खुद को पुलिस अफसर बताकर लड़की को बुलाया होटल के कमरे में, रेप के बाद तैयार कर लिया वीडियो, फिर जब मन करता तब...

खुद को पुलिस अफसर बताकर लड़की को बुलाया होटल के कमरे में, रेप के बाद तैयार कर लिया वीडियो, फिर जब मन करता तब...

By: Bhawna Chaudhary

Published: 06 Jan 2020, 10:56 AM IST

रायपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले की एक युवती पिछले एक साल से फर्जी पुलिस अफसर के दैहिक और आर्थिक शोषण का शिकार हो रही है। इसका सबूत देने के बाद भी आरोपी के खिलाफ अफराध दर्ज होने में करीब एक साल लग गए। इस दौरान फर्जी पुलिस अफसर ने युवती पर दबाव बनाने के लिए उसके व उसके पति व परिवार के अन्य लोगों के खिलाफ कूटरचित दस्तावेजों के जरिए धोखाधड़ी के दो फर्जी मामले दर्ज करवा दिए।

होटल में किया रेप
इसके बाद रायपुर पुलिस के अफसरों के संवेदनशीलता जागी और फर्जी पुलिस अफसर के खिलाफ कोतवाली में अपराध दर्ज किया। आरोपी फरार है। पुलिस के मुताबिक बिलासपुर की रहने वाली 27 वर्षीय युवती का साल 2018 में रायपुर के पीयूष तिवारी से दोस्ती हुई थी। पीयूष ने खुद को पुलिस अफसर और अविवाहित बताया था। इस कारण युवती को उस पर भरोसा हो गया। एक दिन युवती रायपुर पहुंची, तो पीयूष उसे पचपेड़ीनाका में मिला। इसके बाद उसे कोल्डड्रिंक में नशीली दवा पिला दी और राजेंद्र नगर के एक होटल में ले जाकर दुष्कर्म किया।

करीब चार महीने बाद युवती को पीयूष के शादीशुदा होने और पुलिस अफसर नहीं होने का पता चला। युवती ने उससे संबंध तोड़ लिए और बिलासपुर के एक दूसरे युवक से शादी कर ली। शादी के कुछ दिनों बाद से पीयूष युवती को परेशान करने लगा और धमकाने लगा कि उसकी अश्लील वीडियो और फोटो उसके पास है। इसे उसके पति और ससुराल वालों को भेज देगा। इसका युवती ने विरोध किया और अपने पति को भी इसकी जानकारी दे दी। इसके बाद उसके पति ने पीयूष को समझाया। इससे भी पीयूष नहीं माना। चूंकि पीयूष की पत्नी पुलिस विभाग में रही है। पीयूष का रिश्तेदार भी पुलिस विभाग में है। इसकी धौंस युवती पर जमाने लगा।

यही नहीं, पीयूष ने वर्ष 2019 में मौदहापारा थाने में युवती और उसके पति के खिलाफ ब्लैकमेलिंग और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया। उस समय मौदहापारा थाना प्रभारी राहुल तिवारी थे। टीआई तिवारी ने युवती और उसके पति के खिलाफ जिन धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया था, वह भी संदेहास्पद था। इसके बाद पीयूष का युवती को प्रताडि़त करना चलता रहा। युवती ने कई बार पुलिस के बड़े अफसरों, मानव अधिकारी, महिला आयोग आदि में मामले की शिकायत की, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

फर्जी दस्तावेज बनाए
पुलिस के मुताबिक मौदहापारा थाने में अपराध दर्ज कराने के कुछ दिनों बाद पीयूष ने युवती, उसके पति, पिता और भाई के नाम से फर्जी इकरारनामा बनाया। इसमें उसने लिखा था कि युवती और उसके पति और रिश्तेदारों ने उससे नौकरी लगाने के नाम पर 5 लाख रुपए लिए, लेकिन नौकरी नहीं लगाई। फर्जी इकरारनामा के आधार पर पीयूष ने कुम्हारी थाने में युवती, उसके पति और पिता व भाई के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवा दिया। इस मामले में सभी को कोर्ट से जमानत मिली। इसके बाद युवती और उसके परिजनों ने पीयूष के द्वारा की गई एफआईआर को कोर्ट में चुनौती दी।

फिर दर्ज हुई एफआईआर
वकीलों की मदद से युवती ने एसएसपी से पूरे मामले की शिकायत की। एसएसपी आरिफ शेख ने इसे गंभीरता से लिया और कोतवाली सबडिवीजन के सीएसपी डीसी पटेल के पास भेजा। सीएसपी पटेल ने मामले में एफआईआर के आदेश दिए। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने पीयूष के खिलाफ धारा 376, 384 और 420 के तहत अपराध दर्ज किया है। उल्लेखनीय है कि पीडि़त युवती ने उसके खिलाफ मौदहापारा में अपराध दर्ज होने के बाद सीएसपी पटेल को घटना की सच्चाई की जानकारी दी थी। इसके बावजूद पीयूष के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। बल्कि पीयूष युवती और उसके ससुराल वालों को फोन करके धमकी देने लगा था।

पीयूष के खिलाफ दर्ज हैं अपराध
पुलिस के मुताबिक पीयूष तिवारी के खिलाफ कोतवाली थाने में वर्ष २००७ में नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। इसके अलावा सूरजपुर के भटगांव में वर्ष २०१२ में भी धोखाधड़ी का केस दर्ज है। सूत्रों के मुताबिक उसकी पत्नी भी पुलिस विभाग में थीं, लेकिन लगातार नौकरी के नाम पर पैसे लेकर धोखाधड़ी करने के कारण उसे बर्खास्त कर दिया गया है।

टीआई है रिश्तेदार
पीयूष रायपुर में पदस्थ रह चुके एक टीआई का रिश्तेदार है। बताया जाता है कि उसी टीआई की शह पर उसने युवती के खिलाफ मौदहापारा थाना और कुम्हारी में एफआईआर दर्ज कराई थी। मौदहापारा थाने के मामले में तो युवती का आरोप था कि थानेदार के मोबाइल से पीयूष फोन करके उसे धमकाता था। इसकी शिकायत युवती ने महिला आयोग में भी की है।

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