एयरपोर्ट के स्क्रीनिंग टेस्ट में इस वजह से बच निकलते थे कोरोना से संक्रमित यात्री, डाक्टरों ने बताई वजह

ग़ौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में कोरोना की पहली रोगी बिना किसी लक्षण के भर्ती की गयी थी। हवाई अड्डों पर थर्मल सेंसर के माध्यम से कोरोना के रोगियों की स्क्रीनिंग की गयी थी।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जैसे जैसे कोरोना के नए मामले बढ़ते जा रहे हैं यह सवाल बार बार रहा है कि जिन लोगों में यह पाजितिव आया है उन लोगों का पता हवाई अड्डों के स्क्रीनिंग में क्यों नही चल सका? ताज़ा घटनाक्रम में पता चला है कि हाल के दिनों में विदेश यात्रा से लौटे कई लोगों ने बुखार को कम करने के लिए पैरासिटामोल या फिर एसीटामेनोफेन की दवाएँ ले रखी थी जिससे उनका बुखार स्क्रीनिंग से पहले ही उतर गया और वो साफ़ बचते हुए हवाई अड्डे से बाहर निकल आए।

यह भी ग़ौरतलब है कि कोरोना का संक्रमण जब होता है तो शुरुआत में बुखार या सर्दी ज़ुकाम जैसे लक्षण नही होते हैं जिसकी वजह से स्क्रीनिंग में या फिर क्लिनिकल टेस्टिंग में उसका पता लगाना मुश्किल होता है । ग़ौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में कोरोना की पहली रोगी बिना किसी लक्षण के भर्ती की गयी थी। हवाई अड्डों पर थर्मल सेंसर के माध्यम से कोरोना के रोगियों की स्क्रीनिंग की गयी थी।विशेषज्ञों का मानना है कि की रोगी ऐसे भी हो सकते हैं जिनके शरीर में वायरस का इंक्यूबेशन पीरियड शुरू न हुआ हो और उन्होंने अपनी यात्रा पूरी कर ली हो।

भारी संख्या में विदेशों से छत्तीसगढ़ आए छात्र

यह बात कबीलेगौर है कि चीन, यूके, किर्गिस्तान, रूस और सिंगापुर में छत्तीसगढ़ के छात्र भारी संख्या में मेडिकल, प्रबंधन की पढ़ाई करने जाते हैं पिछले वर्ष दिसम्बर माह में जैसे ही चीन के वूहान में कोरोना का संक्रमण शुरू हुआ चीन में मौजूद छात्रों ने वहाँ से निकलना शुरू कर दिया उस वक़्त देश में स्क्रीनिंग की भी कोई व्यवस्था नही थी ।

लेकिन मार्च की शुरुआत में जब कोरोना विश्वव्यापी संकट बन गया तब केवल चीन ही नही दुनिया के अलग अलग हिस्सों में रह रहे छात्रों और अन्य सेवा से जुड़े लोग छत्तीसगढ़ वापस लौटने लगे ठीक उसी वक़्त हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। चूँकि रूस और क्रिगिस्तान में घातक स्तर के संक्रमण की कोई ख़बर नही है इसलिए वहाँ से कम लोग आए।

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ राकेश गुप्ता कहते हैं अगर जनवरी माह से ही विदेश से लौटकर आए हर व्यक्ति को 14 दिनो को होम आइशोलेशन में रखा जाता तो निस्सन्देह केवल छत्तीसगढ़ में ही नही पूरे देश में ख़तरा कम होता। डॉ सुनील कहते हैं कि कोरोना से संक्रमित व्यक्ति बिना ज़्यादा बीमार पड़े ख़ुद ठीक हो सकता है लेकिन अगर वो दो दूसरों को संक्रमित कर दे तो ज़रूरी नही कि उस व्यक्ति में भी लक्षण कमज़ोर हों ।

भीड़ में खो गए रोगी

छत्तीसगढ़ में आज भी 17 लोग ऐसे हैं जिनके हाथ पर होम आइसोलेशन में रहने की मोहर लगी हुई है लेकिन वो लोग लापता है। तमाम कोशिशों के बावजूद उनका पता नही चल सका है। भारत ने दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए जो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर तैयार किया था उसमें था कि जो भी कोरोना के संक्रमित मिलेंगे या संदेहास्पद मिलेंगे उन्हें क्वारंटीन किया जाएगा और रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही छोड़े जाएंगे।

लेकिन जिन यात्रियों ने बुखार की दवाए खा रखी थी या फिर जिनका संक्रमण ताज़ा था वो सभी के सभी बचे गए । और नतीजतन हवाई अड्डे की जांच में पास हो गए।यह लोग हवाई अड्डे से सीधे अपने घर या अपने इलाके में चले गए । अब स्वास्थ्य विभाग की चिंता है कि इन लोगों ने और लोगों को संक्रमित न कर दिया हो।

एक बड़ी गड़बड़ी एविएशन मिनिस्ट्री की ओर से हुई जो यात्री विदेशों से आए उनकी जानकारी सम्बंधित राज्यों को नही दी गयी अगर ऐसा कर दिया जाता तो संक्रमण का ख़तरा और कम हो जाता।
डा राकेश गुप्ता

अध्यक्ष
हास्पिटल बोर्ड

थर्मल सेंसर या फिर किसी भी थर्मामीटर से अगर हम बुखार की दवा खाकर तापमान लेंगे तो निस्सन्देह तापमान ठीक आएगा।

डॉ आर परवीन
एसोसियेट प्रोफ़ेसर

जे एल एन मेडिकल कालेज

COVID-19
Karunakant Chaubey Desk/Reporting
और पढ़े

MP/CG लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned