कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग पर नया संकट, महतारी एंबुलेंस सेवा 31 से बंद

कोरोना काल (COVID 19) में स्वास्थ्य विभाग (Health Department) को 102 महतारी एक्सप्रेस एंबुलेंस (Mahatari Express Ambulance) सेवा की संचालन कंपनी जीवीके-ईएमआरआई ने जोर का झटका दिया है। कंपनी ने 31 जुलाई से एंबुलेंस का संचालन बंद करने का फैसला ले लिया है।

By: Ashish Gupta

Published: 27 Jul 2020, 11:26 AM IST

रायपुर. कोरोना काल (COVID 19) में स्वास्थ्य विभाग (Health Department) को 102 महतारी एक्सप्रेस एंबुलेंस (Mahatari Express Ambulance) सेवा की संचालन कंपनी जीवीके-ईएमआरआई ने जोर का झटका दिया है। कंपनी ने 31 जुलाई से एंबुलेंस का संचालन बंद करने का फैसला ले लिया है। कंपनी ने यह जानकारी विभाग को दे दी है।

साथ ही अपने 1750 अधिकारी कर्मचारियों को सेवा समाप्ति का नोटिस भी जारी कर दिया है। गर्भवती माताओं और उनके 1 साल की आयु के बच्चों को अस्पताल लाने, ले जाने वाली यह महत्वपूर्ण सेवा अगर बंद होती है तो इसका सीधा असर हजारों-लाखों माताएं और उनके बच्चों पर पड़ेगा। जिनके एक कॉल पर सिर्फ 10 मिनट में परिवहन यह निशुल्क सेवा मिलती है।

पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि 2 साल यानी जुलाई 2018 से विभाग और कंपनी के बीच विवाद गहराया हुआ है। जुलाई 2018 में कंपनी से अनुबंध समाप्त हो गया था। मगर विभाग द्वारा कहा गया कि नए टेंडर तक सेवाएं जारी रखें। तीन बार टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद कंपनी का चयन नहीं हो सका। फरवरी-मार्च में तीसरा टेंडर रद्द कर दिया गया है। इस तर्क के साथ योग्य कंपनी नहीं मिली। चौथा टेंडर निकाला जाएगा, मगर यह कोरोना काल में ठंडे बस्ते में चला गया है।

उधर, कंपनी की ऑपरेशन कॉस्ट ढाई करोड़ मासिक बैठती है। वह राशि भी बीते 2 महीने से आधी कर दी गई है। कंपनी का कहना है कि विभाग पुरानी दर पर ही काम ले रहा है, अब उस पर सेवा देना संभव नहीं है। 2013 में आई एंबुलेंस अब कंडोम कबाड़ हो चुकी है। मेंटेनेंस लागत बढ़ती जा रही है। इन्हीं सब कारणों से कंपनी ने हाथ खींच लिया है। विभागीय अफसरों का कहना है कि बातचीत का दौर जारी है। मगर, सूत्र बताते हैं कि कंपनी फुल एंड फाइनल के मूड में है।

8 साल में 42 लाख हुए लाभान्वित
प्रदेश में अगस्त 2013 से शुरू हुई 102 महतारी एक्सप्रेस से अब तक 42 लाख गर्भवती माताएं और उनके बच्चे लाभान्वित हो चुके हैं। इससे गर्भवतियों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। जिससे मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी आई है। एंबुलेंस के अंदर आपात स्थिति में डिलीवरी करवा कर जान भी बचाई गई।

नए टेंडर में कंपनी खुद लाएगी एंबुलेंस
नए टेंडर में संचालक कंपनी को ही एंबुलेंस लेकर आना है, जैसा 108 संजीवनी एंबुलेंस की शर्तों में शामिल है। सरकार सिर्फ एकमुश्त भुगतान करेगी। सेवा की निगरानी करेगी। किसी भी प्रकार से सेवा बाधित होने के लिए कंपनी जिम्मेदार होगी, इसमें 300 एंबुलेंस फील्ड में उतारी जाएगी।

जीवीके-ईएमआरआई के प्रवक्ता शिबू कुमार ने कहा, नई एंबुलेंस नहीं दी जा रही, पुरानी कंडम हो चुकी है। अभी विभाग ने ऑपरेशन एक्सपेंशस भी आधा कर दिया है। ऐसे में 102 का संचालन संभव नहीं था। सेवा समाप्त करना ही आखिरी विकल्प बचा है।

स्वास्थ्य संचालनालय 108-102 आपातकालीन सेवा के राज्य नोडल अधिकारी जेके मेश्राम ने कहा, 102 महतारी एक्सप्रेस की सेवा महत्वपूर्ण है। वर्तमान की संचालन कंपनी के साथ बातचीत जारी है। यह सेवा कभी बाधित नहीं होने दी जाएगी।

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Ashish Gupta Desk
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