सवा करोड़ गबन के आरोपी सहायक ग्रेड तीन कर्मचारी समेत जिला शिक्षा अधिकारी को पांच साल का कारावास

शिक्षा के अधिकार समेत अन्य मदों में करोड़ों के घोटाले के मुख्य आरोपी तत्कालीन कांकेर शिक्षा अधिकारी एवं सहायक गे्रड तीन कर्मचारी को शनिवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 5-5 साल का सश्रम कारावास एवं दो-दो हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है।

By: ramdayal sao

Published: 01 Mar 2020, 07:19 PM IST

raipur/कांकेर. शिक्षा के अधिकार समेत अन्य मदों में करोड़ों के घोटाले के मुख्य आरोपी तत्कालीन कांकेर शिक्षा अधिकारी एवं सहायक गे्रड तीन कर्मचारी को शनिवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 5-5 साल का सश्रम कारावास एवं दो-दो हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। अदालत से फैसले आने के बाद घोटाले के दोनों दोषियों को जेल भेज दिया गया।
इस मामले की पैरवी कर रहे डीपीओ राजकुमार मिश्र ने बताया कि शिक्षा के अधिकार एवं कर्मचारी वेतन मद के लिए शासन से करोड़ों रुपए शिक्षा विभाग को मिला था। एक अप्रैल 2012 से 31 जनवरी 2014 तक कांकेर के जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर मंगतूराम खाड़े पदस्थ थे।

गरीब बच्चों के लिए शिक्षा के अधिकार के तहत शासन से 19 लाख 79 हजार 2 सौ रुपए शिक्षा विभाग को मिला था। शिक्षा अधिकारी ने बच्चों की राशि को गलत ढंग से निकल लिया था। शिक्षा के अधिकार के तहत स्कूलों में प्रवेश पाने वाले बच्चों की शिक्षा के एवज में जब निजी स्कूल के संचालकों ने राशि देने के लिए डिमांड किया तो उन्होंने 20 अलग-अलग चेक जारी कर दिया। जिसमें से सिर्फ 9 चेक विड्राल होने पर 4 लाख 43 हजार 700 हजार प्राप्त हुए। शेष 15,35,500 रुपए का 11 चेक बाउंस हो गया। शिक्षा विभाग का चेक बाउंस होने के बाद विभाग में हडक़ंप मच गया। यह मामला जिला प्रशासन तक पहुंचा तो तत्कालीन कलेक्टर ने तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन कर दिया। जांच टीम में ट्रेजरी अफसर इमरान खान, अपर कलेक्टर मोतीलाल, अंकेक्षण अधिकारी राकेश जैन ने जब शिक्षा विभाग की कुंडली खंगालना शुरू किया तो करोड़ों का घोटाला पकड़ में आ गया।

कर्मचारियों के वेतन मद में परिवर्तन कर शिक्षा अधिकारी ने सहायक ग्रेड तीन कर्मचारी हीरालाल पटेल के सहयोग से एक करोड़ 25 लाख 65 हजार 155 रुपए गलत ढंग से निकाल लिया था। जांच रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि शिक्षा अधिकारी ने कुछ ऐसे फर्मों से फर्नीचर एवं अन्य सामग्री खरीदा था जो धरातल पर नहीं थे। इस दौरान कई करोड़ से अधिक की अनियमितता पाया गया था। जांच टीम ने जब तत्कालीन कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपी तो शिक्षा अधिकारी के खिलाफ अपराध दर्ज करने की शासकीय प्रक्रिया पूरा कराया गया।

करोड़ों का गबन प्रमाणित होने पर तत्कालीन शिक्षा अधिकारी राजेंद्र झा ने 12 मार्च 2014 को कोतवाली में पूर्व शिक्षा अधिकारी मंगतूराम खांडे और सहायक ग्रेड तीन कर्मचारी हीरालाल पटेल के खिलाफ अपराध दर्ज करा दिया। पुलिस ने सभी दस्तावेज अपनी कस्टडी में लेते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्टे्रेट की बेंच में मामले को प्रस्तुत कर दिया। उक्त प्रकरण के विवेचना पर गवाहों के बयान और साक्ष्य के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चित्रलेखा सोनवानी ने तत्कालीन शिक्षा अधिकारी मंगतूराम खांडे एवं सहायक गे्रड 3 कर्मचारी हीरालाल पटेल को सवा करोड़ रुपए शासकीय धन का गबन सही पाए जाने पर दोषी करार देते हुए 5-5 साल सश्रम कारावास एवं दो-दो हजार रुपए के अर्थ दंड से दंडित किया है। अर्थदंड की राशि नहीं जमा करने पर अतिरिक्त सजा जेल में काटनी पड़ेगी।

ramdayal sao Desk
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