क्यों नहीं थम रही चोरियां

क्यों नहीं थम रही चोरियां

Gulal Verma | Publish: Jun, 14 2018 07:42:42 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

बिलासपुर में वर्ष २०१८ के ५ महीनों में चोरी के आंकड़ों ने बीते वर्ष का रिकार्ड तोड़ दिया है।

आखिर बिलासपुर क्यों चोरों के लिए सबसे मुफीद जगह बनती जा रही है? बिलासपुर को प्रदेश का सबसे सुरक्षित इलाका माना जाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षोंं से हो रही चोरी, उठाईगिरी, डकैती, लूटपाट, हत्या जैसी आपराधिक घटनाओं ने इस मिथक को तोड़ दिया है। शहर में दिनदहाड़े चोरी की घटनाओं के चलते आम आदमी के मन में दहशत का माहौल घर कर गया है। कमोबेश यही स्थिति प्रदेश की राजधानी सहित अन्य शहरों की भी हैं, जहां चोरी की घटनाओं में इजाफा हुआ है। बिलासपुर में वर्ष २०१८ के ५ महीनों में चोरी के आंकड़ों ने बीते वर्ष का रिकार्ड तोड़ दिया है। चोरों ने ५ महीनों में १००० से अधिक वारदातों को अंजाम दिया है। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक यहां चोरी के १००० से अधिक मामले पेंडिंग हैं। चोरों ने अब तक ५ करोड़ से अधिक की संपत्ति पर हाथ साफ कर दिया है। रात में गश्त के बाद भी चोर पुलिस की नाक के नीचे से वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। यह स्थिति पुलिस प्रशासन के लिए शर्मनाक है। ज्यादातर मामलों में पुलिस 'सांप निकलने के बाद लकीर पिटतीÓ नजर आती है।
चोरों को पकडऩे में नाकाम पुलिस ने हर बार की तरह इस बार भी पुराने चोरी के आरोपियों को पकड़कर सुराग लगाने का प्रयास किया, लेकिन उसे कोई सफलता नहीं मिली। कई बार हाईटेक होते अपराधियों के आगे पुलिस के प्रयास बौने साबित हो जाते हैं। पुलिस की जांच का तरीका अब भी कई मायनों में पुरातन व कागजी हंै। प्रदेशभर में अपराधी खुलेआम वारदात को अंजाम देकर पुलिस के साथ ही सत्ता-व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में क्यों नहीं, पुलिस को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जाए। पुलिस के लिए 'तकनीकी साक्षरताÓ जरूरी है। अब तो तकनीकी क्षेत्र में प्रशिक्षित बेरोजगार युवाओं की भरमार है। ऐसे हुनरमंद युवाओं की भर्ती की जाए, जो हाईटेक होते अपराध के तरीकों से निपट सकें। बदलाव के इस दौर में पुलिसिया जांच के तौर-तरीके बदलने होंगे। महज डंडा फटकारने या कंधे पर राइफल टांगकर गश्त लगाने से ही कानून-व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल है। शासन-प्रशासन को भी इस दिशा में कारगर कदम उठाने चाहिए।

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