नेटवर्क का बहाना तो कभी सर्वर ठप की दुहाई, लगवाते हैं दफ्तरों तक दौड़

छत्तीसगढ़ ई-गवर्नेस को लेकर खिताब पा चुका है। देश के छह राज्यों में प्रदेश का नाम है।

By: Bhawna Chaudhary

Published: 16 Dec 2020, 01:52 PM IST

रायपुर. छत्तीसगढ़ ई-गवर्नेस को लेकर खिताब पा चुका है। देश के छह राज्यों में प्रदेश का नाम है। लेकिन हकीकत यह है कि इन सिस्टम को भी दलालों और अधिकारियों नें कमजोर कर रखा है। सभी जिलों में अब तक पचास प्रकार की सेवाओं का निराकरण ई-गवर्नेस सिस्टम से किया जाता है।

विभागों में नामांतरण, अनुमति, आवेदन, निविदाएं और शिकायतें करने का सिस्टम पूरी तरह से ऑनलाइन है। इसके बाद भी आम जनता को ऑफलाइन प्रक्रिया पूरा करनी ही होती है। जिससे शासकीय विभागों में दलाली प्रथा मजबूरी बन गई है। इसकी बड़ी वजह है कि ई गवर्नेस सिस्टम की मॉनीटरिंग बेहत कमजोर होना। जिम्मेदारों को नोटिस देने व कार्रवाई करने की प्रक्रिया बेहद सुस्त है। बता दें कि समय सीमा पर काम नहीं करने पर अधिकारियों की वेतन वृद्धि रोकने और कार्रवाई का प्रावधान है, इसलिए सबसे ज्यादा आवेदनों को निरस्त कर दिया जाता है।
पहुंचाते हैं दलालों के पास

पत्रिका ने ई-गवर्नेस सिस्टम को खंगाला, जिसमें खुलासा हुआ कि दिसंबर 2019 से 15 दिसंबर 2020 तक 14123362 आवेदनों में से अनुमोदित 12932198 हुए। 907776 आवेदन वापस कर दिए गए। 225334 निरस्त किए गए। जितने आवेदन अनुमोदित किए गए, उनमें से 11 लाख आवेदन निरस्त और वापसी की श्रेणी में हैं।

Bhawna Chaudhary
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