कोरोनाकाल में अवसाद और नींद नहीं आने की बढ़ी समस्या, अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये उपाय

कोरोना की दूसरी लहर (Second wave of coronavirus) अब धीरे-धीरे अवसान की तरफ है, लेकिन लोगों में चिंता, घबराहट और नींद की समस्या बढ़ रही है।

By: Ashish Gupta

Published: 11 Jun 2021, 11:51 AM IST

रायपुर. कोरोना की दूसरी लहर (Second wave of coronavirus) अब धीरे-धीरे अवसान की तरफ है, लेकिन लोगों में चिंता, घबराहट और नींद की समस्या बढ़ रही है। दूसरी लहर की भयावहता को देखकर लोगों के मन में ज्यादा भय समा गया गया है, जिसकी वजह से मानसिक समस्याएं उत्पन्न हो रही है। नींद न आना भी एक मानसिक समस्या है। जिला अस्पताल में संचालित स्पर्श क्लीनिक की ओपीडी में मनोचिकित्सकों से परामर्श लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

विगत दो माह में अवसाद के 36, चिंता व घबराहट के 48 और नींद नहीं आने की शिकायत को लेकर 15 लोग परामर्श के लिए पहुंचे हैं। स्पर्श क्लीनिक में अप्रैल में अवसाद के 22, चिंता व घबराहट के 13 और नींद नही आने के 5 तथा मई में अवसाद के 14, चिंता-घबराहट के 35 और नींद नहीं आने की समस्या को लेकर 10 लोग ओपीडी में पहुंचे थे। जून में अब तक 145 मरीज ओपीडी में पहुंचे चुके हैं, जिसमें 25 फीसदी अवसाद व नींद नहीं आने वाली समस्या के शामिल हैं।

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विशेषज्ञों का कहना है कि नींद का अत्यधिक कम या ज्यादा होना शरीर पर बुरा प्रभाव डालता है और सामान्य रूप से इससे बचना चाहिए। छुट्टियों के दिन भी उठने और सोने का समय नियमित रूप से बाकी दिन जैसा ही होना चाहिए। नशीले पदार्थों का सेवन, मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग, ज़रूरत से ज्यादा भोजन तथा चाय- कॉफी का अत्यधिक सेवन भी नींद पर बुरा प्रभाव डालता है।

उम्र के मुताबिक लेनी चाहिए नींद
हर व्यक्ति को अपनी उम्र के अनुसार नींद लेनी चाहिए। एक से 3 माह के शिशु 17 से 19 घंटे सोते हैं। इससे कम होना चिंता का विषय हैं। 1 से 2 साल के बच्चों को 11 से 14 घंटे, 3 से 5 साल के बच्चों को 10 से 13 घंटे, 6 से 13 साल के बच्चे को 9 से 11 घंटे, किशोरावस्था में 8 से 10 घंटे, 18 से 25 साल के उम्र वाले को 7 से 9 घंटे तथा 25 से 65 साल के व्यक्ति को 7 से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए।

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रायपुर जिला अस्पताल स्पर्श क्लीनिक मनोचिकित्सक के डॉ. अविनाश शुक्ला ने कहा, अवसाद और नींद नही आने की समस्या को लेकर ओपीडी में ज्यादा लोग पहुंच रहे हैं। कोविड से पहले इनकी संख्या काफी कम रहती थी। यदि लोग मानसिक परेशानी से जुझ रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही कोई दवा शुरू करें। बहुत से लोग बिना सलाह के नींद की दवाएं लेने लगते हैं, जो नुकसानदायक हो सकता है।

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