ट्रांसजेंडरों के लिए बनेंगे अलग टॉयलेट

Anupam Rajvaidya

Publish: Apr, 17 2018 10:18:11 PM (IST)

Raipur, Chhattisgarh, India
ट्रांसजेंडरों के लिए बनेंगे अलग टॉयलेट

सरकार दिव्यांगों और ट्रांसजेंडरों की आवश्यकता के अनुसार शौचालय बनाने की तैयारी कर रही है।

रायपुर . ट्रांसजेंडरों को अब लेडीज अथवा जेंट्स टॉयलेट का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। छत्तीसगढ़ में ट्रांसजेंडरों की आवश्यकताओं के अनुसार टॉयलेट बनाए जाएंगे।

छत्तीसगढ़ सरकार दिव्यांगों और ट्रांसजेंडरों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उनकी आवश्यकता के अनुसार प्रदेश में शौचालय बनाने की तैयारी कर रही है।

अलग टॉयलेट नहीं होने से दिक्कत
छत्तीसगढ़ में फिलहाल पुरुष और महिलाओं के लिए ही सार्वजनिक शौचालय बनाए जाते हैं। ऐसे में दिव्यांगजनों और ट्रांसजेंडरों को उनकी आवश्यकता के अनुसार टॉयलेट नहीं होने की वजह से काफी दिक्कत होती है। वहीं, ट्रांसजेंडरों को लेडीज अथवा जेंट्स टॉयलेट का इस्तेमाल करने की मजबूरी होती है। इन वर्गों को होने वाली असुविधाओं और परेशानियों को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार अब इनके लिए अलग शौचालय बनाने की तैयारी कर रही है।

टॉयलेट नीति बनाने पर वर्कशॉप
ट्रांसजेंडरों और दिव्यांगों के लिए अलग टॉयलेट के लिए छत्तीसगढ़ स्वच्छ भारत मिशन के संचालक भास्कर विलास संदीपन की अध्यक्षता में नया रायपुर के निमोरा स्थित राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास प्रशिक्षण संस्थान में कार्यशाला आयोजित की गई। छत्तीसगढ़ स्वच्छ भारत मिशन के इस वर्कशॉप में दिव्यांगजनों और ट्रांसजेंडरों के संदर्भ में विशेष प्रकार की टॉयलेट नीति बनाने पर विस्तार पूर्वक विचार-विमर्श किया गया। इन वर्गों के लिए टॉयलेट नीति लागू हो जाने से उन्हें दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

वर्कशॉप में हुआ विचार-विमर्श
निमोरा स्थित छत्तीसगढ़ पंचायत एवं ग्रामीण विकास प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित कार्यशाला में दिव्यांगों और ट्रांसजेंडरों की परेशानियों को समझते हुए इन वर्गों का टॉयलेट कैसा होना चाहिए। उसमें क्या-क्या सुविधाएं हो आदि के संबंध में विस्तार से चर्चा हुई।

तीन माह में तैयार होगी टॉयलेट नीति
स्वच्छ भारत मिशन की कार्यशाला में बताया गया कि आगामी दो-तीन माह के भीतर टॉयलेट नीति तैयार कर ली जाएगी। फिर इस टॉयलेट नीति को पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। कार्यशाला में दिव्यांगों और ट्रांसजेंडरों के प्रतिनिधियों ने उन्हें होने वाली परेशानियों से अवगत कराया। उन्होंने अपनी जरूरतों और सुविधाओं के संबंध में सुझाव भी दिए। कार्यशाला में यूनिसेफ सहित अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

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