संरक्षण केन्द्र में दो मगरमच्छों के बीच आपसी लड़ाई में एक की मौत

वन विभाग के संरक्षण केंद्र में एक मगरमच्छ की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई

By: Deepak Sahu

Updated: 19 Jan 2019, 03:51 PM IST

दिनेश यदु@रायपुर. बारनवापारा अभयारण्य और तुरतुरिया के बीच लाटादादर स्थित वन विभाग के संरक्षण केंद्र में एक मगरमच्छ की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई। यहां करीब डेढ़ एकड़ के तालाब में गरियाबंद, बीजापुर व कोडागांव से रेस्क्यू कर तीन मगरमच्छ लाए गए थे।

इनमें एक मादा और दो नर मगरमच्छ थे। जिसमें से एक नर की मौत 16 जनवरी को हो गई। डीएफओ बलौदाबाजार ने बताया कि दो दिन पहले मगरमच्छों के बीच जमकर लड़ाई हुई थी। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह भी आपसी लड़ाई बताई गई है।

20 साल उम्र, लंबाई करीब 2 मीटर
बारनवापारा में जिस मगरमच्छ की मौत हुई है, वह करीब 20 वर्ष का और 2 मीटर लंबा था। सामान्यत: मगरमच्छ की आयु 80 से 120 साल और करीब लंबाई चार मीटर तक होती है। अक्सर मगरमच्छ का मिलन बारिश में होता है, तब उनके बीच आपस में लड़ाई होती है। लेकिन ठंड में मगरमच्छ की मौत की वजह आपसी लड़ाई होने पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारों का कहना है कि जब कभी किसी जानवर को रेस्क्यू कर नई जगह लाया जाता है, तो एक साथ नहीं रखा जाता। लेकिन बारनवापारा अभयारण्य में तीनों मगरमच्छों को एक साथ तालाब में रखा गया।

पित्त और खून का दवा में उपयोग
मगरमच्छ का पित्त और खून का दवा बनाने में उपयोग किया जाता है। इसके खून एक हजार रुपए किलो और पित्त भी करीब 76 हजार प्रति किलो के हिसाब से बिकता है। इसकी चमड़ी से हैंडबैग और लेदर सूट्स जैस कीमती प्रोडक्ट भी बनाए जाते हैं।

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