निगम के अधिकारी कर रहे टेंडर की बंदरबाट, लोकार्पण हो चुके गुरुजी चौक और सड़क चौड़ीकरण का टेंडर 10 दिसंबर को

- भाजपा ने लगाया आरोप, कांग्रेस सरकार से मांगा जवाब, 17 नवंबर- ग्लोब चौक, सड़क चौड़ीकरण का टेंडर 17 नवंबर को निकाला गया , 7 दिसम्बर- 7 दिसंबर टेंडर भरने के लिए आखिरी तारीख। 10 दिसंबर को इसका टेंडर खोला जाना है।

By: Bhupesh Tripathi

Published: 05 Dec 2020, 07:53 PM IST

रायपुर. राजधानी के देवेंद्र नगर चौक में नगर निगम ने गुरुजी चौक का सौंदर्यीकरण करवाया। यहां लैंड स्कैपिंग और सड़क चौड़ीकरण जैसे बड़े काम भी हुए। 24 नवंबर को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से इसका उद्घाटन करवाया गया। जिसमें कई केबिनेट मंत्री, महापौर, सभापति समेत नेता अधिकारी मौजूद रहे। मगर, अब खुलासा हुआ है कि करोड़ों का यह निर्माण बगैर टेंडर प्रक्रिया के हुआ है। हालांकि, निर्माण एजेंसी नगर निगम रायपुर ने इसे कागजों पर चढ़ाने के लिए उद्घाटन के 7 दिन पहले टेंडर किया, जो 10 दिसंबर को खुलेगा। भाजपा प्रवक्ता एवं पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने शुक्रवार को दस्तावेजों के साथ यह खुलासा किया। उन्होंने कहा कि सरकार इस पर जवाब दें।

भाजपा द्वारा किए गए इस खुलासे के दौरान पेश किए दस्तावेज गड़बड़ी के सबूत दे रहे हैं। टेंडर दस्तावेज बताते हैं कि चौक में आईलैंड निर्माण के लिए 21,44,990 रुपए प्रस्तावित राशि हैं। वहीं सड़क चौड़ीकरण के लिए 71,20,000 रुपए प्रस्तावित हैं। मगर, यह काम तो कब का पूरा हो चुका है।

भाजपा, इस पूरे मामले में सीधे कांग्रेस सरकार पर हमलावर है। इसे भ्रष्टाचार, अपनों को लाभ पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार इस पर स्पष्टीकरण दें। सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस राज में लोकार्पण के बाद ही टेंडर प्रक्रियाएं होती है? इस दौरान मूणत ने जल जीवन मिशन के टेंडर में भी बंदरबाट की जा रही थी।

अब ये बड़े सवाल-

पहला- निर्माण पूरा हो चुका है। जिसे किसी ठेकेदार ने ही किया होगा। तो अब टेंडर जारी करने का क्या मतलब है? इससे तो स्पष्ट होता है कि चाहे कोई भी टेंडर भरे, जिसने काम किया उसे ही वर्कऑर्डर जारी किया जाएगा।

दूसरा- पारदर्शिता लाने के लिए ही टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाती है। ऐसे में जानकारों का मानना है कि ऐसे कामों से टेंडर प्रक्रिया का औचित्य ही नहीं रह जाता। अगर, कोई न्यायालय जाता है तो निगम मुश्किल में भी फंस सकता है।

आमने- सामने-
यह प्रशासनिक गड़बड़ी है। मंत्री-महापौर प्रोजेक्ट नहीं बनाते है, न ही उनके फाइलों में हस्ताक्षर होते हैं। जिन अफसरों ने काम करवाने के बाद टेंडर प्रक्रिया की है, उनके विरुद्ध कार्रवाई हो। मगर, चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए यह खेल खेला गया है।
राजेश मूणत, पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री

पहले मूणतजी एक्सप्रेस वे निर्माण में हुई गड़बडिय़ों पर जवाब दें। बताएं कि स्काई वॉक की क्या उपयोगिता थी? जब वे इन दोनों प्रोजेक्ट को लेकर जवाब देंगे, तो मैं उनके सब सवालों का जवाब दे दूंगा।
एजाज ढेबर, महापौर

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