इन वेबसाइटों से खरीदेंगे सस्ता सामान तो हो जाएंगे कंगाल, झारखंड के दो बदमाशों ने खोला राज

इन वेबसाइटों से खरीदेंगे सस्ता सामान तो हो जाएंगे कंगाल, झारखंड के दो बदमाशों ने खोला राज

Chandu Nirmalkar | Updated: 02 Aug 2019, 09:30:52 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

Crime in raipur: दोनों आरोपी झारखंड (Jharkhand) के देवघर के रहने (Online fraud) वाले हैं।

रायपुर. वेबसाइट (Online fraud case) में सस्ते में कपड़े व अन्य सामान बेचने का ऑफर देने की आड़ में ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले सक्रिय हैं। ऐसे दो ठगों को आमानाका पुलिस (Crime in raipur) ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपी झारखंड (Jharkhand) के देवघर के रहने वाले हैं। देवघर, जामताड़ा ऑनलाइन फ्रॉड करने वालों का गढ़ हैं।

सस्ता के चक्कर में लूट गया सब कुछ..
पुलिस के मुताबिक आमानाका इलाके में अशोका बिरयानी में काम करने वाले सैफ अहमद ने गूगल में वेबसाइट ***** डॉट कॉम से ऑनलाइन एक टी शर्ट खरीदा था। टीशर्ट घर पहुंचा, तो वह घटिया स्तर का था। इसके बाद सैफ ने वेबसाइट में दिए कस्टमर केयर के नंबर पर कॉल किया। और घटिया टीशर्ट वापस लेकर पैसे देने के लिए कहा।

कस्टमर केयर ने पैसे वापस करने का झांसा देते हुए सैफ का बैंक खाता नंबर पूछा। खाता नंबर बताते ही उसके मोबाइल में ओटीपी नंबर आया। कस्टमर केयर ने ओटीपी नंबर पूछा। इसके बाद उसके खाते से तीन बार में 53 हजार रुपए का आहरण हो गया था। इसकी शिकायत पर आमानाका पुलिस ने अज्ञात कस्टमर केयर के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इस मामले में आमानाका पुलिस ने झारखंड के देवघर निवासी मोहम्मद समशुल और पवन कुमार साव को गिरफ्तार किया है। दोनों वेबसाइट में सस्ते में कपड़े, मोबाइल व अन्य सामान बेचने का ऑफर देते थे। इसके बाद ठगी करते थे।

पवन के बैंक खाते का इस्तेमाल
मुख्य आरोपी समशुल है। ठगी की राशि को उसने पवन के खाते में ट्रांसफर किया था। उसके खाते का इस्तेमाल करने के एवज में समशुल उसे 5 हजार रुपए देता था। पुलिस से बचने के लिए आरोपी ने अपने नाम से बैंक खाता नहीं खोल था। आरोपियों ने मिलकर कई राज्यों में इसी तरह से लाखों रुपए की ठगी की है। दोनों इससे पहले झारखंड में ही जेल में बंद थे।

ऐसे देते हैं लोगों को झांसा
झारखंड के देवघर, जामताड़ा इलाके में ऑनलाइन ठगी करने वाले सैकड़ों लोग हैं। उनका काम ही ठगी करना है। ये ऑनलाइन फ्रॉड करने में माहिर होते हैं। वर्तमान में सामान बेचने वाली कई वेबसाइटें बनाकर ठगी की जा रही है। इसमें कपड़े, मोबाइल, कॉस्मेटिक आदि सहित इलेक्ट्रानिक्स सामान रहते हैं, जिन्हें 50 से लेकर 500 रुपए तक में बेचते हैं।

वेबसाइट में सस्ता और बेहतर क्वालिटी का सामान नजर आने के कारण लोग उसे खरीद लेते हैं। और इसका ऑनलाइन भुगतान करते हैं। ग्राहक को भेजते समय घटिया या खराब सामान पैक कर देते हैं। घर पहुंचने पर ग्राहक देखते ही इसे लेने से मना कर देता है। निम्न स्तर का सामान होने के कारण ग्राहक इसे वापस लौटा देता है और अपना पैसा वापस मांगता है। इसी दौरान ठगी करते हैं।

ग्राहक वेबसाइट में दिए कस्टमर केयर नंबर में संपर्क करता है, तब ठग उससे बातचीत करता है। और ग्राहक को खराब सामान लेकर पूरा पैसा वापस करने का आश्वासन देता है। इसके बाद ग्राहक से पूछते हैं कि पैसा वापस खाते में लेना है या वॉलेट में लेना है। ग्राहक बैंक खाते में लेना चाहता है, तो ठग उसका खाता नंबर मांगते हैं। जैसे ही ग्राहक खाता नंबर देते हैं, उसके मोबाइल में ओटीपी आता है। ओटीपी बताते ही उनके खाते से राशि का आहरण कर लेते हैं।

खरीदी या नगद ट्रांसफर करते हैं ठग

ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले ठगी की राशि से खरीदारी करते हैं या फिर दूसरे खाते में रकम का ट्रांसफर कर देते हैं। आरोपी एक ओर ग्राहक को झांसे में लेकर उसके बैंक खाता नंबर या एटीएम कार्ड का नंबर पूछ रहा होता है, तो दूसरी ओर दूसरी वेबसाइट में खुद के लिए डीटीएच, मोबाइल रिचार्ज, टूर बुकिंग या अन्य सामान खरीदने की प्रक्रिया पूरी करके आँनलाइन भुगतान की प्रक्रिया कर रहा होता है। जैसे ही ग्राहक अपने बैंक खाता या एटीएम कार्ड की जानकारी देता है, ठग उस जानकारी को अपने भुगतान के लिए दर्ज कर देता है। इसलिए ओटीपी सीधा ग्राहक के मोबाइल पर जाता है। इसके बाद ठग झांसा देकर ग्राहक से वेरीफिकेशन के नाम पर ओटीपी पूछता है। ग्राहक के ओटीपी बताते ही उस ओटीपी को ठग अपने भुगतान के लिए इस्तेमाल करता है। इससे ग्राहक के खाते से ठग द्वारा किए गए ऑनलाइन शॉपिंग का भुगतान हो जाता है।

दूसरा तरीका ठग ग्राहक के बैंक खाते की राशि को अपने खाते में ट्रांसफर कर लेता है। इसमें भी ठग ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया कर लेता है। इसके बाद ग्राहक से उसके बैंक खाता नंबर पूछता है। बैंक खाता नंबर पता चलते ही ठग ग्राहक के बैंक खाते की दूसरे के खाते में ट्रांसफर कर देता है। ठगी के ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं।

ऐसे रहें अलर्ट
वेबसाइट से ऑनलाइन खरीदारी करते समय वेबसाइट की सर्विस की अच्छी तरह जानकारी ले लें। गूगल या कंपनी के कस्टमर केयर से बात करते समय अपनी बैंक खाता नंबर, एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड नंबर आदि जैसी गोपनीय जानकारी शेयर न करें। विश्वसनीय वेबसाइटों पर ही सर्च करें।

-अभिषेक माहेश्वरी, डीएसपी, साइबर क्राइम, रायपुर

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