नकली दवा बेचने का खुलासा हुआ तो रद्द कर दिया ड्रग लाइसेंस, सचिव से अधिकारियों की कर दी शिकायत

- नकली दवा का रैकेट, 20 लाखकी जब्त दवाएं लेबोरेटरी टेस्ट में हो गईं थी फेल
- नकली दावा करोबारी की सीनाजोरी

By: Bhupesh Tripathi

Updated: 25 Jun 2020, 10:46 AM IST

रायपुर। नकली दवा के चल रहे कारोबार के आरोपी द्वारा कार्रवाई से बचने के नए-नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। लेबोरेटरी टेस्ट में पूरी दवाएं नकली होने की पुष्टि होने के बाद औषधि विभाग ने अरोपी का ड्रग लाइसेंस रद्द कर दिया था। इसके आरोपी ने इसकी शिकायत स्वास्थ्य सचिव से करके लाइसेंस पुन: बहाल करने की मांग की है। यह जानकारी खुद हमें अस्टिेंड ड्रग कंट्रोल बीआर साहू ने दी। बतादें की प्रदेश का पहला नकली दवा करोबार का मामला उजागर हुआ।

नकली दवा करोबारी शिशुपाल मंधानी को फरार बताया जा रहा है। देवपुरी में नकली दवाओं का रैकेट फूटे चार माह पूरे हो हुए चुके हैं। इसके बाद भी अब केस न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया। विभाग ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की मदद तक नहीं ली। आरोपी की गिरफत में आने के बाद और भी राज खुल सकते हैं। मामले में अब भी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक माह का समय और लग सकता है।

सिर्फ गोदाम की दवाएं जब्त
बतादें कि 24 फरवरी को देवपुरी स्थित गौतम मेडिसिन सेंटर में छापा मारकर 20 लाख की एंटीबायोटिक दवा जब्त की थी। लेकिन कितनी दवाएं प्रदेश के किन-किन दवा दुकानों सप्लाई की जा चुकी थी इसकी जानकारी विभाग को नहीं मिल पाई। छापामार कार्रवाई में भी विभाग ने स्टॉक रजिस्टर की जब्ती नहीं बनाई थी। जिससे वास्तविक स्टॉक का पता नहीं चल पाया।

तीन दवाओं की जांच, तीनों निकली नकली
दवा दुकान के गोदाम से ड्रग विभाग की टीम ने तीन प्रकार की एंटीबायोटिक टेबलेट के सैंपल लिए थे। इनमें इजिथ्रोमाइसिन, सिटीग्जिम व एमोक्सिलिन टेबलेट शामिल हैं। जांच में पता चला कि दवाओं में एंटीबायोटिक का एक भी तत्व नहीं मिले थे।

बिना जांच के ही प्रदेश भर के मेडिकल स्टोर में हो जती है सप्लाई
प्रदेश में मेडिकल स्टोर या गोदाम से बिक रही दवाओं की जांच का कोई सिस्टम नहीं है। दवा उत्पाद

कंपनी की लैब रिपोर्ट पर ही विश्वास किया जा रहा है। बिना जांचे ही प्रदेश के अलग-अलग मेडिकल स्टोर के माध्यम से बेंची जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी दवाओं के उपयोग से कोई मरीज ठीक नहीं हो सकता, उल्टा उनकी बीमारी बढ़ जाएगी। इसके साइड इफेक्ट किसी भी खतरनाक रूप में सामने आ सकते हैं।

हमे चलान पेश करने में अभी एक माह समय लगेगा। मैंने लैब रिपोर्ट में नकली दवा की पुष्टी होने के बाद अरोपी के फर्म का लाइसेंस रद्द कर दिया तो उसने स्वास्थ सचिव से शिकायत कर दी है। की गलत तरीके से लाइसेंस रद्द किया गया है।
बेनी राम साहू, अस्टिेंट ड्रग कंट्रोलर, रायपुर

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Bhupesh Tripathi
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