कलेक्टरों को ही मिला डीएमएफ फंड का जिम्मा, सांसदों की होगी एंट्री

- केंद्र के हस्तक्षेप के बाद राज्य सरकार ने बदला अपना बनाया नियम
- अभी तक प्रभारी मंत्रियों के हाथ में थी जिम्मेदारी

By: Bhupesh Tripathi

Published: 07 Sep 2021, 12:44 AM IST

रायपुर. डीएमएफ फंड के सदस्यों को लेकर केंद्र की आपत्ति के बाद राज्य सरकार ने अपनी ओर से बनाए नियम में बदलाव कर दिया है। अब कलेक्टर ही डीएमएफ फंड के अध्यक्ष होंगे।

प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रभारी मंत्रियों को डीएमएफ फंड का अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं अब प्रदेश के सभी सांसदों की डीएमएफ फंड में एंट्री होंगी। उन्होंने इसका सदस्य बनाया जाएगा। सांसदों के संसदीय क्षेत्र में जितने जिले आएंगे, वे हर जिले में सदस्य रहेंगे। इसके अलावा राज्यसभा के सदस्य किसी एक जिले में ही डीएमएफ फंड के सदस्य बना सकेंगे। नए नियम की अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित हो गई है।

दरअसल, भाजपा सरकार के समय कलेक्टर ही डीएमएफ फंड के मुखिया होते थे। उनकी देखरेख में कुछ अच्छे काम हुए, तो कुछ कामों को लेकर कई शिकायतें भी सामने आईं। वर्ष 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी तो उन्होंने नियमों में बदलाव किया और डीएमएफ फंड का जिम्मा जिलों के प्रभारी मंत्रियों के हाथ में सौंप दिया। वहीं कई स्थानों पर भाजपा सांसदों को डीएमएफ फंड का सदस्य नहीं बनाया। इसे लेकर टकराव की स्थिति भी निर्मित हो गई है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल स्वयं नहीं चाहते थे कि कलेक्टरों को अध्यक्ष बनाया जाए। इसके लिए उन्होंने 2 जून को कोयला एवं खान मंत्री प्रहलाद जोशी को पत्र भी लिखा था, लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आग्रह के बाद केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि डीएमएफ फंड का अध्यक्ष प्रभारी मंत्री को नहीं बनाया जा सकता। कलेक्टर ही इसके मुखिया रहेंगे। साथ ही केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री प्रहलाद जोशी ने मुख्यमंत्री बघेल को पत्र लिखकर पुरानी व्यवस्था लागू करने को कहा था। इसके बाद राज्य सरकार को अपने नियम बदलने पड़े।

Bhupesh Tripathi
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