scriptEye checkup in schools, the effect of online education will be visible | स्कूलों में होगी आंखों की जांच, ऑनलाइन पढ़ाई का दिखेगा असर | Patrika News

स्कूलों में होगी आंखों की जांच, ऑनलाइन पढ़ाई का दिखेगा असर

- 14 नवंबर बाल दिवस से हुई शुरुआत, पहले दिन छात्रावासों में पहुंचीं स्वास्थ्य टीमें
- बाल नेत्र सुरक्षा सप्ताह : 6 से 15 वर्ष तक के बच्चों के आंखों का होगा परीक्षण
- 1.23 करोड़ रुपए बजट इस साल के लिए स्वीकृत
- 35 हजार चश्मा बांटने का लक्ष्य है।

रायपुर

Published: November 15, 2021 05:06:50 pm

रायपुर. कोरोना काल में 2 साल तक स्कूल बंद थे। अब खुलने शुरू हुए हैं। इस दौरान बच्चों ने घर में रहकर ऑनलाइन पढ़ाई की। तय है कि इससे बच्चों की आंख पर असर पड़ा होगा। कितने बच्चों में देखने की क्षमता कम हुई है, बहुत जल्द यह आंकड़ा सामने आएगा। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग ने 14 नवंबर, बाल दिवस के दिन से 'बाल नेत्र सुरक्षा सप्ताह' अभियान शुरू कर दिया है। पहले दिन स्वास्थ्य विभाग की टीमें छात्रावास में पहुंची, सोमवार से ये स्कूलों में दस्तक देंगी। बच्चों की नि:शुल्क आंख जांच के साथ नि:शुल्क चश्मा भी दिया जाएगा।

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अभियान को लेकर स्वास्थ्य संचालक द्वारा जिला सीएमएचओ को निर्देशित किया गया। जिला स्तर पर जिला अंधत्व निवारण अधिकारी के नेतृत्व में नेत्र सहायकों और चिरायु दल की टीमें गठित कर दी गई हैं। यह अपनी तरह का देश का पहला कार्यक्रम है, जिसकी शुरुआत साल 2018-19 में की थी। मगर, मार्च 2020 से कोरोना की वजह से स्कूल बंद हुए तो अभियान भी रूक गया। यह अभियान सिर्फ सरकारी स्कूलों में चलेगा। निजी स्कूलों को पत्र लिखकर कहा गया है कि वे स्कूलों में निजी डॉक्टरों द्वारा कैंप लगवाकर जांच करवाएं, रिपोर्ट दें। गौरतलब है कि 2018-19 में 9178 स्कूलों में स्वास्थ्य अमला पहुंचा था। 9.61 लाख बच्चों की आंख जांच हुई थी, 22 हजार में दृष्टिदोष पाया गया था। इन्हें चश्मे मुहैया करवाए गए थे। साथ ही इस दौरान ओपीडी में आने वाले 117 स्कूली छात्रों को चश्में दिए गए हैं। दिए जाने के आदेश भी हैं।

इस प्रकार चलता है अभियान
स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिक्षकों को इस प्रकार से प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे वे ऐसे बच्चों की पहचान कर सकें जिन्हें कम दिखाई देता है। शिक्षक इन बच्चों की सूची तैयार रखते हैं। इन्हें क्लास में आगे की बैंच पर बैठाया जाता है। नेत्र जांच के बाद चश्में दिए जाते हैं।

इस मुहिम का उद्देश्य बच्चों को भविष्य में होने वाली नेत्र संबंधित समस्या से बचाना है। चश्मे तो देगा, अगर कोई अन्य बीमारी की पहचान होती है तो उसका नि:शुल्क उपचार भी होगा।
- डॉ. सुभाष मिश्रा, राज्य नोडल अधिकारी, अंधत्व निवारण कार्यक्रम एवं प्रवक्ता, स्वास्थ्य विभाग

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