एम्स और आंबेडकर अस्पताल में 'वायरस अटैक', लगातार संक्रमित हो रहे डॉक्टर, नर्स और स्टॉफ

- प्रदेश में 11 जून तक 41 हेल्थ केयर वर्कर्स और 28 वॉरियर्स हुए संक्रमित
- अस्पतालों के क्लिनिकल ऑडिट से पता चल सकता है कि कहां हो रही चूक
- सरकारी ही नहीं निजी अस्पतालों को भी खतरा, हालांकि इनमें मरीजों की संख्या कम

By: Bhupesh Tripathi

Published: 14 Jun 2020, 08:44 PM IST

रायपुर . प्रदेश के दो सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल के स्टॉफ लगातार कोरोना संक्रमित पाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं इन अस्पतालों में आम बीमारियों के इलाज के लिए भर्ती हो रहे मरीजों तक भी वायरस पहुंच रहा है। 13 जून की रिपोर्ट के मुताबिक 41 हेल्थ केयर वर्कर्स संक्रमित हो चुके हैं। शनिवार को आई रिपोर्ट में एम्स रायपुर के हॉस्टल वार्डन, मेडिकल कॉलेज की पीजी छात्रा (डॉक्टर) और एम्स में भर्ती एक मरीज तक संक्रमण पहुंच गया। ये पॉजिटिव पाए गए और आईसोलेट किए गए है। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर ये संक्रमित कैसे हो रहे हैं? अगर हो रहे हैं तो इन्हें कैसे संक्रमण से बचाया जाए।

'पत्रिका' लगातार बताते आ रहा है कि अस्पतालों में वायरस पैर पसार रहा है। क्योंकि अस्पतालों में आने जाने वालों की थर्मल स्क्रीनिंग तो छोडि़ए गेट पर सेनिटाइजर भी नहीं दिया जा रहा है। हमारे हेल्थ केयर वर्कर्स दिन-रात से अपनी जान जोखिम में डालकर, घर-परिवार से दूर रहकर सेवा दे रहे हैं। इसलिए यह सरकार की जिम्मेदारी है कि कोरोना वायरस से इन्हें सुरक्षित रखा जाए। इसके लिए प्रोटोकॉल में बदलाव की आवश्यकता पड़े तो किया जाए। पीपीई किट, एन९५ मॉस्क और अन्य सुरक्षात्मक उपकरण मुहैया करवाए जाएं। क्योंकि इनके बिना कोरोना का इलाज संभव नहीं।

विशेषज्ञों के सुझाव, बोले ऑडिट होना चाहिए- पत्रिका ने चिकित्सा विशेषज्ञों और हॉस्पिटल मैनेजमेंट के क्षेत्र में काम करने वाले प्रोफेशनलर्स से बात की। इन्होंने कहा कि अगर अस्पतालों के स्टॉफ और भर्ती मरीज संक्रमित पाए जा रहे हैं तो अस्पतालों का क्लिनिकल ऑडिट होना चाहिए। जिससे कहां पर कमी रह जा रही है? किस स्तर पर चूक हो रही है?, उसे पहचाना जाए और दूर करने के प्रयास हों। ताकि हम अपने हेल्थ केयर वर्कर्स को सुरक्षित रख सकें। राज्य स्तरीय ऑडिट टीम बनाई जानी चाहिए।

माना में ड्यूटी पर तैनात पीजी छात्र कईयों के संपर्क में आई-

पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की पीजी छात्रा (डॉक्टर) की ड्यूटी माना कोविड१९ हॉस्पिटल में लगाई गई थी। जानकारी के मुताबिक बीते 3-4 दिनों से उसे हल्का बुखार महसूस हो रहा था। उसने विभागाध्यक्ष को सूचना दी। तत्काल कोरोना टेस्ट करवाया गया और शनिवार को रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। अब कांटेक्ट ट्रेसिंग की जा रही है कि वह इस दौरान किन-किन स्टॉफ के संपर्क में रही। जिन स्टॉफ के वह संपर्क में रही, वे घर भी गए होंगे। कांटेक्ट ट्रेसिंग की सूची बहुत लंबी है। सूत्र बताते हैं कि मेडिकल कॉलेज से 70 स्टॉफ की ड्यूटी माना कोविड19 हॉस्पिटल में लगाई गई है। इस लिहाज से बड़े खतरे के संकेत हैं।

यह लड़ाई लंबी चलनी है, सबको मिलकर लडऩी है। जरूरी है कि हेल्थ केयर वर्कर्स के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पूरा पालन करवाया जाए।

डॉ. राकेश गुप्ता, अध्यक्ष, हॉस्पिटल बोर्ड

अस्पतालों को सेनिटाइजेशन गाइड-लाइन दी गई है। उन्हें नियमित इसका पालन करवाना है। जहां भी चूक हो रही है,उसे जल्द दूर किया जाएगा।
डॉ. अखिलेश त्रिपाठी, उप संचालक एवं प्रवक्ता, स्वास्थ्य विभाग

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