मेडिकल छात्रों से अवैध वसूली: दो सप्ताह में निराकरण का आदेश, दो साल बाद आया डीएमई का विवादित आदेश

जिससे छात्र परेशान होकर अब उच्च न्यायालय की शरण लेने की तैयारी कर रहे हैं। इस संबंध में पत्रिका ने रिम्स प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की और पूरा प्रकरण प्रबंधक के व्हाटसअप भी किया। उन्होंने पूरा मामले देखने के बाद भी कोई जवाब देना उचित नहीं समझा।

By: Karunakant Chaubey

Published: 22 Nov 2020, 03:23 PM IST

रायपुर. निजी मेडिकल कॉलेजो द्वारा अवैध कैपिटेशन फीस क्लीनिकल यातायात के नाम से हो रही वसूली को लेकर डीएमई भी गंभीर नहीं है। रिम्स मेडिक कॉलेज द्वारा ली जा रही फीस के विरोध में छात्रों नें अक्टूबर 2018 में शिकायत की थी। जिस पर एएफआरसी नें डीएमई को पत्र लिख कर दो सप्ताह के भीतर मामले का निराकरण करने को कहा था।

इसके बाद भी डीएमई नें मामलें में गंभीरता नहीं दिखाई। बार-बार पत्राचार के बाद तत्कलीक डीएमई नें डेढ साल बाद 5 मई 2020 को एएफआरसी के अध्यक्ष को पत्र लिख कर 55 हजार की जगह पर 40 हजार भ्रमण शुल्क लेने को प्रस्तावित किया था। पत्र में सिर्फ प्रस्ताव लिखने के बाद भी कॉलेज प्रबंधन ने सभी छात्रों से वसूली शुरु कर दी है।

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जिससे छात्र परेशान होकर अब उच्च न्यायालय की शरण लेने की तैयारी कर रहे हैं। इस संबंध में पत्रिका ने रिम्स प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की और पूरा प्रकरण प्रबंधक के व्हाटसअप भी किया। उन्होंने पूरा मामले देखने के बाद भी कोई जवाब देना उचित नहीं समझा।

एएफआरसी के आदेश का उल्लंघन

चिकित्सा संचनालय और फीस विनियामक समिति के आंखो के सामने नियम विरुद्ध वसूली हो रही है। प्रति छात्र 55000 रूपए प्रतिवर्ष पूरे एमबीबीएस 4.5 वर्ष में प्रति छात्र 2.50 लाख सभी निजी मेडिकल कॉलजों में 150 छात्र प्रति वर्ष प्रवेश लेते है। अत: प्रति कॉलेज 3.75 करोड़ रुपए अवैध शुल्क वसूला जा रहा है। प्रवेश एवम फीस विनियामक समिति द्वारा दिनांक 28/09/2016 में फीस के नियम कानून बनाए गए जिसमें कॉलेजों द्वारा छात्रों से अधिकतम फीस कितना लिया जाना है।

यह निर्धारित किया गया शुल्क

- 1. 443300 ट्यूशन व अन्य सभी शुल्क स्पोट्र्स,जिम,वार्षिकोत्सव, शैक्षाणिक भ्रमण यातायात

- 2.53196 ग्रोथ व डेवलपमेंट।
- 3.14000 इन्सेंटिव।

- कुल 510500 रिम्स मेडिकल कालेज हेतु एएफआरसी द्वारा निर्धारित
2016/17/18 बैच हेतु तय किया गया था।

पैत्रिक राज्य का हलावा, लेकिन यहां भी फेल

एफआरसी के नियमो का उल्लघंन कर अवैध वसूली कॉलेज कर रहे हैं जिसमें डीएमई भी कार्रवाही नहीं कर रहे है। कॉलेज व डीएमई का कहना है 55000 प्रतिवर्ष क्लीनिकल यातायात कम्युनिटी मेडिसिन जो तृतीय वर्ष एमबीबीएस का विषय है में छात्रों को अन्य जगहों जैसे पीएचसी,सीएचसी ऐसे 40 स्थानों में शैक्षणिक भ्रमण जो 20-25 किलोमीटर में है में छात्रों को लाने ले जाने हेतु लिया जा रहा है।

किन्तु शैक्षणिक भ्रमण यातायात पहले से ही 5,10,500 फीस में शामिल है। जब फीस निर्धारित किया गया तो पैतृक राज्य मध्यप्रदेश के फीस के आधार पर रखा गया। मध्य्रदेश में प्रतिदिन छात्रों को घर से 20-25 किलोमीटर लाने ले जाने की अधिकतम राशि वहा की एएफआरसी द्वारा 12000 प्रति वर्ष निर्धारित है।

मामले की शिकायत और दस्तावेज मिले हैं। वर्तमान डीएमई से मामले की जांच के लिए कहा गया है। छात्रों का अहित नहीं होने दिया जाएगा।

-टीएस सिंह देव, मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग

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Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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