अधिनियम और संहिता में ट्यूशन फीस की व्याख्या, जिम्मेदार बन रहे अनजान

सिर्फ ट्यूशन फीस लेने के हाईकोर्ट के निर्देश के बाद पालकों, प्राइवेट स्कूलों और प्रशासन के बीच विवाद चरम पर है। एक तरफ तमाम नियमों की धज्जियां उड़ाकर निजी स्कूल मनमानी फीस वसूल रहे हैं।

By: Bhawna Chaudhary

Published: 17 Sep 2020, 08:40 AM IST

रायपुर. सिर्फ ट्यूशन फीस लेने के हाईकोर्ट के निर्देश के बाद पालकों, प्राइवेट स्कूलों और प्रशासन के बीच विवाद चरम पर है। एक तरफ तमाम नियमों की धज्जियां उड़ाकर निजी स्कूल मनमानी फीस वसूल रहे हैं। वहीं, शिक्षा विभाग के जिम्मेदार पालकों की मदद करने के बजाय सबकुछ जानकर भी पल्ला झाड़ रहे हैं। जबकि, अधिनियम और संहिता का हवाला देते हुए पैरेंट्स एसोसिएशन ने ट्यूशन फीस को लेकर प्राइवेट स्कूलों और शिक्षा विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

इन मदों की लेते हैं शुल्क शिक्षा, डेवलपमेंट, मेडिकल, बिल्डिंग, मेंटनेंस, टर्म फीस, बागवानी, योगा, अमलगमेटेड, निर्धन छात्र, स्मार्ट क्लास, परिवहन, वार्षिक, एडमिशन, डायरी, आईडी कार्ड, टाई-बेल्ट, रेड क्रॉस, परीक्षा, विज्ञान, स्काउड-गाइड, पत्रिका, छात्र समूह बीमा योजन, एक्टिविटी, लेट फीस, बोर्ड एफिलेशन, कंप्यूटर, लैब और कॉसन मनी के रूप में शुल्क लिया जाता है।

इस तरह समझें ट्यूशन फीस
आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80सी के अनुसार ट्यूशन फीस वह फीस होती है, जो पालक अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूलों को देते हैं। इसमें डेवलपमेंट शुल्क, डोनेशन, कैंपिटेंशन और लेट फीस शामिल नहीं होती है।

शिक्षा संहिता नियम 124 ए. अध्याय 9 शिक्षा शुल्क पेज नंबर 831 के अनुसार शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में विभिन्न पाठ्यक्रम संबंधी व गतिविधियों के संचालन के लिए शुल्क लेना।

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 22अप्रैल 2016 को सर्कुलर के अनुसार पालकों की आम समिति और जिला शिक्षा अधिकारी की उपस्थिति में निर्धारित किया गया शुल्क।

सीबीएसई एफिलिशन बायलॉज 2018 के अनुसार स्कूलों में फीस पीटीए (पैरेंट्स टीचर एसोसिएशन) द्वारा स्कूलों में दी जाने वाली सुविधाओं के अनुसार तय होती है।

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