कसूरवार कौन?

कसूरवार कौन?

Gulal Verma | Publish: Sep, 05 2018 06:47:44 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

जनता के नुमाइंदे जनता को ही कसूरवार ठहराते रहे

डेंगू फैलने के लिए सरकार नहीं लोग जिम्मेदार हैं, क्योंकि वे जागरूक नहीं हैं। डेंगू से कोई मरा है तो इसके लिए मरने वाला खुद दोषी है। क्योंकि, वह समय पर इलाज करवाने अस्पताल नहीं गया। जनता के रहमोकरम पर उनके ही बीच से आए नुमाइंदे जब जनता को ही कसूरवार ठहराते हैं तो गंभीरता से सोचने पर लगता है कि अनजाने में ही सही पर वे सौ फीसदी सच बोल रहे हैं। इन अकल के मारों को कौन समझाए कि जनता अगर जगरूक होती तो ऐसा कहने वाले जहां हैं, वहां नहीं होते। भिलाई में डेंगू से लगातार मौतें हुईं। जिसमें इलाज में लापरवाही की बातें भी सामने आई। जिम्मेदारों को यह सब नहीं दिखा। एक लाइन में जनता के साथ मौसम पर ठीकरा फोड़ दिए। यहां तक बोलने पर में नहीं हिचके कि मरने वाले सभी डेंगू से नहीं मरे हैं। जबकि डेंगू से मौत का आंकड़ा प्रशासन खुद गिना रहा है। इसका मतलब जिम्मेदार ही गैरजिम्मेदाराना बातें कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि उन्हें जमीनी हकीकत की पूरी जानकारी नहीं है या अफसर उन्हें सही जानकारी नहीं दे रहे हैं। कुछ भी हो जिम्मेदारों का ऐसा रवैया उचित नहीं कहा जा सकता। उन्हें अपना रवैया बदल लेना चाहिए।
अब बताइए डेंगू ने इतना भयानक रूप ले लिया पर इसके लिए कोई जिम्मेदारी तय नहीं हुई। अब ऐसा नहीं चलेगा। जिम्मेदारों को यह जवाब देना ही होगा कि आखिर किसी मासूम के सिर से माता या पिता का साया छिन गया तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है? किसी मां की गोद सूनी हो गई तो उसके लिए कसूरवार कौन है? किसी का सुहाग छिन गया तो उसके लिए दोषी कौन है? जनता कसूरवार और मौसम को दोषी ठहराकर जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उन्हें यह नहीं भूलना चहिए के वे जनता के प्रति जवाबदेह हैं। उन्हें बताना ही होगा कि असली जिम्मेदार कौन है? समय रहते ठोस कदम उठाने में विलंब क्यों किया गया? अगर समय पर कदम उठा लिया जाता तो डेंगू इतना भयानक रूप नहीं लेता। इतनी तादाद में लोगों को जान नहीं गंवानी पड़ती। अब तो पूरा सरकारी तंत्र अपनी नाकामी छुपाने के लिए लीपापोती में जुट गया है।
हालात से निपटने के साथ दोबारा ऐसे हालात पैदा न हो इसके लिए क्या किया जाए इस पर मंथन करे तो बेहतर है। इसके लिए चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए। पचास हजार हो चाहे पांच लाख तक मुफ्त में इलाज की बात हो, अगर व्यवस्था ही ठीक नहीं है तो क्या फायदा। अस्पताल है तो डॉक्टर नहीं, और डॉक्टर है तो दवाई नहीं। बहरहाल, जनता को कसूरवार कहने वालों को इस बात का एहसास करा देना चाहिए कि जनता जागरूक हैं। लोकतंत्र में असल शक्ति जनता के हाथ में है। इसीलिए यह कहना जरूरी है कि अगर जागरुकता का परिचय नहीं दिए तो बेकसूर होकर भी हर बात के लिए कसूरवार ठहराए जाते रहोगे।

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