देवती कर्मा बोलीं - मैंने बेटे छविंद्र को मना लिया है अब वो मेरे लिए प्रचार करेगा

कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर देवती कर्मा पर विश्वास जताते हुए टिकट देने की घोषणा की तो उनके लिए उनके ही पुत्र छविंद्र कर्मा ने बतौर निर्दलीय प्रत्याशी पर्चा दाखिल करके नई मुसीबत पैदा कर दी, लेकिन माँ - पुत्र में अब सुलह हो चुकी है

रायपुर. देवती कर्मा कांग्रेस के धाकड़ नेता और झीरम हमले में शहीद महेंद्र कर्मा की पत्नी है वो दंतेवाड़ा से विधायक भी हैं। कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर उन पर विश्वास जताते हुए जब पिछले दिनों उन्हें टिकट देने की घोषणा की तो उनके लिए उनके ही पुत्र छविंद्र कर्मा ने बतौर निर्दलीय प्रत्याशी पर्चा दाखिल करके नई मुसीबत पैदा कर दी, लेकिन माँ - पुत्र में अब सुलह हो चुकी है, छविंद्र ने शुक्रवार को अपना नामांकन वापस ले लिया है। पढ़िए देवती कर्मा के साथ आकाश शुक्ल की खास बातचीत।

सवाल : छविंद्र कर्मा को अपने कैसे मनाया? आपका चुनाव प्रचार करेंगे ?
जवाब : छविंद्र ने निर्दलीय विधानसभा चुनाव लडऩे के लिए नामांकन भरा था, लेकिन उसे हमने मना लिया। यह हमारे घर का मामला था, विवाद सुलझ चुका है। छविंद्र कांग्रेस को समर्थन करते हुए अब हमारा चुनाव प्रचार करेंगे। छविंद्र के आ जाने से पूरे परिवार में खुशी की लहर है। साथ ही हमारी ताकत भी बढ़ी है।

सवाल : विधानसभा चुनाव में किन मुद्दों को लेकर आप जनता के बीच जा रहीं हैं ?
जवाब : जहाँ भी जा रही हूँ, सडक़, पानी बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं है ही नहीं। इन सब समस्याओं को दूर करने के लिये एक बार फिर चुनाव ल?ना चाहती हूँ। ताकि महेंद्र कर्मा जी के सपने को पूरा कर सकूँ।

सवाल : सलवा जुडूम के तहत नक्सल प्रभावित लोगों शिविर, कैम्प में लाकर बसाया गया, अब न उनको शिक्षा मिल रही न रोजगार, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत भी नसीब नहीं हो रहा?
जवाब : सलवा जुडूम अभियान के तहत महेंद्र कर्मा जी ने उन्हें यहां लाकर बसाया था, उनके लिए सभी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की। लेकिन अब सरकार इन पीडि़त आदिवासियों के लिए कुछ भी नहीं कर रही।

सवाल : माओवाद क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या है, इसे किस तरह देखती हैं?
जवाब : देखिये सरकार माओवाद मुक्त छत्तीसगढ़ की बात करती है। अगर माओवाद मुक्त हो गया तो इतने फोर्स की जरूरत क्यों पड़ रही।? क्यों रमन सिंह, मोदी जी जब छत्तीसगढ़ आते हैं तो और जगह की अपेक्षा यहां कई गुना अधिक फोर्स लगाये जाते हैं? सहीं मायने में सरकार चाहती ही नहीं इसे खत्म करना, माओवाद के नाम पर राज्य में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा ।

सवाल : शासन की योजनाएं क्या आदिवासियों तक पहुंच पाई?
जवाब : सरकार टिफिन बांट रही, मोबाइल बांट रही, लेकिन इससे आदिवासियों को कोई लाभ नहीं मिलने वाला। आदिवासियों को जल जमीन जंगल से जुडी बुनियादी सुख सुविधाओं की जरुरत है सरकार को पहले उस जरुरत को पूरा करना चाहिये ।

सवाल : तो इसका मतलब आप अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में लोगों के अपेक्षा के अनुरूप कार्य नहीं कर पाईं?
जवाब : जितना संभव हो सका, अपने क्षेत्र में विकास कार्य किया हैं, यह हमारे क्षेत्र की जनता भी स्वीकारती है। आने वाले समय में और ताउम्र मैं आदिवासियों की सेवा करती रहूंगी।

सवाल : अपने घर, जमीन को छोड़ शरणार्थियों की तरह रह रहे आदिवासियों के विस्थापन को लेकर क्या प्रयास रहेगा?
जवाब : आज सरकार की उपेक्षा की वजह से इनकी हालात दयनीय है। आगामी विधानसभा चुनाव में हमारी पार्टी जीती तो इन्हें पुन: इनके मूलग्राम में स्थापित
किया जाएगा ।

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Ashish Gupta
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