पान सिंह तोमर के निर्देशक रायपुर में बोले- लीक से हटकर फिल्म बनाना ही मेरे लिए संघर्ष

चुनौतियों के सवाल पर बोले-22 की उम्र से पैरों पर खड़ा हूं, कम पैसे में ज्यादा काम की आदत

ताबीर हुसैन @ रायपुर। मैंने ऐसा कोई संघर्ष नहीं किया कि लोकल ट्रेन पर चला या वड़ा पाव खाकर दिन गुजारे। अगर आप रेगुलर बंबईया फिल्में बनाएंगे तो संघर्ष नहीं होगा बनिस्बत लीक से हटकर मूवी बनाने के। ये जरूर है कि मैं अभी आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा हूं। यह कहना है पान सिंह तोमर, बुलेट राजा और साहेब-बीवी गैंगस्टर के अलावा कई फिल्में कर चुके तिग्मांशु धूलिया का। वे संस्कृति विभाग के ऑडिटोरियम में चल रहे फिल्म फेस्ट के आखिरी दिन बतौर गेस्ट शामिल हुए। इस दौरान उनकी फिल्म रागदेश दिखाई गई। धूलिया ने फिल्म को लेकर कई अनसुनी बातें शेयर की।कार्यक्रम में डॉ सुभाष मिश्रा, रचना मिश्रा, डॉ अजय सहाय, विविध भारती के पूर्व एनाउंसर कमल शर्मा, परेश बागबाहरा, अनुराधा दुबे, गोपा सान्याल, पल्लवी शिल्पी, पुष्पेंद्र सिंह, डॉ लालवानी, मनीषा जैन, डॉ मनीष श्रीवास्तव समेत बड़ी संख्या में फिल्मप्रेमी व रंगकर्मी मौजूद थे।

70 दिन में बना दी 6 घंटे की फिल्म

नेताजी के जीवन पर आधारित फिल्म रागदेश को बनाने में 70 दिन लगे। फिल्म कांट छांटकर छोटी करनी पड़ी। फिल्म को रिलीज करने में बहुत चुनौतियों का सामना करना पड़ा। फिल्म की शूटिंग शुरू हुए हफ्ताभर ही गुजरा था कि नोटबंदी हो गई। इस दौरान छोटी-छोटी चीजों को लेकर कैश की प्रॉब्लम होने लगी। उन दिनों जितनी भी फिल्में शूट की जा रही थीं सभी यूनिट मुंबई लौट आई थी। लेकिन हमने तय किया कि शूट पूरी करके ही वापस जाएंगे। हालांकि मूवी की रिलीज को लेकर बहुत राजनीति हुई। रिलीज भी इस तरीके से कराई गई कि इसे कम से कम लोग ही देख पाएं।

नोटबंदी से हुई थी परेशान लेकिन नहीं हारी हिम्मत
धूलिया ने बताया कि मैंने 22 की उम्र में शादी की और तबसे घर चला रहा हूं। इसलिए मेरे लिए चुनौतियां कुछ खास मायने नहीं रखती। अपने जन्मदिन 3 जुलाई को मैंने इसकी शूटिंग शुरू की। देहरादुन में नवंबर के दौरान शूटिंग के दौरान नोटबंदी हो गई। हमें मुंबई लौटना और फिर जाना अफॉर्ड नहीं कर सकते थे। कम पैसे में ज्यादा काम मेरी आदत में शुमार। साहेब-बीवी और गैंगस्टर 28 की उम्र में बनाई। इसकी अगली सीरीज को 34 की एज में बनाई। इसलिए मुझे पता है कि कैसे काम होता है। डेढ़ साल की रिसर्च बनी पर बनी मूवीधूलिया ने बताया कि हमने इस फिल्म को बनाने के लिए डेढ़ साल रिसर्च की। रिसर्च में मेरे अलावा धर्मेंद्र, प्रमोद सिंह और शेराज मुखर्जी थे। सारी प्रक्रियाएं मिलाकर ढाई साल में मूवी तैयार हुई।

कोई नचनिया नहीं जो डॉयलाग सुनाएंगे
सवाल-जवाब का दौर चल रहा था तभी किसी ने धूलिया से डॉयलाग सुनाने की रिक्वेस्ट कर दी। इस आयोजकों की ओर से साफ मना कर दिया गया कि इस कार्यक्रम को हल्का मत बनाएं। धूलिया जी कोई नचनिया नहीं कि कोई कहे और डायलॉग सुना दें।

पान सिंह तोमर के निर्देशक रायपुर में बोले- लीक से हटकर फिल्म बनाना ही मेरे लिए संघर्ष

रायपुर की प्रवीणा छोटे व बड़े पर्दे पर छाईं

कार्यक्रम में एक्ट्रेस प्रवीणा देशपांडे भी आईं थीं। इन दिनों उनकी फिल्म हैक्ड रिलीज हुई है। इसमें वे ग्रैंड मदर बनी हैं। प्रवीणा चौबे कॉलोनी की रहने वाली हैं। वे रायपुर में पली बढ़ीं और शादी के बाद मुंबई शिफ्ट हुईं। उन्होंने अब तक 150 से ज्यादा एड फिल्में, कई सीरियल और फिल्में कर चुकी हैं। उन्होंने बताया, कॉलेज के दौरान महाराष्ट्र मंडल ने एक प्ले किया था थैंक्यू मिस्टर ग्लार्ड। पूरे एमपी में मुझे बेस्ट एक्ट्रेस का फस्र्ट प्राइज मिला। यहीं से मुझे लगा कि कुछ तो है मुझमें। मुंबई में सबसे पहले हिप-हिप हुर्रे के लिए ऑडिशन दिया और रोल मिल गया। दूरदर्शन के बंधन में भी काम मिला। इसके 250 से ज्यादा एपिसोड किए। लगभग 20 सीरियल कर चुकी हूं। इन दिनों मूवी कर रही हूं। रेड्डी, एक विलेन और हैक्ड की।

जिम्मेदारियों से न भागें

प्रवीणा ने बताया कि जब बच्चे छोटे थे तब मैंने ब्रेक लिया था। क्योंकि यह बड़ी जिम्मेदारी है। जो महिलाएं शादी के बाद कॅरियर ग्रो करने का सोचती हैं उनके लिए मेरा कहना है कि पहली प्रायोरिटी फैमिली होनी चाहिए। खासतौर अगर बच्चे 15 साल से कम के हों तो उनकी केयर जरूरी है।

रायपुर की यादें

प्रवीणा कहती हैं कि रायपुर के यादें तो हमेशा साथ रहती हैं। शादी से पहले की दुनिया तो रायपुर ही है। यहां की कनेक्टिविटी और मन का निश्छलपन और लोगों की सौम्यता हमेशा याद आती हैं। रायपुर के लोग हमेशा तकलीफों में काम आने वाले हैं।

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Tabir Hussain Incharge
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