scriptDiwali Panch Maha Yog, Mahalakshmi worship in Preeti and Ayushman Yog | पंच महायोग में आज दीपों से जगमग होंगे घर-आंगन, प्रीति और आयुष्मान योग में महालक्ष्मी पूजन | Patrika News

पंच महायोग में आज दीपों से जगमग होंगे घर-आंगन, प्रीति और आयुष्मान योग में महालक्ष्मी पूजन

Diwali Puja Panch Maha Yog: गुरुवार दिन से बढ़ा दोगुना महत्व, धान की बालियां, तोरण और केला पेड़ से सजेगा वंदन द्वार, शहर में पहुंची खेप.

रायपुर

Published: November 04, 2021 10:49:59 am

Diwali Puja Panch Maha Yog: रायपुर. हर देवी-देवताओं के पूजन का विशेष दिन होता है। महालक्ष्मी पूजन का दिन गुरुवार है। इस बार इसी संयोग में गुरुवार को प्रीति और आयुष्मान योग में ( Mahalakshmi worship in Preeti and Ayushman Yog) महालक्ष्मी का पूजन होगा। अर्थात दीपोत्सव पंच महायोग में मनेगा। घर-आंगन जगमग होंगे। महालक्ष्मी के स्वागत-वंदन में द्वार-द्वार रंगोली और धान की बालियों की झालर, तोरण और जिस केला पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है, वह दरबाजे के दोनों तरफ सजेगा। शहर के अनेक जगहों पर देर रात ग्रामीण अंचलों से खेप पहुंच गई हैं।

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प्रीति और आयुष्मान योग में महालक्ष्मी पूजन

ज्योतिषियों की मानें तो दिवाली के दिन सभी दिशाएं शुभ मुहूर्त के लिए खुल जाती हैं। इस बार चतुग्र्रही योग बन रहा है। जो बहुत ही फलदायी है। इसलिए कई परिवारों में मांगलिक कार्यक्रम भी होते हैं। दिवाली पर्व समाज के लोग अपने-अपने रीति-रिवाज परंपरा से मनाते हैं। दीपोत्सव की खुशियों में हर मोहल्ले और कॉलोनियां रंगीन रोशनी से शाम होते ही जगमगा रही हैं। महालक्ष्मी पूजन के लिए बुधवार को दिनभर लोग तैयारियों में जुटे रहे। बाजार धनतेरस जैसा ही गुलजार रहा है।

मठ-मंदिर हजारों दीपों से रोशन होंगे
प्राचीन दूधाधारी मठ में भगवान श्रीराम का स्वर्ण आभूषण से अभिषेक होगा और महाआरती होगी। हजारों दीपों से मठ जगमगम होगा। इसी तरह शहर के श्रीराम मंदिरों सहित वीआईपी रोड राममंदिर में विशेष तैयारी दीपोत्सव के लिए की गई है। यहां पूरा परिसर दीपमालाओं से सजा हुआ नजर आएगा। दर्शन करने के लिए भक्तों का तांता लगेगा।

दीप दान, यम के नाम जले पांच दीपक
एक दिन पहले बुधवार को नरक चतुर्दशी मनाई गई। जिसे रूप चौदस भी कहा जाता है। इस दिन माताएं-बहनें महालक्ष्मी पूजन के लिए उबटन लगाकर रूप निखारती हैं। शाम के पहर घर के कोने-कोने में 14 दीप कोने-कोने में जगमग करने के साथ ही पांच दीपक दक्षिण दिशा की ओर यमराज के नाम रखकर सुख-शांति की कामना की।

कल गोवर्धन पूजा
दिवाली के दूसरे दिन 5 नवंबर को गोवर्धन पूजा मठ-मंदिरों, गोठानों में गोवर्धन पूजा का उल्लास रहेगा। इस अवसर पर राउतनाचा का रोमांच में शहर में देखने को मिलता है। 6 नवंबर को भाईदूज और कायस्थ समाज अपने ईष्टदेवता चित्रगुप्त भगवान की जयंती मनाएगा।

हर समाज में दिवाली पर क्या, जानिए इन 12 महत्व के बिंदु

- दिवाली से एक दिन पहले भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया तो गोकुल वासियों ने दीप जलाकर खुशियां मनाई थी। जिसे नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है।

- भगवान श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद जब अयोध्या लौटे तो दीपमालाओं से स्वागत हुआ था। इसी दिन धर्मराज युधिष्ठिर ने राजसुय यज्ञ किया, तब दीपमाला की गई थी।

- सम्राट अशोक का दिग्विजय अभियान इसी दिन आरंभ करने के अवसर पर दीपदान किया गया था।-सम्राट विक्रमादित्य का राजतिलक इसी दिन हुआ था इसलिए दीप जलाकर खुशियां मनाई गई थी।

- जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी को इसी दिन निर्वाण प्राप्त हुआ था। मोक्ष पर जाने से पहले महावीर स्वामी ने आधी रात को आखिरी बार उपदेश दिया था। मोक्ष के बाद जैन धर्मावलम्बियों ने दीपक जलाकर रोशनी की थी।

- सिख धर्म के छठवें गुरु हरगोविंद सिंह अपने 52 राजाओं को मुगल शासक जहांगीर की कैद ग्वालियर किले से छुड़ाकर हरमंदर साहिब अमृतसर पहुंचे थे। इसी दिन स्वर्ण मंदिर का शिलान्यास भी हुआ था । इस ख़ुशी में सिख समाज ने दीप मालाएं बनाई थीं।

- आइने अकबरी के अनुसार सम्राट अकबर दीपावली के दिन दौलत खाने के सामने सबसे ऊंचे स्तम्भ पर बड़ा सा आकाश दीप लटकाते थे।

- शाह आलम द्वितीय के शासनकाल में जश्न-ए-चिराग का त्योहार इतने व्यापक पैमाने पर मनाया जाता था कि तेल कम पड़ जाता था। पूरा महल दीपों से रोशन किया जाता था।-सम्राट जहांगीर व बहादुर शाह जफर भी दिवाली धूमधाम से मनाते थे।

- बौद्ध धर्म के प्रवर्तक भगवान गौतम बुद्ध के स्वागत में उनके अनुयायियों ने इस दिन लाखों दीपक जलाए थे। आज भी बौद्ध इसी दिन अपने स्तूपों पर दीप जलाते हैं।

- आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद ने दिवाली के दिन ही शरीर को त्याग कर निर्वाण पाया था तब से इनके अनुयायी भी इस दिन दीप जलाते हैं।

- वेदांत के प्रचारक स्वामी रामतीर्थ इसी दिन धरा पर अवतरित हुए थे और इसी दिन शरीर का त्याग भी किए थे।जैसा कि प्राचीन महामाया मंदिर के पंडित मनोज शुक्ल ने बताया

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