6 महीने से असहनीय दर्द से तड़प रहा था युवक, सर्जरी में किडनी से निकले आधा किलो के 300 स्टोन

डीकेएस के उप-अधीक्षक डॉ. हेमंत शर्मा का दावा है कि संभवत: प्रदेश का यह पहला मामला है, जो युवक की किडनी से करीब आधे किलो स्टोन निकला है। प्रदेश के जमहर (भीटाडीह) निवासी युवक अब स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुका है। सर्जरी करने वाले डॉ. सुरेश सिंह ने बताया कि जब युवक अस्पताल आया तो वह दर्द से तड़प रहा था।

By: Karunakant Chaubey

Published: 24 Jul 2020, 11:55 PM IST

अभिषेक राय@रायपुर. एक 30 वर्षीय युवक विगत 6 माह से असहनीय दर्द से जुझ रहा था। उसने मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र समेत राजधानी रायपुर के कई निजी अस्पतालों में इलाज कराया लेकिन दर्द से छुटकारा नही मिला। सभी तरफ से निराश होकर युवक 26 जून को दाऊकल्याण सिंह सुपरस्पेशलिटी (डीकेएस) अस्पताल पहुंचा। यहां के डॉक्टरों ने चीर-फाड़ किए बिना न सिर्फ दर्द से छुटकारा दिलाया बल्कि किडनी डैमेज होने से भी बचा लिया। 3 घंटे चली सर्जरी के दौरान युवक की दायीं तरफ की किडनी से करीब 300 छोटे-छोटे स्टोन निकाले गए।

डीकेएस के उप-अधीक्षक डॉ. हेमंत शर्मा का दावा है कि संभवत: प्रदेश का यह पहला मामला है, जो युवक की किडनी से करीब आधे किलो स्टोन निकला है। प्रदेश के जमहर (भीटाडीह) निवासी युवक अब स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुका है। सर्जरी करने वाले डॉ. सुरेश सिंह ने बताया कि जब युवक अस्पताल आया तो वह दर्द से तड़प रहा था। उसके परिजनों ने बताया कि निजी अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि तीन चरणों में ओपन सर्जरी करनी पड़ेगी। इस दौरान किडनी डैमेज होने से भी इनकार नही किया जा सकता है।

ढाई से तीन लाख रुपए का खर्च आ सकता है। निजी डॉक्टरों की बात सुनकर परिजन सहम गए। वह आर्थिक रूप से इतने मजबूत नही थे कि उतनी राशि वहन कर सके। चारोंतरफ से निराश होकर वह डीकेएस अस्पताल आ गए। डॉ. सुरेश सिंह ने बताया कि युवक का जब एक्स-रे व अन्य जांचें कराई गई तो पाया गया कि दायीं किडनी के चारों तरफ स्टोन चिपके हुए थे। परिजनों को जब इसकी जानकारी दी गई तो वह ऑपरेशन कराने से मना करने लगे।

परिजनों को काफी समझाईश के बाद यह बताया गया कि बिना चीर-फाड़ के लेप्रोस्कोपी (दूरबीन पद्धति) के माध्यम से सिर्फ एक बार की सर्जरी में ही दर्द से छुटकारा मिल जाएगा, तब वह तैयार हुए। जुलाई के पहले सप्ताह में सर्जरी की गई। इस दौरान करीब 300 स्टोन निकाले गए। युवक को करीब एक सप्ताह अस्पताल में रखने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। युवक को ले जाते समय परिजनों के आंखों से आंसू छलक आए थे। उन्होंने कहा कि बेटे को नया जीवन मिला है।

ऑपरेशन नही तो बन जाता मवाद

डॉ. सुरेश सिंह ने बताया कि स्टोन की वजह से युवक की किडनी में मवाद बनने लगा था। सर्जरी में यदि और थोड़ा सा बिलंब किया गया होता तो इंफेक्शन फैला जाता और पूरी किडनी निकालनी पड़ जाती। इतने सारे स्टोन देखकर सर्जरी से पहले वह भी सहम गए थे लेकिन हिम्मत नही हारी। उन्होंने बताया कि इतने सारे स्टोन को दवा से समाप्त करना संभव नही था। युवक इतने दिन दर्द कैसे सहता रहा, यह कह पाना मुश्किल है।

डीकेएस अस्पताल में युवक को एक रुपए भी खर्च नही करने पड़े। उसका इलाज आयुष्मान योजना के तहत किया गया। उन्होंने बताया कुछ केस रेयर होते हैं लेकिन यह रेयर तो रेयर था। वह जब से डॉक्टर के प्रोफेशन में आए हैं, ऐसा ऑपरेशन न तो किया था और न ही देखा था। उन्होंने अब तक जितनी भी सर्जरी किया है उन सब से यह कठिन था।

सिर्फ 3 जगह लगाना पड़ा चीरा

डॉ. सुरेश सिंह ने बताया कि ओपन सर्जरी के दौरान पूरे शरीर को खोलने के बाद किडनी से स्टोन निकाला जाता। लेप्रोस्कोपी से सर्जरी करने के लिए शरीर पर सिर्फ तीन चीरा लगाया गया और सारे स्टोन को एक-एक करके बाहर निकाल लिया गया। ओपन सर्जरी के दौरान इंफेक्शन फैलने का भी डर रहता है।

सुपरस्पेशलिटी अस्पताल होने के नाते यहां पर एडवांस तकनीक से मरीजों का इलाज किया जाता है। युवक की किडनी से करीब ३०० स्टोन निकाले गए। सभवत: प्रदेश में यह पहला मामला होगा, जो इतनी भारी मात्रा में स्टोन निकाला गया हो। सर्जरी से पहले युवका का कोरोना जांच कराई गई थी।

-डॉ. हेमंत शर्मा, उप अधीक्षक, डीकेएस अस्पताल, रायपुर

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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