डेढ़ साल में 300 करोड़ की नियम विरूद्ध खरीदी, जल संसाधन विभाग नहीं मान रहा नया भंडार-क्रय नियम

- अभी भी बाहरी सप्लायरों को मिल रही करोड़ों की निविदा
- प्रदेश में दूसरे नंबर का सबसे ज्यादा बजट जल संसाधन विभाग का

By: Bhupesh Tripathi

Published: 05 Jan 2021, 07:57 PM IST

रायपुर। प्रदेश सरकार (Chhattisgarh government) ने लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लोकल सप्लायरों से खरीदी के निर्देश सभी विभागों को दे रखा है। इसके लिए शासन ने जेम्स से खरीदी का प्रावधन बंद करके सीएसआईडीसी से स्थानीय वेंडरों खरीदी करने का निर्देश जारी किया था। इसके लिए शासन ने भंडार क्रय नियम में भी परिवर्तन किया था। अहम बात यह है कि शासन के निर्देश के तकरीबन डेढ़ साल बाद भी जल संसाधन विभाग (Department of Water Resources) ने अब तक सीएसआइडीसी में पंजीयन नहीं कराया है।

शासन आदेश के बाद भी अब तक जल संसाधन विभाग (Department of Water Resources) ने तकरीबन ३०0 करोड़ की खरीदी मनमाने तरीके से की है। ऑनलाइन भुगतान में जब जिले के अधिकारी सीएसआईडीसी से संबंधित किसी पुराने पेमेंट का भी भुगतान करना भी चाहते हैं, तो एमआईएस वेबसाइट में अभी भी पुराने भंडार क्रय नियम जुलाई 2017 में संशोधित का उल्लेख किया जाता है। पूरी खरीदी प्रक्रिया ऑनलाइन है, जिसके तहत सभी विभागों को सीएसआईडीसी के पोर्टल ई-मानक पर पंजीयनकराना अनिवार्य है। जिसे जल संसाधन द्वारा आज तक नहीं कराया गया है। जबकि, सीएसआईडीसी के अधिकारियों का कहना है कि पंजीयन कराना अनिवार्य है।

शासन ने पांच रिमाइंडर भेजे
शासन के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग ने स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के छह पत्रों का हवाला देकर ई-मानक में पंजीयन कराने को कहा है। विभाग ने इससे पहले पांच पत्र जल संसाधन विभाग को रिमाइंडर के तौर पर भेजा था।

विकल्प ही नहीं
निविदा पुरानी प्रक्रिया के मुताबिक भरने का संदेश दिखाई देता है। इससे साफ जाहिर है कि जल संसाधन विभाग शासन के भंडार क्रय नियम के पालन करने के लिए ना तो अपना आज दिनांक तक पंजीयन कराया है और ना ही वेबसाइट में लघु उद्योग इकाइयों के भुगतान का विकल्प दिया गया है।

बजट की कमी नहीं
जल संसाधन विभाग का बजट प्रदेश के अन्य विभागों से कई गुना अधिक है। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक पीडब्ल्यूडी के बाद जल संसाधन विभाग का बजट सबसे ज्यादा है। लोगों को जल आपूर्ति करने वाले विभाग में स्थानीय निर्माताओं की अनदेखी की जा रही है।

300 -400 करोड़ की खरीदी
पिछले डेढ़ साल में विभाग द्वारा 2500-3000 करोड़ के टेंडर किए गए। जिसका अगर 10-15 प्रतिशत भी मान लिया जाए तो अमूमन लगभग 300-400 करोड़ की खरीदी जल संसाधन विभाग द्वारा निर्माण की निविदाओं में जोड़कर की गई है। जिसमें प्रदेश के बाहरी ठेकेदारों द्वारा सामग्री मनमाने दाम और मनचाही गुणवत्ता पर सप्लाई की गई, जिससे कि प्रदेश के लघु उद्योग इकाइयों को लाभ नहीं मिल पाया।

वर्जन
इस संबंध में संबंधित अधिकारी से जानकारी मांगी गई है। यदि पंजीयन नहीं हुआ है तो यह गंभीर मामला है। इस की प्रक्रिया जल्द से जल्द प्रारंभ कराई जाएगी।
- जयंत पवार, प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग

Show More
Bhupesh Tripathi
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned