सावधान : साइबर ठगों तक पहुंच रहा बैंकिंग- शॉपिंग करने वालों का डाटा

- क्रेडिट कार्ड, इंश्योरेंस, एटीएम कार्ड से जुड़ी जानकारियां लेकर कर रहे ठगी।
- पकड़ में नहीं आ रहे हैं डाटा चोर, ई-कामर्स कंपनी का डाटा बरामद हो चुका है।

By: Bhupesh Tripathi

Published: 17 May 2021, 02:29 PM IST

रायपुर। बैंकिंग हो या ऑनलाइन शॉपिंग सभी जगह साइबर ठगों की जद में है। बैंकिंग और ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े ग्राहकों के कई प्रकार का डाटा साइबर ठगों तक आसानी से पहुंच रहा है और इसी के बल पर साइबर फ्रॉड का धंधा चल रहा है। ठग लोगों को आसानी से झांसा देने में सफल हो रहे हैं। रायपुर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें डाटा चोरी का सबूत पुलिस को मिला है।

ठगों के पास कई ई-कामर्स कंपनियां, बैंक और इंश्यारेंस कंपनी के ग्राहकों का डाटा मिला है। हालांकि यह डाटा साइबर ठगों तक कैसे और कहां से पहुंचा? इसका खुलासा आज तक नहीं हो पाया है। ठगी का शिकार होने वालों का बैंक खाता, एटीएम कार्ड या क्रेडिट कार्ड जिस बैंक का होता है, आमतौर पर साइबर ठगी उसी बैंक का अधिकारी-कर्मचारी या कस्टमर केयर बनकर कॉल करता है।

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खमतराई इलाके में राजेंद्र मेहर से सवा लाख की ऑनलाइन ठगी मामले में भी यही हुआ। उनके क्रेडिट कार्ड की जो जानकारी बैंक वालों को होनी चाहिए थी, वह जानकारी ठगी करने वाले को थी। दरअसल साइबर ठगों के पास बैंक के खाताधारक, एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड रखने वालों या नए कार्ड के लिए आवेदन करने वालों की जानकारी पहुंच जाती है। इसी तरह ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों के बारे में भी ठगों को जानकारी हो जाती है।

कई बार मिला है डाटा
एएसपी क्राइम अभिषेक माहेश्वरी का कहना है कि साइबर फ्रॉड करने वाले कहीं न कहीं से ग्राहकों की जानकारी वाला डाटा ले लेते हैं और उस डाटा के माध्यम से लोगों को ठगते हैं। अधिकांश लोगों का जिस बैंक में खाता रहता है, ठग उसी बैंक के अधिकारी बनकर झांसा देते हैं। इससे संबंधित व्यक्ति आसानी से ठगों के बातों में आ जाता है। पुलिस ने दिल्ली के साइबर ठगों को पकड़ा था, उस समय उनके पास ई-कामर्स कंपनी स्नैपडील का बल्क डाटा मिला था। इसमें ग्राहकों की जानकारी थी। जामताड़ा के ठगों के पास कई सरकारी बैंकों के ग्राहकों की जानकारी मिल चुकी है।

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कहां और कैसे?
पुलिस भी यह मानती है कि ऑनलाइन ठगी के कई मामलों में ठगों तक बैंकिंग या ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े लोगों का डाटा पहुंच जाता है। लेकिन अभी तक यह डाटा ठगों को कहां से और कैसे मिलता है? इसका पता नहीं चल पाया है। ठगी करने वाले दूसरे राज्यों के रहते हैं। पूछताछ में डाटा को खरीदने की जानकारी देते हैं।

केस-1
गोंदवारा में रहने वाले राजेंद्र मेहर ने आरबीएल बैंक में नए क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन किया था। इस बीच कस्टमर केयर वाले बनकर एक व्यक्ति ने उन्हें फोन किया और उनका क्रेडिट कार्ड पहुंचने की जानकारी दी। साथ ही उसने क्रेडिट कार्ड की लिमिट, रिवार्ड पाइंट आदि की पूरी जानकारी दी। इससे राजेंद्र प्रभावित हो गया और उन्होंने कस्टमर केयर की ओर से भेजे ओटीपी नंबर को बता दिया। इसके बाद उनके खाते से सवा लाख रुपए रुपए से अधिक की राशि ठग ने निकाल ली। राजेंद्र के क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारी बैंक वालों के पास थी, लेकिन ठग को कैसे पता चल गया?

केस-2
राजेंद्र नगर की पायल जैन जियोमार्ट के जरिए ऑनलाइन शॉपिंग की। आर्डर पूरा नहीं होने पर कस्टमर केयर का नंबर निकाला। कस्टमर केयर वाले ने दूसरा नंबर दिया। उस नंबर पर कॉल करके आर्डर के संबंध में बात की। उसने उनके पति को रेडजोन में होना बताते हुए मोबाइल एप डाउनलोड करवा दिया। इसके बाद उसके लाखों रुपए पार कर दिए। ठगी करने वाले को पीडि़ता के पति के रेडजोन में होने का पता कैसे चला?

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मेट्रो शहर में बिक रहा डाटा
जामताड़ा के कई ठगों ने पूछताछ में खुलासा किया है कि उन्होंने दिल्ली से 5 से 10 हजार रुपए में डाटा खरीदते हैं। यह डाटा बेचने वाले तक कैसे पहुंचा? इसकी जानकारी उन्हें नहीं रहती है। साइबर सेल की टीम कई बार डाटा बेचने वालों की तलाश में दिल्ली जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई पकड़ में नहीं आया है।

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