दादा सूरी का स्वर्गारोहण महोत्सव, 11 विधानों से की पूजा

सीमंधर स्वामी मंदिर और भैरवनगर सोसायटी हुई भक्तिमय

रायपुर. दादा श्री जिनकुशल सूरी को चारों दादा गुरुदेव में प्रगट प्रभावी दादा के रूप में आराध्य देव के रूप में पूजे जाते हैं। मात्र 10 वर्ष की अल्पायु में दादा सूरी ने संयम ग्रहण कर अपनी कुशाग्र बुद्धि से अल्प समय में ही जैन आगम, न्याय व्याकरण में महारत हासिल कर ली थी। सीमंधर स्वामी जैन मंदिर और भेरवनगर सोसायटी में आयोजित स्वर्गारोहण महोत्सव में दादा सूरी के उपकारों का भक्तिमय स्मरण करते हुए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पूजा-आरती की।
दादा सूरी को संवत 1375 में वाचनाचार्य की उपाधि मिली। एेसे दादागुरु के स्वर्गारोहण महोत्सव के गुणानुवाद सभा में उपरोक्त उद्गार स्वाध्यायी व ट्रस्ट के अध्यक्ष संतोष बैद ने प्रगट करते हुए दादा श्री जिनकुशल सूरी के जीवनी पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 11 विधानों से भक्ति पूजन संपन्न किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। महिला मंडली ने भक्ति गीतों से भाव-विभोर किया।
बड़ी पूजा का विधान संपन्न किया: ट्रस्ट के महासचिव महेन्द्र कोचर ने बताया कि स्वर्गारोहण महोत्सव सुबह 9 बजे से सामूहिक इक्तीसा जाप से शुरू हुआ। फूलों से सजी मार्बल की क्षत्री में विराजमान चारों दादा के प्रतिमा के सम्मुख गुरू भक्ति का सैलाब श्री गुरू देवदयाल को मन में ध्यान लगाएअष्ठ सिद्धि नवनिधी मिले मनवांछित फल की गूंज रही। दादा गुरु के उपकारों व चमत्कारों का स्मरण कर भावांजलि अर्पित की गई। सुबह 10 बजे से बड़ी पूजा का आगाज सैकड़ों भक्तों की उपस्थिति में 11 विधानों से संपन्न हुआ।

VIKAS MISHRA
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