्धों, पॉजिटिव मरीजों के संपर्क वालों के सैंपल ले लिए जाते हैं। इन्हें घर पर रहने की सलाह दे दी जाती है, क्योंकि इनमें कोई लक्षण नहीं होते। मगर, रिपोर्ट आती है तो उसमें व्यक्ति संक्रमित मिलता है। तब तक वह कई लोगों के संपर्क में आ चुका होता है।

सूत्रों के मुताबिक कोरोना कंट्रोल एंड कमांड सेंटर की कोर कमेटी में कांटेक्ट ट्रेसिंग टीम ने इसे लेकर अफसरों के सामने चिंता जाहिर की। मगर, इन्हें सिर्फ इतना कहा गया कि सैंपल जांच में तेजी लाई जाएगी। उधर, गुरुवार को एम्स रायपुर में राज्य स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ एम्स प्रबंधन की बैठक हुई। सैंपल पेंडेंसी का मुद्दा उठा।

सूत्र बताते हैं कि एम्स द्वारा कहा गया कि फील्ड में मौजूद डॉक्टर यह तय करे कि किसके सैंपल लिए जाने चाहिए किसके नहीं? अगर, सभी के लेंगे तो जांच में परेशानी खड़ी होगी। पेंडेंसी बढ़ती चली जाएगी। वर्तमान में ६२ हजार से अधिक सैंपल की जांच हो चुकी है। जिनमें अकेले ५० प्रतिशत सैंपल एम्स में जांचे गए हैं।

6 घंटे लगते हैं जांच रिपोर्ट आने में-

प्रदेश के किसी भी जिले में अगर सैंपल लिए गए हैं तो अधिकतम ६ घंटे में ये लैब पहुंच ही जाते हैं। लैब में भी अधिकतम 6 घंटे लगते हैं जांच रिपोर्ट आने में। वह तब जब पेंडेंसी न हो। मगर, अभी कुछ लैब से समय पर, कुछ से बहुत देरी में जांच रिपोर्ट आ रही है। क्योंकि इन पर अधिक भार है।

रोजाना 3 हजार सैंपलों की हो रही जांच-

प्रवासी मजदूरों की वापसी के साथ ही प्रदेश की चार प्रमुख लैब पर सैंपल जांच का भार एकाएक बढ़ गया है। स्थिति यह है कि ये तीनों रोजाना 3 हजार से अधिक सैंपल की जांच कर रही हैं। इनके अलावा लालपुर स्थित लैब में ट्रूनॉट मशीन से जांच हो रही है। एसआरएस निजी लैब में भी जांच हो रही हैं, मगर पेंडिंग सैंपल की संख्या बढ़ती जा रही है। क्योंकि पूरा भार एम्स रायपुर, पं. जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज रायपुर, स्व. बलीराम कश्यप मेडिकल कॉलेज जगदलपुर और स्व. लखीराम अग्रवाल मेडिकल कॉलेज रायगढ़ पर है।

नई लैब खोलने में इसलिए देरी

सरकार बिलासपुर, राजनांदगांव और अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में लैब खोल ही नहीं पा रही है। इसकी वजह है मैन-पॉवर। अगर, ज्यादा देरी हुई तो राज्य के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी।

रिपोर्ट मिलने में देरी तो हो रही है, इसे लेकर स्वास्थ्य सचिव के माध्यम से सभी लैब संचालकों को जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। तीन कॉलेजों में लैब खुलना प्रक्रियाधीन है।
-डॉ. अखिलेश त्रिपाठी, उप संचालक एवं प्रवक्ता, स्वास्थ्य विभाग

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Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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