बिजली कंपनी मुख्यालय आगजनी : पॉवर परचेज की फाइलें जल गई, आंतरिक जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा

बिजली कंपनी के डगनिया स्थित मुख्यालय की मुख्य ट्रेडिंग शाखा (एमडी ट्रेडिंग) में १३ नवम्बर को हुई आगजनी की घटना में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जल कर खाक हो गए थे। यह खुलासा आंतरकि जाँच रिपोर्ट में हुआ है।

By: Devendra sahu

Published: 08 Dec 2019, 05:51 PM IST

रायपुर. बिजली कंपनी के डगनिया स्थित मुख्यालय की मुख्य ट्रेडिंग शाखा (एमडी ट्रेडिंग) में हुई आगजनी की घटना में दस्तावेज जले हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है पॉवर परचेजिंग कंपनियों की फाइलों, चेक बाउटचर के साथ कैग की रिपोर्ट और जांच प्रतिवेदन समेत कुछ और फाइलें भी हैं। यह खुलासा आंतरिक जांच रिपोर्ट में हुआ है। इसके साथ ही कम्प्यूटर और प्रिंटर के जलने की भी पुष्टि हुई है। हालांकि आग की वजह सॉट सर्किट को ही बताया गया है। घटना के बाद कंपनी अध्यक्ष शैलेंद्र शुक्ला द्वारा गठित आंतरिक जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में महत्वपूर्ण दस्तावेजों के जलने का उल्लेख है। अब देखना यह है कि घटना के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाता है।जले दस्तावेजों के पीछे क्या कोई साजिश भी है? इसका पर कंपनी के अफसर मौन हैं।मगर इस घटना ने मुख्यालय की सुरक्षा पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। जांच कमेटी ने सुरक्षा व्यवस्था को नाकाफी बताया है। गौरतलब है कि १३ नवंबर की रात आगजनी की घटना हुई थी। घटना की सूचना पर फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची, जिसके बाद आग पर समय रहते काबू पा लिया गया। क्योंकि आग इस शाखा के बाद ऊपर की मंजिलों में तेजी से बढ़ रही है।

अभी उच्च स्तरीय कमेटी की नहीं आई रिपोर्ट-
आगजनी की घटना के बाद इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि आग लगी नहीं बल्कि लगाई गई है। यही कारण था कि जांच के लिए राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय कमेटी गठित की है। २३ नवंबर को गृह सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी में अग्निशमन छत्तीसगढ़ के महानिदेशक वीके सिंह और छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनी के प्रबंध संचालक अब्दुल कैशर हक को सदस्य नियुक्ति किया गया है। कमेटी को महीने भर में रिपोर्ट सौंपनी है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि उच्च स्तरीय जांच रिपोर्ट में क्या निकलकर सामने आता है।

ये कमियां हुई उजागर-
मुख्यालय के मुख्य भवनों में कहीं भी सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं, जबकि ये जरूरी हैं।
आगजनी की घटना पर काबू पाने के लिए फायर फाइटिंग सिस्टम पर्याप्त नहीं हैं।
आने-जाने वालों से पूछताछ दिन हो या रात, दोनों समय पर नहीं होती है। जो अनिवार्य है।

Devendra sahu Desk
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