इन तीन तरह से हर दिन भुट्टा खाइए, सर्दी-खांसी कोसों दूर रहेगी

ज्यादातर लोगों को पॉपकॉर्न खाना पसंद होता है और भुट्टा भी हम सभी की चॉइस है। लेकिन जो लोग कॉर्न को अपनी डायट का हिस्सा बना लेते हैं, उन्हें बुढ़ापे में भी चश्मा लगाना नहीं पड़ता और मोतियाबिंद के ऑपरेशन की नौबत भी नहीं आती है...

By: lalit sahu

Published: 17 Oct 2020, 07:22 PM IST

सर्दियां आने को हैं और हम सभी भुट्टा खाने का लुत्फ लेना चाहते हैं। कई लोगों को लगता है कि भुट्टा केवल फुर्सत के समय में बैठकर दोस्तों के साथ इंजॉय करने वाला एक फास्ट फूड है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। आप चाहे पॉपकॉर्न के रूप में खाइए, स्वीट कॉर्न के रूप में खाइए या फिर भुट्टे के रूप में, यह हमेशा आपके शरीर में फाइबर्स और मिनरल्स की कमी को दूर करता है...

अगर आपको भी मक्का यानी कॉर्न के बारे में यह गलतफहमी है कि यह प्रॉसेस्ड फूड होता है तो आप इस बात को दिमाग से निकाल दें। क्योंकि मक्का एक साबुत अनाज होता है, जो बहुत ही ताकतवर होता है और शरीर को पुष्ट (हेल्दी) बनाने का काम करता है।

भुट्टे में पाए जाते हैं ये गुण
आयुर्वेद के अनुसार, भुट्टा बल वर्धक होने के साथ ही शरीर में पित्त और कफ की मात्रा को नियंत्रित करने का कार्य करता है। इसलिए बरसात और सर्दियों के मौसम में भुट्टा जरूर खाना चाहिए।
फाइबर से भरपूर होने के साथ ही भुट्टा ऐंटिऑक्सीडेंट्स और विटमिन-सी युक्त होता है। इस कारण यह शरीर की आंतरिक सफाई करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का कार्य करता है।

खांसी-जुकाम से बचने के लिए
जैसा कि हमने आपको बताया कि भुट्टा ऐंटिऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है और कफ तथा पित्त को नियंत्रित करता है। इसलिए यह खांसी और जुकाम जैसी मौसमी बीमारियों से बचाने में बहुत अधिक लाभकारी होता है।

जिन्हें भूख कम लगती है
जिन लोगों को भूख कम लगती हो उन्हें हर दिन एक भुट्टा काला नमक और नींबू लगाकर खाना चाहिए। इस तरह भुट्टा खाने से आपके पाचनतंत्र को ऊर्जा मिलेगी। मेटाबॉलिक रेट बढ़ेगा और आपकी भूख खुलेगी।

मानसिक शांति प्रदान करें
यदि आप बहुत अधिक बेचैनी का अनुभव कर रहे हों और आपको अपनी समस्या का कारण पता ना हो तो आप स्वीट कॉर्न खाकर अपना मन शांत कर सकते हैं। दरअसल, भुट्टे में मौजूद प्राकृतिक गुण मन को शांत करने में मदद करते हैं।

आपको बता दें कि प्रकृति में करीब 600 प्रकार के कैराटिनॉयड्स पाए जाते हैं। इनमें से केवल ल्यूटिन और ज़ेक्सैंथिन ही ऐसे कैराटिनॉयड हैं, जो हमारे मस्तिष्क में जाते हैं। ये दोनों ही कैराटिनॉयड भुट्टे में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यही कारण है कि भुट्टा खाने के बाद एक अलग तरह की संतुष्टि का अहसास होता है।

आंखों के लिए लाभकारी भुट्टा
ल्यूटिन और ज़ेक्सैंथिन आंखों को हेल्दी रखने के लिए बहुत अधिक जरूरी हैं। ये दोनों कैरोटिनॉयड्स आंखों की रोशनी बढ़ाने का कार्य करते हैं। ये आंखों के रेटिना को स्वस्थ रखते हैं और लंबे समय तक मोतियाबिंद की बीमारी से बचाते हैं।

जो लोग भुट्टा, कीवी, पका हुआ केला, पालक, बथुआ, मेथी पत्ता, हरा धनिया और पुदीना इत्यादि नियमित रूप से खाते हैं, उन लोगों की आंखों की रोशनी बुढ़ापे में भी एक दम सही बनी रहती है। क्योंकि ये सभी फल-सब्जियां ल्यूटिन और ज़ेक्सैंथिन से भरपूर होते हैं।

गर्भवती महिलाओं के लिए संदेश
गर्भवती महिलाओं को पॉपकॉर्न, भुट्टा, स्वीटकॉर्न इत्यादि का सेवन अपनी डॉक्टर से सलाह के बाद ही करना चाहिए। कई स्थितियों में गर्भावस्था के दौरान भुट्टा खाना मिसकैरेज यानी गर्भपात की वजह बन जाता है।

lalit sahu Desk
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