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मोबाइल टार्च की रोशनी में सड़क पर बैठे बिजली संविदा कर्मी, कलेक्टर की समझाइश पर हटे

- विद्युत संविदा कर्मियों ने आंदोलन 37वें दिन
- ऊर्जा मंत्री के बंगले का घेराव करने निकले थे, पुलिस के रोका तो हुए नाराज

रायपुर

Updated: April 16, 2022 04:02:05 pm

रायपुर। नियमिरीकरण व अनुकंपा नियुक्ति (Regularization and Compassionate Appointment) की मांग को लेकर 37 दिनों से धरना दे रहे विद्युत संविदा कर्मचारी (electrical contract worker) शुक्रवार को दोपहर करीब 3 बजे ऊर्जा मंत्री के बंगले का घेराव करने निकले थे। इस बीच पुलिस (Raipur Police) ने स्मार्ट सिटी कार्यालय (smart city office) के पास उन्हें बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। इससे नाराज होकर प्रदर्शनकारी मोबाइल टार्च की रोशनी में सड़क पर बैठकर नारेबाजी करने लगे। संघ अध्यक्ष विवेक भगत बताया, हमारी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। जब तक कोई प्रशासनिक अधिकारी व पावर कंपनी के कोई आकर बात नही करता हैं, तब तक हम नहीं हटेंगे। जानकारी मिलते ही कलेक्टर सौरभ कुमार (Collector Saurabh Kumar) मौके पर पहुंचे और समझाइश दी। इसके बाद सभी प्रदर्शनकारी धरनास्थल लौट गए।
मोबाइल टार्च की रोशनी में सड़क पर बैठे बिजली संविदा कर्मी, कलेक्टर की समझाइश पर हटे
Electricity contract workers removed on the advice of the collector
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संघ के अभिषेक वर्मा ने कहा कि विद्युत संविदा कर्मियों का शांतिपूर्ण अनिश्चित कालीन आंदोलन को एक माह से अधिक हो गया है। इस बीच एक विद्युत संविदा कर्मी का सड़क हादसे में जान भी चला गया, किन्तु फिर भी पॉवर कम्पनी प्रबंधन ने विद्युत संविदा कर्मियों के प्रति संवेदना प्रकट कर उनसे चर्चा आज पर्यंत तक नहीं किया है। जबकि संविदा कर्मी ऊर्जा मंत्री एवं शासन भी लगतार गुहार लगा रहे हैं, लेकिन शासन भी लगातार चुप्पी साधे हुए है। क्या ऐसा ही विद्युत संविदा कर्मियों के साथ होता रहेगा? एक के बाद एक संविदा कर्मी दर्दनाक हादसे का शिकार होते रहेंगे, फिर भी शासन चुप तमासा देखता बैठा रहेगा।
मोबाइल टार्च की रोशनी में सड़क पर बैठे बिजली संविदा कर्मी, कलेक्टर की समझाइश पर हटे
IMAGE CREDIT: Dinesh Yadu @ Patrika Raipur
महासचिव उमेश पटेल बताया, छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कम्पनी (Chhattisgarh State Power Company) में लाइन परिचारक संविदा कर्मियों को दो साल के संविदा- परिवीक्षा अवधि पूर्ण करने पर नियमित करने का परम्परा रहा हैं, किन्तु राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण विद्युत संविदा कर्मियों का नियमितीकरण नहीं हो रहा है। संविदा कर्मी 2 वर्ष में नियमित हो जाने के उम्मीद से अपने जान जोखिम में डाल कर काम करने के लिए इस विभाग में आ जाते हैं। किंतु आये दिन उनके साथ विद्युत दुर्घटनाएं हो जाते हैं, जिसमें सैकड़ों लोगों के अंग भंग हो गए हैं और 25 से अधिक संविदा कर्मियों का निधन हो गया है। इसलिए विद्युत संविदा कर्मी अपने नियमितीकरण और अनुकम्पा नियुक्ति का मांग कर रहे हैं। जिस कारण संविदा कर्मी शासन तक अपनी बातों को पहुंचना चाहते हैं। लेकिन शासन भी आंख कान मूंदे हुए है और इधर एक तरफ विद्युत संविदा कर्मियों के जान बारी बारी से जा रहा है।

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