सरकार ने अपने सरकारी अस्पतालों पर जताया भरोसा, एम्स नहीं लाए गए कोरोना मरीज

सरकार ने जताया भरोसा- जांजगीर के मरीजों को बिलासपुर और कोरिया का मरीज अंबिकापुर शिफ्ट,- शुक्रवार को पॉजिटिव केस मिलने के बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग ने लिया निर्णय।

By: Bhupesh Tripathi

Published: 16 May 2020, 09:13 PM IST

रायपुर . प्रदेश में कोरोना के 66 पॉजिटिव मरीजों में से 58 मरीजों को अखिल भारतीय आयुविज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर में भर्ती करवाया गया है। कहीं न कहीं सरकार को एम्स पर अपने सरकारी अस्पतालों से ज्यादा भरोसा है। बीते दिनों इसे लेकर स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव से सवाल किया गया कि क्यों नहीं मरीजों को अन्य कोविड- 19 हॉस्पिटल में भर्ती करवाते ? उन्होंने जवाब दिया था कि एम्स से शुरुआती 100 मरीजों को भर्ती करने का अनुबंध हुआ है। मगर, शुक्रवार रात मिले कोरोना के छह मरीजों को एम्स नहीं लाया गया। सरकार ने अपने सरकारी अस्पतालों पर भरोसा जताया।

शुक्रवार रात जांजगीर चांपा में कोरोना के पांच और कोरिया जिले में एक कोरोना संक्रमित मरीज की पुष्टि हुई थी। इन्हें रायपुर ही लाने की तैयारी थी। मगर, अचानक स्वास्थ्य विभाग से जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया गया कि जांजगीर चांपा के मरीजों को बिलासपुर और कोरिया के मरीज को अंबिकापुर शिफ्ट करवाया जाए। बता दें कि बिलासपुर जिला अस्पतालो को कोविड-19 और अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में कुछ वार्ड को कोरोना मरीजों के लिए आइसोलेट किया गया है। तत्काल इन दोनों संस्था प्रमुखों को मरीजों को भेजे जाने की सूचना दी गई। यहां छह मरीजों का इलाज जारी है। 'पत्रिका' लगातार यह मुद्दा उठाता रहा है कि जब तैयारियां हैं तो एम्स के अलावा अन्य सरकारी अस्पतालों में भी संक्रमित मरीजों को रखा जा सकता है। इससे इन अस्पतालों में मौजूद सुविधाओं में कमियों को दूर करने का मौका मिलेगा और डॉक्टरों को इलाज करने का अवसर। बता दें कि कटघोरा के सभी मरीजों को बिलासपुर नहीं, एम्स रायपुर लाया गया था।

माना और आंबेडकर अस्पताल को भी है इंतजार
फरवरी में जब कोरोना दुनिया में पैर पसारना शुरू कर रहा था, छत्तीसगढ़ सरकार ने एम्स के बाद माना सिविल अस्पताल को ही कोविड- 19 हॉस्पिटल बनाने का निर्णय लिया था। आज यहां 100 बिस्तर का आइसोलेशन वार्ड और आईसीयू वार्ड है। पं. जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज से डॉक्टर, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की गई है। तो दूसरी तरफ रिम्स के प्रोजेक्ट को रद्द कर सरकार ने डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल को कोविड- 19 हॉस्पिटल में परिवर्तित करने का फैसला लिया था। यहां करीब 150 बिस्तर तैयार हैं। 600 बिस्तर तक यहां सुविधा का विस्तार किया जा सकता है। इन दोनों ही कोरोना मरीजों के लिए समर्पित अस्पतालों में कोरोना मरीजों को भर्ती किया जा सकता है। इन्हें मरीजों का इंतजार है।

नांदगांव और बिलासपुर में एक-एक मरीज हुए थे ठीक
इसके पूर्व मार्च में थाईलैंड से लौटे युवक को राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज में ही भर्ती करवाया गया था। तो वहीं सऊदी अरब से लौटी बिलासपुर की बुजुर्ग महिला को अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर में रखा गया था। ये दोनों इन्हीं अस्पतालों में स्वस्थ हुए थे। गुरुवार तक मिले 60 में 58 मरीज एम्स लाए गए थे

कोविड -19 हॉस्पिटल का निर्माण सभी बड़े जिलों में करवाया जा रहा है। ताकि मरीजों को नजदीक के अस्पतालों में भर्ती करवाया जा सके। एम्स में एक निश्चित संख्या तक मरीजों को रखा जा सकता है।
डॉ. अखिलेश त्रिपाठी, उप संचालक एवं प्रवक्ता, स्वास्थ्य विभाग

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